आषाढ़ हिन्दू पंचांग का चौथा महीना है। गर्मी के बाद वर्षा की शुरुआत इसी समय होती है। धार्मिक परंपराओं में यह महीना भगवान विष्णु की पूजा, देवी आराधना और गुरु के प्रति सम्मान प्रकट करने से जुड़ा है।
आषाढ़ शुक्ल द्वितीया को भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा निकाली जाती है। पुरी में भगवान जगन्नाथ अपने भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ रथ पर सवार होकर गुंडिचा मंदिर जाते हैं। इसी पक्ष की एकादशी को देवशयनी एकादशी मनाई जाती है। मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु चार महीने के लिए योगनिद्रा में जाते हैं और चातुर्मास आरंभ हो जाता है। इस अवधि में विवाह तथा गृह प्रवेश जैसे मांगलिक कार्य सामान्यतः नहीं किए जाते।
आषाढ़ पूर्णिमा को गुरु पूर्णिमा या व्यास पूर्णिमा कहा जाता है। यह दिन महर्षि वेदव्यास और अपने गुरुजनों के प्रति कृतज्ञता प्रकट करने का अवसर है। श्रद्धालु गुरु का आशीर्वाद लेते हैं, धार्मिक ग्रंथों का पाठ करते हैं और ज्ञान के महत्व को याद करते हैं। आषाढ़ शुक्ल पक्ष में गुप्त नवरात्रि भी मनाई जाती है, जिसमें साधक माँ दुर्गा और दस महाविद्याओं की उपासना करते हैं।