फाल्गुन मास की पूर्णिमा तिथि को वसंत पूर्णिमा मनाई जाती है और इसी दिन होलिका दहन भी किया जाता है, इसलिए यह तिथि अत्यंत विशेष मानी जाती है। बसंत ऋतु के मध्य में आने वाली यह पूर्णिमा प्रकृति में नवजीवन और उल्लास का संदेश देती है। वसंत पूर्णिमा के दिन संध्या समय होलिका का पूजन किया जाता है। पूजन के लिए एक थाली में रोली, कच्चा सूत, चावल, फूल, साबुत हल्दी, बताशे, फल और एक लोटा जल रखा जाता है। इसके बाद भगवान नृसिंह का स्मरण करते हुए होलिका पर रोली, चावल, पुष्प और बताशे अर्पित किए जाते हैं। इस दिन भगवान विष्णु के मंदिरों को विशेष रूप से मालाओं, फूलों और दीपों से सजाया जाता है। श्रद्धा और भक्ति के साथ किया गया यह पूजन जीवन में सुख, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है।