हिन्दू व्रत, त्यौहार, मंत्र, आरती, चालीसा, पंचांग और सनातन धर्म की जानकारी हिन्दी में।
गुरुवार — दिन के देवगुरुवार के मंत्र, चालीसा, आरती और इस दिन से जुड़े सम्पूर्ण विधि-विधान।
एकादशी, अमावस्या, पूर्णिमा और मासानुसार पर्वों की सटीक तिथियाँ, समय और काउंटडाउन।
विष्णु सहस्रनाम, ॐ नमो भगवते वासुदेवाय — हिन्दी अनुवाद और जप-गणना के साथ।
परिहार: राई अथवा जौ खाकर यात्रा करें।
पूरी जानकारी पाएँ →सनातन धर्म, संस्कृति और देवी-देवताओं से जुड़े अनसुने तथ्य।
केरल के शरण गुरुवयूर नें भगवान श्री कृष्ण की 60 फीट ऊँची और 34 फीट चौड़ी यह चित्रकला 100 दिनों में बनायी है। शरण गुरुवयूर अभी भी इस चित्रकला को स्थापित कराने के लिये संघर्ष कर रहें हैं, इन्होनें भगवान श्री विष्णु के महाअवतारों की कई अन्य चित्रकलाएं भी बनाई हैं जो बहुत लोकप्रिय हैं।
श्मशानों के द्वारपाल शिव जी के अवतार भैरव होते हैं, काशी के द्वारपाल काल भैरव हैं, इसी प्रकार उज्जैन के द्वारपाल बटुक भैरव हैं। काशी के दक्षिण ओर स्थित राजा हरिश्चंद्र घाट में शिव जी, मसान रूप में पूजे जाते हैं, जो सर्वाधिक भयंकर रूप वाले तथा श्मशान के स्वामी हैं।
सुश्रुत संहिता के अनुसार, भगवान धन्वंतरि ने भगवान विष्णु के निर्देश पर काशी नरेश धन्वराज के घर पुत्र रूप में जन्म लिया, जिन्हें ‘धन्वंतरि द्वितीय’ कहा गया। काशी नरेश दिवोदास जी को धन्वंतरि का अवतार माना जाता है। सुश्रुत संहिता में उनके उपदेश का उल्लेख मिलता है, जिसमें वे अपने शिष्यों से कहते हैं—"मैं आदिदेव धन्वंतरि हूँ, जो देवताओं की वृद्धावस्था, रोग और मृत्यु को हरने वाला हूँ। मैंने अष्टांग आयुर्वेद के विशेष अंग ‘शल्य चिकित्सा’ का ज्ञान देने के लिए अवतार लिया है।” यही धन्वंतरि द्वितीय आगे चलकर काशी के राजा दिवोदास बने और उन्होंने आयुर्वेद का विस्तार किया।
भगवान शिव और माँ पार्वती के विवाह के समय भगवान श्री विष्णु नें शिवजी का वर्णन करते हुये कर्पूरगौरम् करुणावतारं मन्त्र का गायन किया था, इस मन्त्र द्वारा मृत्युलोक के देवता और भयंकर स्वरुप वाले भगवान शिव के दिव्य सौम्य स्वरुप का वर्णन किया गया है। इस स्तुति में बताया गया है कि भगवान शिव कर्पूर जैसे गौर वर्ण वाले हैं, वह करुणा के अवतार हैं और समस्त संसार के अधिपति हैं, सर्पों का हार धारण करने वाले भगवान शिव और माँ पार्वती भक्तों के ह्रदय में सदैव निवास करते हैं।
केदारनाथ में शिव जी रुद्ररूप में निवास करते हैं, इसीलिये इस संपूर्ण क्षेत्र को रुद्रप्रयाग कहते हैं। श्री केदारनाथ का मंदिर उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले के रुद्रप्रयाग नगर में है, मान्यता है कि यहीं भगवान शिव ने रौद्र रूप में अवतार लिया था। धार्मिक ग्रंथों अनुसार बारह ज्योतिर्लिंगों में केदार ज्योतिर्लिंग सबसे ऊंचे स्थान पर स्थित है। शिव पुराण के अनुसार मनुष्य यदि बद्रीवन की यात्रा करके नर तथा नारायण और केदारेश्वर शिव के स्वरूप का दर्शन करता है तो, उसे नि:सन्देह मोक्ष प्राप्त होता है।
बद्रीनाथ जी को सृष्टि का आठवां वैकुंठ कहा गया है, जहां भगवान विष्णु 6 माह निद्रा में रहते हैं और 6 माह जागते हैं। यहां भगवान बद्रीनाथ की मूर्ति शालग्राम शिला से बनी हुई, चतुर्भुज ध्यानमुद्रा में है। यहां नर-नारायण विग्रह की पूजा होती है और अखण्ड दीप जलता है, जो कि अचल ज्ञानज्योति का प्रतीक है। मान्यता है कि जब भी केदारनाथ और बद्रीनाथ जी के कपाट खुलते हैं उस समय मंदिर में जलने वाले दीपक के दर्शन का विशेष महत्व होता है। 6 महीने तक बंद दरवाजे के अंदर भी यह दीप जलता रहता है, मान्यता है कि दैवीय शक्तियां इस दीपक को जलाए रखती हैं।
भक्ति सरोवर के माध्यम से हमारा प्रयास हिन्दू संस्कृति और अध्यात्म से जुड़ी जानकारियों एवं मान्यताओं को एक स्थान पर संकलित करना है। नवम्बर 2016 से हम निरंतर आध्यात्मिक लेख, हिन्दू त्यौहार, व्रत, पूजा-विधि, वैदिक मंत्र, पौराणिक कथाएँ एवं धार्मिक स्थलों की जानकारी अपने ब्लॉग, मोबाइल ऐप्स और यू-ट्यूब चैनल के माध्यम से प्रकाशित कर रहे हैं।
भारत पूरी दुनिया में अध्यात्म के लिए प्रसिद्ध है। भक्ति सरोवर के माध्यम से हमारा प्रयास हिन्दू संस्कृति और पुरातन मान्यताओं को एक जगह संकलित करना है, जिससे सनातन धर्म के बारे में अधिक से अधिक सही जानकारियाँ एक स्थान पर उपलब्ध हो सकें।
हमारा प्रयास भारत की नयी पीढ़ी को प्राचीन संस्कृति और पुरातन मान्यताओं की याद दिलाने वाला है — चरित्र निर्माण और सामाजिक निर्माण को जागृत करने का एक प्रयास।
और जानें →हिन्दू धर्म, जैन धर्म, बौद्ध धर्म, सिख धर्म, अध्यात्म एवं ज्योतिष, राशिफल, धार्मिक एवं पौराणिक कथाएँ, धार्मिक वीडियो, वैदिक मंत्र, धार्मिक स्थलों की जानकारी, व्रत एवं त्यौहार, और धार्मिक वॉलपेपर एवं मीडिया सामग्री।