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शिव मूल मंत्र

शिव मूल मंत्र भगवान शिव का अत्यंत प्रसिद्ध और सरल पंचाक्षरी मंत्र है। यह मंत्र साधक को शिव-तत्व, आंतरिक शांति और आध्यात्मिक स्थिरता से जोड़ता है।

संस्कृत पाठ

ॐ नमः शिवाय

oṁ namaḥ śivāya

मैं कल्याणस्वरूप भगवान शिव को नमस्कार करता हूँ।

अर्थ

“ॐ नमः शिवाय” का अर्थ है—मैं भगवान शिव को नमन करता हूँ। इसमें “ॐ” परम चेतना, “नमः” विनम्र समर्पण और “शिवाय” कल्याणकारी भगवान शिव को संबोधित करता है। यह मंत्र अहंकार को शांत कर साधक को शिव-कृपा और आत्मिक पवित्रता की ओर ले जाता है।

जाप विधि (Chanting Method)

भाषासंस्कृत
दिनसोमवार
समयब्रह्म मुहूर्त या प्रदोष काल
संख्या108
दिशाउत्तर या पूर्व
मालारुद्राक्ष माला
आसनकुश आसन, सुखासन
नियमस्वच्छता, सात्विक आहार और शांत मन रखें
देवताश्री शिव
परंपराशैव

वीडियो गाइड

संबंधित त्योहार

  • • महाशिवरात्रि
  • • श्रावण मास
  • • प्रदोष व्रत
  • • मासिक शिवरात्रि

अनुशंसित मंदिर

  • • काशी विश्वनाथ मंदिर, वाराणसी
  • • महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग, उज्जैन
  • • केदारनाथ मंदिर, उत्तराखंड
  • • सोमनाथ ज्योतिर्लिंग, गुजरात

उत्पत्ति और स्रोत

यह मंत्र शैव परंपरा का प्रमुख मंत्र है और पंचाक्षरी मंत्र के रूप में प्रसिद्ध है। शिव उपासना, ध्यान और जप-साधना में इसका व्यापक प्रयोग होता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इस मंत्र का जाप कब करें?
सोमवार, ब्रह्म मुहूर्त, प्रदोष काल या किसी शांत समय में इसका जाप किया जा सकता है।
कितनी बार जाप करना चाहिए?
सामान्य साधना के लिए 108 बार जाप शुभ माना जाता है।
क्या यह मंत्र कोई भी जप सकता है?
हाँ, श्रद्धा और शुद्ध भाव से कोई भी व्यक्ति इसका जाप कर सकता है।
किस माला से जाप करें?
शिव मंत्र के लिए रुद्राक्ष माला उपयुक्त मानी जाती है।

योगदानकर्ता

लेखक
प्रियंका शर्मा
लिप्यंतरण
अवधेश तिवारी
प्रूफरीडिंग
दीपक शर्मा

लाभ

  • मन को शांति प्रदान करता है
  • नकारात्मक विचारों को शांत करता है
  • शिव-भक्ति को गहरा करता है
  • ध्यान और आत्मचिंतन में सहायता करता है
  • आध्यात्मिक संतुलन बढ़ाता है
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