हिंदू पंचांग के अनुसार रंग पंचमी का पर्व चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि को मनाया जाता है। चैत्र महीना वसंत ऋतु का प्रतीक माना जाता है, जब प्रकृति में नवजीवन, सौंदर्य और ऊर्जा का संचार होता है। इसी ऋतु के उल्लासपूर्ण वातावरण में रंग पंचमी होली के पाँच दिन बाद आती है और उसे आध्यात्मिक अर्थ प्रदान करती है। ब्रज क्षेत्र, विशेष रूप से राधारानी के बरसाने में, इस दिन विशेष पूजा और दर्शन का आयोजन होता है। महाराष्ट्र में रंग पंचमी परंपरागत रूप से बड़े उत्साह के साथ मनाई जाती है, वहीं राजस्थान और मध्य प्रदेश के कई क्षेत्रों में भी यह पर्व प्रचलित है। धार्मिक मान्यता के अनुसार रंग पंचमी देवताओं को समर्पित पर्व है। इस दिन रंगों के माध्यम से सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह माना जाता है और आसमान की ओर रंग उछालकर देवताओं का आह्वान किया जाता है। यह पर्व आनंद, श्रद्धा और आध्यात्मिक चेतना का प्रतीक है।