मत्स्य जयंती चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाई जाती है। चैत्र महीना वसंत ऋतु का समय होता है, जब सृष्टि में नवचेतना और संतुलन का भाव दिखाई देता है। इसी पावन काल में भगवान विष्णु के प्रथम अवतार, मत्स्य अवतार की जयंती मनाई जाती है। धार्मिक मान्यता है कि भगवान विष्णु ने इस दिन मत्स्य रूप धारण कर सृष्टि की रक्षा की थी। श्री विष्णु पुराण के अनुसार मत्स्य अवतार भगवान विष्णु का पहला अवतार है, जिसे उन्होंने राक्षस हयग्रीव से वेदों और ब्रह्मांड की रक्षा के लिए धारण किया था। इस दिन भगवान विष्णु के मत्स्य स्वरूप की पूजा विशेष फलदायी मानी जाती है। मत्स्य जयंती पर मत्स्य पुराण का पाठ या श्रवण करना श्रेष्ठ माना गया है। साथ ही मछलियों को जल में छोड़ना या उन्हें आटे की गोलियां खिलाना पुण्यकारी कर्म माना जाता है, जो करुणा और संरक्षण की भावना को दर्शाता है।