गोस्वामी तुलसीदास जयन्ती — महत्व, कथा और परंपरा
श्रावण शुक्ल सप्तमी को मनाई जाने वाली गोस्वामी तुलसीदास जयंती लोक-आस्था, भक्ति-काव्य और नैतिक मूल्यों के उत्सव का दिन है। महाकवि तुलसीदास ने “सत्य और परोपकार” को सर्वोच्च धर्म तथा “त्याग” को जीवन-मंत्र बताया। रामचरितमानस के साथ कवितावली, दोहावली, हनुमान बाहुक, पार्वती मंगल व रामलला नहछू जैसी रचनाएँ रच कर उन्होंने राम-भक्ति को जन-जन तक पहुँचाया। उनकी जयंती पर मंदिरों व घरों में मानस-पारायण, कीर्तन और हनुमान चालीसा पाठ होते हैं। श्रद्धालु श्रीराम-सीता, हनुमान और तुलसी की प्रतिमाओं का पूजन कर पुण्य अर्जित करते हैं तथा लोकमंगल, मानवता और कर्तव्य-निष्ठा के संकल्प दोहराते हैं।