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वट पूर्णिमा व्रत

18 जून 2027 · शुक्रवार ज्येष्ठ, शुक्ल पूर्णिमा

वट पूर्णिमा व्रत कब है?

संक्षिप्त उत्तर

वट पूर्णिमा व्रत 2027 कब है?

वट पूर्णिमा व्रत 2027 शुक्रवार, 18 जून 2027 को मनाई जाएगी। वट पूर्णिमा व्रत की तिथि ज्येष्ठ, शुक्ल पूर्णिमा है। वट पूर्णिमा व्रत की पूजा का शुभ मुहूर्त 05:08 – 07:52 तक रहेगा।

दिनांक18 जून 2027
तिथिज्येष्ठ, शुक्ल पूर्णिमा
पूजा मुहूर्त05:08 – 07:52
पर्व जानकारी

पर्व सारांश

मुख्य तिथिज्येष्ठ, शुक्ल पूर्णिमाज्येष्ठ माह के व्रत-त्योहार
मुख्य देवताSavitri Satyawan
वार-देवतामाँ लक्ष्मी · माँ संतोषीशुक्रवार
नक्षत्रज्येष्ठासाध्य
संक्षिप्त परिचय

वट पूर्णिमा व्रत का महत्व और उत्सव

वट पूर्णिमा व्रत ज्येष्ठ, शुक्ल पूर्णिमा तिथि को मनाया जाने वाला हिंदू पर्व है। इस दिन Savitri Satyawan की पूजा की जाती है और सुख-समृद्धि एवं रक्षा की प्रार्थना की जाती है।

पंचांग विवरण

त्योहार का पंचांग और शुभ समय

मुख्य पंचांग विवरण

तिथि (सूर्योदय)शुक्ल पूर्णिमा
नक्षत्रज्येष्ठा
योगसाध्य
करणविष्टि
ऋतुग्रीष्मउत्तरायण
संवत्सररौद्र
दिशा शूलपश्चिमजौ या दही खाकर

वट पूर्णिमा व्रत के दिन पूजा, स्नान और दान का शुभ समय

मुहूर्त / योगसमयउपयोगस्थिति
ब्रह्म मुहूर्त 03:32 – 04:20 स्नान, जप, संकल्प शुभ
प्रातः पूजन 05:08 – 07:52 पूजा और संकल्प श्रेष्ठ
अभिजीत मुहूर्त 11:31 – 12:26 सामान्य शुभ कार्य शुभ
विजय मुहूर्त 17:01 – 17:56 कार्य-सिद्धि, संकल्प शुभ
सन्ध्या पूजन 18:03 – 19:15 दीप, आरती, कथा शुभ
राहु काल (वर्ज्य) 10:16 – 11:59 शुभ कार्य में टालें सावधानी
तिथि शुरू 18 Jun 04:34 AM
ब्रह्म मुहूर्त जप / स्नान 03:32–04:20
प्रातः पूजा मुख्य संकल्प 05:08–07:52
अभिजीत शुभ मुहूर्त 11:31 – 12:26
तिथि समाप्त 19 Jun 06:13 AM
सन्ध्या पूजन दीप, आरती 18:03–19:15

समय वाराणसी के सूर्योदय/सूर्यास्त पर आधारित हैं; स्थान अनुसार थोड़ा अंतर संभव है।

पर्व विवरण

वट पूर्णिमा व्रत — महत्व, कथा और परंपरा

वट पूर्णिमा व्रत ज्येष्ठ पूर्णिमा को मनाया जाएगा। इस दिन सुहागिनें लाल वस्त्र पहनकर और सोलह-श्रृंगार करके बरगद की जड़ में जल, रोली-चावल व फल चढ़ाती हैं, सात या ग्यारह परिक्रमाएँ करते हुए मौली लपेटती हैं और सावित्री-सत्यवान की कथा सुनती-सुनाती हैं। इसका मूल उद्देश्य है पति की लंबी आयु, दांपत्य-सुख और संतान-कल्याण की प्रार्थना। अधिकांश महिलाएँ दिन-भर निर्जल या फलाहार उपवास रखती हैं और संध्या में ब्राह्मण तथा वृद्ध सुहागिनों को वस्त्र-दक्षिणा देकर व्रत खोलती हैं। बरगद को त्रिदेवों का प्रतीक और प्रचुर ऑक्सीजन देने वाला पर्यावरण-रक्षक माना जाता है, इसलिए इस दिन उसका पौधा लगाना भी शुभ समझा जाता है।

 

विश्वसनीयता एवं प्रामाणिकता

वट पूर्णिमा व्रत की तिथि कैसे निर्धारित हुई?

पंचांग-सत्यापित
पंचांग तिथिज्येष्ठ, शुक्ल पूर्णिमा
गणना का आधारतिथि-आधारित (चंद्र-सौर)
गणना पद्धतिदृक् गणित (Meeus)
संदर्भ स्थानउज्जैन
आराध्य देवSavitri Satyawan
माह पद्धतिपूर्णिमांत (उत्तर भारत)
अंतिम संशोधन13 Jul 2026

तिथि का निर्धारण सूर्योदय के समय प्रचलित तिथि से होता है, और सूर्योदय प्रत्येक नगर में भिन्न होता है — इसलिए स्थान बदलने पर तारीख़ में एक दिन का अंतर संभव है। इसी कारण Bhakti Sarovar पर समय एक राष्ट्रीय औसत नहीं, बल्कि आपके चुने हुए नगर के वास्तविक सूर्योदय के अनुसार गणना किए जाते हैं। पूरी गणना पद्धति पढ़ें →

इस पृष्ठ के योगदानकर्ता
प्रमूल लेखनप्रियंका शर्मा शास्त्रीय सत्यापनचन्द्रभूषण मणि त्रिपाठी दीसंपादकीय समीक्षादीपक शर्मा

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सामान्य प्रश्न

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

2027 में वट पूर्णिमा व्रत 18 जून 2027 (शुक्रवार) को है।
वट पूर्णिमा व्रत ज्येष्ठ, शुक्ल पूर्णिमा तिथि को मनाया जाने वाला पर्व है।
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अस्वीकरण

इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह केवल सामान्य सूचना हेतु हैं। भक्ति सरोवर इनका समर्थन नहीं करता। जानकारी विभिन्न पंचांग, प्रवचनों, मान्यताओं और धर्मग्रंथों से संग्रहित है। कृपया अपने विवेक का उपयोग करें।