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चतुर्थ श्रावण सोमवार व्रत

24 अगस्त 2026 · सोमवार श्रावण, शुक्ल द्वादशी

श्रावण माह 2026 में चतुर्थ श्रावण सोमवार व्रत कब है?

संक्षिप्त उत्तर

चतुर्थ श्रावण सोमवार व्रत 2026 कब है?

चतुर्थ श्रावण सोमवार व्रत 2026 सोमवार, 24 अगस्त 2026 को मनाई जाएगी। चतुर्थ श्रावण सोमवार व्रत की तिथि श्रावण, शुक्ल द्वादशी है। चतुर्थ श्रावण सोमवार व्रत की पूजा का शुभ मुहूर्त 05:36 – 08:09 तक रहेगा।

दिनांक24 अगस्त 2026
तिथिश्रावण, शुक्ल द्वादशी
पूजा मुहूर्त05:36 – 08:09
पर्व जानकारी

पर्व सारांश

मुख्य तिथिश्रावण, शुक्ल द्वादशीश्रावण माह के व्रत-त्योहार
मुख्य देवताभगवान शिव
वार-देवताशिव जीसोमवार
नक्षत्रपूर्वाषाढ़ाप्रीति
संक्षिप्त परिचय

चतुर्थ श्रावण सोमवार व्रत का महत्व और उत्सव

चतुर्थ श्रावण सोमवार व्रत श्रावण, शुक्ल द्वादशी तिथि को मनाया जाने वाला हिंदू पर्व है। इस दिन भगवान शिव की पूजा की जाती है और सुख-समृद्धि एवं रक्षा की प्रार्थना की जाती है।

पंचांग विवरण

त्योहार का पंचांग और शुभ समय

मुख्य पंचांग विवरण

तिथि (सूर्योदय)शुक्ल द्वादशी
नक्षत्रपूर्वाषाढ़ा
योगप्रीति
करणबव
ऋतुशरददक्षिणायन
संवत्सरसिद्धार्थि
दिशा शूलपूर्वदर्पण देखकर या दूध पीकर

चतुर्थ श्रावण सोमवार व्रत के दिन पूजा, स्नान और दान का शुभ समय

मुहूर्त / योगसमयउपयोगस्थिति
ब्रह्म मुहूर्त 04:00 – 04:48 स्नान, जप, संकल्प शुभ
प्रातः पूजन 05:36 – 08:09 पूजा और संकल्प श्रेष्ठ
अभिजीत मुहूर्त 11:34 – 12:26 सामान्य शुभ कार्य शुभ
विजय मुहूर्त 16:42 – 17:33 कार्य-सिद्धि, संकल्प शुभ
सन्ध्या पूजन 17:37 – 18:49 दीप, आरती, कथा शुभ
राहु काल (वर्ज्य) 07:11 – 08:48 शुभ कार्य में टालें सावधानी
तिथि शुरू 24 Aug 05:00 AM
ब्रह्म मुहूर्त जप / स्नान 04:00–04:48
प्रातः पूजा मुख्य संकल्प 05:36–08:09
अभिजीत शुभ मुहूर्त 11:34 – 12:26
तिथि समाप्त 25 Aug 05:00 AM
सन्ध्या पूजन दीप, आरती 17:37–18:49

समय वाराणसी के सूर्योदय/सूर्यास्त पर आधारित हैं; स्थान अनुसार थोड़ा अंतर संभव है।

पर्व विवरण

चतुर्थ श्रावण सोमवार व्रत — महत्व, कथा और परंपरा

श्रावण मास के चौथे सोमवार को रखा जाने वाला यह व्रत शिव-भक्ति का शिखर माना गया है। वर्षा ऋतु के इस पवित्र काल में, जब धरती हरियाली से सजी रहती है, साधक भगवान शिव के तंत्रेश्वर रूप की विशेष आराधना करते हैं। सूर्योदय के बाद कुश के आसन पर बैठकर रुद्राक्ष-माला से ‘ॐ रुद्राय शत्रु संधाराय क्लीं कार्य-सिद्धये महादेवाय फट्’ मंत्र की ग्यारह माला जपने का विधान है। शिव-पूजन के साथ भगवान विष्णु का स्मरण भी कल्याणकारी माना गया है, जिससे दोनों देवों का संयुक्त अनुग्रह प्राप्त होता है। मान्यता है कि इस साधना से विघ्न, रोग और अकाल मृत्यु दूर होती है तथा आयु, आरोग्य और समृद्धि में उत्तरोत्तर वृद्धि होती है।

मंत्र संग्रह

चतुर्थ श्रावण सोमवार व्रत से संबंधित मंत्र

सभी मंत्र →

शिव मूल मंत्र

ॐ नमः शिवाय

“ॐ नमः शिवाय” का अर्थ है—मैं भगवान शिव को नमन करता हूँ। इसमें “ॐ” परम चेतना, “नमः” विनम्र समर्पण और “शिवाय” कल्याणकारी भ…

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विश्वसनीयता एवं प्रामाणिकता

चतुर्थ श्रावण सोमवार व्रत की तिथि कैसे निर्धारित हुई?

पंचांग-सत्यापित
पंचांग तिथिश्रावण, शुक्ल द्वादशी
गणना का आधारतिथि-आधारित (चंद्र-सौर)
गणना पद्धतिदृक् गणित (Meeus)
संदर्भ स्थानउज्जैन
आराध्य देवभगवान शिव
अंतिम संशोधन27 Apr 2026

तिथि का निर्धारण सूर्योदय के समय प्रचलित तिथि से होता है, और सूर्योदय प्रत्येक नगर में भिन्न होता है — इसलिए स्थान बदलने पर तारीख़ में एक दिन का अंतर संभव है। इसी कारण Bhakti Sarovar पर समय एक राष्ट्रीय औसत नहीं, बल्कि आपके चुने हुए नगर के वास्तविक सूर्योदय के अनुसार गणना किए जाते हैं। पूरी गणना पद्धति पढ़ें →

इस पृष्ठ के योगदानकर्ता
प्रमूल लेखनप्रियंका शर्मा शास्त्रीय सत्यापनचन्द्रभूषण मणि त्रिपाठी दीसंपादकीय समीक्षादीपक शर्मा

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सामान्य प्रश्न

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

2026 में चतुर्थ श्रावण सोमवार व्रत 24 अगस्त 2026 (सोमवार) को है।
चतुर्थ श्रावण सोमवार व्रत श्रावण, शुक्ल द्वादशी तिथि को मनाया जाने वाला पर्व है।
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अस्वीकरण

इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह केवल सामान्य सूचना हेतु हैं। भक्ति सरोवर इनका समर्थन नहीं करता। जानकारी विभिन्न पंचांग, प्रवचनों, मान्यताओं और धर्मग्रंथों से संग्रहित है। कृपया अपने विवेक का उपयोग करें।