यमुना छठ, जिसे यमुना षष्ठी भी कहा जाता है, चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को मनाई जाती है। चैत्र का महीना वसंत ऋतु का प्रतीक है, जब प्रकृति में शुद्धता और नवचेतना का संचार होता है। इसी पावन समय में यह पर्व माँ यमुना के जन्मदिवस के रूप में श्रद्धापूर्वक मनाया जाता है। इस दिन यमुना जी के तटवर्ती घाटों पर विशेष पूजा और आरती का आयोजन होता है। पुराणों में उल्लेख मिलता है कि यमुना छठ के दिन सभी देवता यमुना नदी में स्नान करते हैं। माँ यमुना को सूर्य देव की पुत्री तथा यम और शनि देव की बहन माना गया है। धार्मिक विश्वास है कि इस दिन यमुना में स्नान और पूजन करने से पापों का नाश होता है। मान्यता के अनुसार इसी तिथि को श्री वल्लभाचार्य ने यमुना अष्टक की रचना की थी। इस अवसर पर पुष्प अर्पित कर दीप प्रज्वलित करना शुभ माना जाता है।