हिंदू पंचांग में ज्येष्ठ साल का तीसरा और सबसे तप्त महीना माना जाता है। चिलचिलाती धूप के बीच पानी ही असली सहारा होता है, इसलिए इस दौरान जल की पूजा-अर्चना स्वाभाविक रूप से बढ़ जाती है। गंगा दशहरा और निर्जला एकादशी—दोनों जल से जुड़ी यही भावना जगाते हैं। पुराने लोग अक्सर समझाते हैं, “ज्येष्ठ मास जो दिन में सोए, ओकर जर असाढ़ में रोए।” साफ इशारा यह कि जेठ की दोपहर में नींद या धूप, दोनों ही सेहत बिगाड़ सकती हैं। परंपरा यह भी याद दिलाती है कि इसी महीने काले या सफेद तिल दान करने से अकाल मृत्यु का डर कम होता है और शरीर तंदुरुस्त बना रहता है।