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वसन्त पञ्चमी

11 फरवरी 2027 · गुरुवार माघ, शुक्ल पंचमी

माघ माह 2027 में वसन्त पञ्चमी कब है?

संक्षिप्त उत्तर

वसन्त पञ्चमी 2027 कब है?

वसन्त पञ्चमी 2027 गुरुवार, 11 फरवरी 2027 को मनाई जाएगी। वसन्त पञ्चमी की तिथि माघ, शुक्ल पंचमी है। वसन्त पञ्चमी की पूजा का शुभ मुहूर्त 06:36 – 08:50 तक रहेगा।

दिनांक11 फरवरी 2027
तिथिमाघ, शुक्ल पंचमी
पूजा मुहूर्त06:36 – 08:50
पर्व जानकारी

पर्व सारांश

मुख्य तिथिमाघ, शुक्ल पंचमी माघ माह के व्रत-त्यौहार
मुख्य देवताभगवती सरस्वती
वार-देवताभगवान विष्णुगुरुवार
नक्षत्ररेवतीसाध्य
संक्षिप्त परिचय

वसन्त पञ्चमी का महत्व और उत्सव

वसन्त पञ्चमी माघ, शुक्ल पंचमी तिथि को मनाया जाने वाला हिंदू पर्व है। इस दिन भगवती सरस्वती की पूजा की जाती है और सुख-समृद्धि एवं रक्षा की प्रार्थना की जाती है।

पंचांग विवरण

त्योहार का पंचांग और शुभ समय

मुख्य पंचांग विवरण

तिथि (सूर्योदय)शुक्ल पंचमी
नक्षत्ररेवती
योगसाध्य
करणबव
ऋतुशिशिरउत्तरायण
संवत्सरसिद्धार्थि
दिशा शूलदक्षिणदही खाकर

वसन्त पञ्चमी के दिन पूजा, स्नान और दान का शुभ समय

मुहूर्त / योगसमयउपयोगस्थिति
ब्रह्म मुहूर्त 05:00 – 05:48 स्नान, जप, संकल्प शुभ
प्रातः पूजन 06:36 – 08:50 पूजा और संकल्प श्रेष्ठ
अभिजीत मुहूर्त 11:49 – 12:34 सामान्य शुभ कार्य शुभ
विजय मुहूर्त 16:19 – 17:04 कार्य-सिद्धि, संकल्प शुभ
सन्ध्या पूजन 17:01 – 18:13 दीप, आरती, कथा शुभ
राहु काल (वर्ज्य) 13:36 – 15:00 शुभ कार्य में टालें सावधानी
तिथि शुरू 11 Feb 03:04 AM
ब्रह्म मुहूर्त जप / स्नान 05:00–05:48
प्रातः पूजा मुख्य संकल्प 06:36–08:50
अभिजीत शुभ मुहूर्त 11:49 – 12:34
तिथि समाप्त 12 Feb 03:18 AM
सन्ध्या पूजन दीप, आरती 17:01–18:13

समय वाराणसी के सूर्योदय/सूर्यास्त पर आधारित हैं; स्थान अनुसार थोड़ा अंतर संभव है।

पर्व विवरण

वसन्त पञ्चमी — महत्व, कथा और परंपरा

माघ शुक्ल पंचमी का मधुर प्रभात बसंत पंचमी के उल्लास से सराबोर रहता है। सरसों के खेतों की पीत आभा और मन को छूती मन्द बयार घोषणा करती है कि शिशिर का कठोरपन विदा ले रहा है, अब ऋतुराज बसंत का पदार्पण है। इस दिन विद्या और कला की अधिष्ठात्री भगवती सरस्वती का विशेष पूजन होता है—ऋग्वेद में जिनका वर्णन “प्रणो देवी सरस्वती…” के रूप में हुआ है, वे बुद्धि, प्रज्ञा और रचनात्मक ऊर्जा की संरक्षिका हैं। शुभ मुहूर्त पर श्वेत या हल्के पीले वस्त्र धारण कर, वीणा-वंदनी को अक्षत, सफ़ेद पुष्प, मधुर फल व ऋतुफल अर्पित किए जाते हैं। विद्यार्थी पुस्तकें और लेखनी माँ सरस्वती के चरणों में रखकर विद्यारम्भ का संकल्प लेते हैं। जन-विश्वास है कि इस दिन की आराधना से ज्ञान, वाणी-शक्ति और रचनात्मकता त्रिवेणी-संगम की भाँति जीवन में प्रवाहित होती है।

विश्वसनीयता एवं प्रामाणिकता

वसन्त पञ्चमी की तिथि कैसे निर्धारित हुई?

पंचांग-सत्यापित
पंचांग तिथिमाघ, शुक्ल पंचमी
गणना का आधारतिथि-आधारित (चंद्र-सौर)
गणना पद्धतिदृक् गणित (Meeus)
संदर्भ स्थानउज्जैन
आराध्य देवभगवती सरस्वती
अंतिम संशोधन30 Mar 2026

तिथि का निर्धारण सूर्योदय के समय प्रचलित तिथि से होता है, और सूर्योदय प्रत्येक नगर में भिन्न होता है — इसलिए स्थान बदलने पर तारीख़ में एक दिन का अंतर संभव है। इसी कारण Bhakti Sarovar पर समय एक राष्ट्रीय औसत नहीं, बल्कि आपके चुने हुए नगर के वास्तविक सूर्योदय के अनुसार गणना किए जाते हैं। पूरी गणना पद्धति पढ़ें →

इस पृष्ठ के योगदानकर्ता
प्रमूल लेखनप्रियंका शर्मा शास्त्रीय सत्यापनचन्द्रभूषण मणि त्रिपाठी दीसंपादकीय समीक्षादीपक शर्मा

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सामान्य प्रश्न

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

2027 में वसन्त पञ्चमी 11 फरवरी 2027 (गुरुवार) को है।
वसन्त पञ्चमी माघ, शुक्ल पंचमी तिथि को मनाया जाने वाला पर्व है।
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अस्वीकरण

इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह केवल सामान्य सूचना हेतु हैं। भक्ति सरोवर इनका समर्थन नहीं करता। जानकारी विभिन्न पंचांग, प्रवचनों, मान्यताओं और धर्मग्रंथों से संग्रहित है। कृपया अपने विवेक का उपयोग करें।