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वृषभ संक्रांति का पर्व तब मनाया जाता है जब सूर्य मेष राशि से निकलकर वृषभ राशि में प्रवेश करते हैं। यह संक्रांति सामान्यतः वैसाख मास के उत्तरार्ध में आती है और ऋतु परिवर्तन का संकेत देती है। इस काल में सूर्य कुछ दिनों के लिए रोहिणी नक्षत्र में स्थित रहते हैं, जिससे भीषण गर्मी का दौर आरंभ होता है। इसी अवधि को नवतपा कहा जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इस समय जलदान, प्याऊ लगाना और प्यासों को पानी पिलाना अत्यंत पुण्यदायी होता है। वृषभ संक्रांति के दिन भगवान शिव के ऋषभ रूद्र स्वरूप और सूर्यदेव की पूजा करना विशेष फल प्रदान करने वाला माना गया है। यह पर्व सेवा, संयम और प्रकृति के साथ संतुलन का स्मरण कराता है।