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चतुर्थ मंगला गौरी व्रत

25 अगस्त 2026 · मंगलवार श्रावण, शुक्ल द्वादशी

श्रावण माह 2026 में चतुर्थ मंगला गौरी व्रत कब है?

संक्षिप्त उत्तर

चतुर्थ मंगला गौरी व्रत 2026 कब है?

चतुर्थ मंगला गौरी व्रत 2026 मंगलवार, 25 अगस्त 2026 को मनाई जाएगी। चतुर्थ मंगला गौरी व्रत की तिथि श्रावण, शुक्ल द्वादशी है। चतुर्थ मंगला गौरी व्रत की पूजा का शुभ मुहूर्त 05:36 – 08:09 तक रहेगा।

दिनांक25 अगस्त 2026
तिथिश्रावण, शुक्ल द्वादशी
पूजा मुहूर्त05:36 – 08:09
पर्व जानकारी

पर्व सारांश

मुख्य तिथिश्रावण, शुक्ल द्वादशीश्रावण माह के व्रत-त्योहार
मुख्य देवतामंगला गौरी
वार-देवताहनुमान जीमंगलवार
नक्षत्रउत्तराषाढ़ाआयुष्मान
संक्षिप्त परिचय

चतुर्थ मंगला गौरी व्रत का महत्व और उत्सव

चतुर्थ मंगला गौरी व्रत श्रावण, शुक्ल द्वादशी तिथि को मनाया जाने वाला हिंदू पर्व है। इस दिन मंगला गौरी की पूजा की जाती है और सुख-समृद्धि एवं रक्षा की प्रार्थना की जाती है।

पंचांग विवरण

त्योहार का पंचांग और शुभ समय

मुख्य पंचांग विवरण

तिथि (सूर्योदय)शुक्ल द्वादशी
नक्षत्रउत्तराषाढ़ा
योगआयुष्मान
करणबालव
ऋतुशरददक्षिणायन
संवत्सरसिद्धार्थि
दिशा शूलउत्तरगुड़ खाकर

चतुर्थ मंगला गौरी व्रत के दिन पूजा, स्नान और दान का शुभ समय

मुहूर्त / योगसमयउपयोगस्थिति
ब्रह्म मुहूर्त 04:00 – 04:48 स्नान, जप, संकल्प शुभ
प्रातः पूजन 05:36 – 08:09 पूजा और संकल्प श्रेष्ठ
अभिजीत मुहूर्त 11:34 – 12:25 सामान्य शुभ कार्य शुभ
विजय मुहूर्त 16:41 – 17:32 कार्य-सिद्धि, संकल्प शुभ
सन्ध्या पूजन 17:36 – 18:48 दीप, आरती, कथा शुभ
राहु काल (वर्ज्य) 15:12 – 16:48 शुभ कार्य में टालें सावधानी
तिथि शुरू 25 Aug 05:00 AM
ब्रह्म मुहूर्त जप / स्नान 04:00–04:48
प्रातः पूजा मुख्य संकल्प 05:36–08:09
अभिजीत शुभ मुहूर्त 11:34 – 12:25
तिथि समाप्त 26 Aug 05:00 AM
सन्ध्या पूजन दीप, आरती 17:36–18:48

समय वाराणसी के सूर्योदय/सूर्यास्त पर आधारित हैं; स्थान अनुसार थोड़ा अंतर संभव है।

पर्व विवरण

चतुर्थ मंगला गौरी व्रत — महत्व, कथा और परंपरा

श्रावण मास के चौथे मंगलवार को रखा जाने वाला चतुर्थ मंगला गौरी व्रत विवाह-सम्बन्धी बाधाओं को दूर करने के लिए विशेष रूप से प्रख्यात है। ज्योतिष मानता है कि मंगल दोष से उत्पन्न विलंब या रुकावट को शांत करने हेतु इस दिन माँ गौरी के मंगलमय रूप का पूजन परम फलदायी होता है। व्रती प्रातः स्नान के बाद चौकी पर अष्टगंध और चमेली की कलम से भोजपत्र पर लिखे ‘ॐ गौरीशंकराय नमः’ यंत्र की स्थापना करते हैं, फिर इस मंत्र का 108 बार जप कर सोलह दीप व सोलह नैवेद्य अर्पित करते हैं। शास्त्रों के अनुसार, इस साधना से अविवाहित कन्याओं को योग्य वर तथा विवाहित स्त्रियों को अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद मिलता है; साथ-साथ गृहकलह और अन्य कष्टों की भी समाप्ति होती है।

 

विश्वसनीयता एवं प्रामाणिकता

चतुर्थ मंगला गौरी व्रत की तिथि कैसे निर्धारित हुई?

पंचांग-सत्यापित
पंचांग तिथिश्रावण, शुक्ल द्वादशी
गणना का आधारतिथि-आधारित (चंद्र-सौर)
गणना पद्धतिदृक् गणित (Meeus)
संदर्भ स्थानउज्जैन
आराध्य देवमंगला गौरी
अंतिम संशोधन27 Apr 2026

तिथि का निर्धारण सूर्योदय के समय प्रचलित तिथि से होता है, और सूर्योदय प्रत्येक नगर में भिन्न होता है — इसलिए स्थान बदलने पर तारीख़ में एक दिन का अंतर संभव है। इसी कारण Bhakti Sarovar पर समय एक राष्ट्रीय औसत नहीं, बल्कि आपके चुने हुए नगर के वास्तविक सूर्योदय के अनुसार गणना किए जाते हैं। पूरी गणना पद्धति पढ़ें →

इस पृष्ठ के योगदानकर्ता
प्रमूल लेखनप्रियंका शर्मा शास्त्रीय सत्यापनचन्द्रभूषण मणि त्रिपाठी दीसंपादकीय समीक्षादीपक शर्मा

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सामान्य प्रश्न

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

2026 में चतुर्थ मंगला गौरी व्रत 25 अगस्त 2026 (मंगलवार) को है।
चतुर्थ मंगला गौरी व्रत श्रावण, शुक्ल द्वादशी तिथि को मनाया जाने वाला पर्व है।
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अस्वीकरण

इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह केवल सामान्य सूचना हेतु हैं। भक्ति सरोवर इनका समर्थन नहीं करता। जानकारी विभिन्न पंचांग, प्रवचनों, मान्यताओं और धर्मग्रंथों से संग्रहित है। कृपया अपने विवेक का उपयोग करें।