वैसाख पूर्णिमा को वैसाखी पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है। वैसाख मास को हिंदू परंपरा में स्नान, दान और तप का सर्वोत्तम समय माना गया है, इसलिए इस पूर्णिमा का विशेष धार्मिक महत्व है। इस दिन व्रत रखकर भगवान विष्णु की विधिपूर्वक पूजा की जाती है। मान्यता है कि पवित्र नदी या सरोवर में स्नान, दान, जप, ध्यान और तर्पण करने से पापों का क्षय होता है और मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त होता है। इस शुभ तिथि पर भगवान सत्यनारायण की पूजा कर विष्णु भगवान को चंदन का लेप, सुपारी, फल और पुष्प अर्पित किए जाते हैं। वैसाख पूर्णिमा पर सत्य विनायक व्रत का भी विधान है। पौराणिक कथा के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण ने अपने मित्र सुदामा को यह व्रत करने की सलाह दी थी, जिससे उनकी दरिद्रता दूर हुई और जीवन में समृद्धि आई।