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वैकुण्ठ चतुर्दशी

23 नवंबर 2026 · सोमवार कार्तिक, शुक्ल चतुर्दशी

कार्तिक माह 2026 में वैकुण्ठ चतुर्दशी कब है?

संक्षिप्त उत्तर

वैकुण्ठ चतुर्दशी 2026 कब है?

वैकुण्ठ चतुर्दशी 2026 सोमवार, 23 नवंबर 2026 को मनाई जाएगी। वैकुण्ठ चतुर्दशी की तिथि कार्तिक, शुक्ल चतुर्दशी है। वैकुण्ठ चतुर्दशी की पूजा का शुभ मुहूर्त 06:21 – 08:30 तक रहेगा।

दिनांक23 नवंबर 2026
तिथिकार्तिक, शुक्ल चतुर्दशी
पूजा मुहूर्त06:21 – 08:30
पर्व जानकारी

पर्व सारांश

मुख्य तिथिकार्तिक, शुक्ल चतुर्दशी कार्तिक माह के व्रत-त्योहार
मुख्य देवताभगवान शिव एवं भगवान विष्णु
वार-देवताशिव जीसोमवार
नक्षत्रभरणीवरीयान
संक्षिप्त परिचय

वैकुण्ठ चतुर्दशी का महत्व और उत्सव

वैकुण्ठ चतुर्दशी कार्तिक, शुक्ल चतुर्दशी तिथि को मनाया जाने वाला हिंदू पर्व है। इस दिन भगवान शिव एवं भगवान विष्णु की पूजा की जाती है और सुख-समृद्धि एवं रक्षा की प्रार्थना की जाती है।

पंचांग विवरण

त्योहार का पंचांग और शुभ समय

मुख्य पंचांग विवरण

तिथि (सूर्योदय)शुक्ल चतुर्दशी
नक्षत्रभरणी
योगवरीयान
करणगर
ऋतुहेमन्तदक्षिणायन
संवत्सरसिद्धार्थि
दिशा शूलपूर्वदर्पण देखकर या दूध पीकर

वैकुण्ठ चतुर्दशी के दिन पूजा, स्नान और दान का शुभ समय

मुहूर्त / योगसमयउपयोगस्थिति
ब्रह्म मुहूर्त 04:45 – 05:33 स्नान, जप, संकल्प शुभ
प्रातः पूजन 06:21 – 08:30 पूजा और संकल्प श्रेष्ठ
अभिजीत मुहूर्त 11:22 – 12:06 सामान्य शुभ कार्य शुभ
विजय मुहूर्त 15:41 – 16:24 कार्य-सिद्धि, संकल्प शुभ
सन्ध्या पूजन 16:20 – 17:32 दीप, आरती, कथा शुभ
राहु काल (वर्ज्य) 07:41 – 09:02 शुभ कार्य में टालें सावधानी
तिथि शुरू 23 Nov 02:36 AM
ब्रह्म मुहूर्त जप / स्नान 04:45–05:33
प्रातः पूजा मुख्य संकल्प 06:21–08:30
अभिजीत शुभ मुहूर्त 11:22 – 12:06
तिथि समाप्त 23 Nov 11:42 PM
सन्ध्या पूजन दीप, आरती 16:20–17:32

समय वाराणसी के सूर्योदय/सूर्यास्त पर आधारित हैं; स्थान अनुसार थोड़ा अंतर संभव है।

पर्व विवरण

वैकुण्ठ चतुर्दशी — महत्व, कथा और परंपरा

कार्तिक शुक्ल चतुर्दशी को मनाई जाने वाली वैकुण्ठ चतुर्दशी शिव–विष्णु के सामरस्य का दुर्लभ पर्व है। शास्त्र निर्देश देते हैं कि पूजन मध्य-रात्रि, निशीथ-काल में ही हो; तब भक्त श्री हरि और भोलेनाथ दोनों का आवाहन कर जल, दुग्ध व पंचामृत से अभिषेक करते हैं। परम्परा है कि भगवान शिव को सहस्र कमल पुष्प अर्पित किए जाएँ—कथानुसार इसी दिन विष्णु “पुण्डरीकाक्ष” नाम से विख्यात हुए और महादेव ने उन्हें करोड़ों सूर्यों-सम तेजस्वी सुदर्शन-चक्र प्रदान किया। मान्यता है कि संयुक्त आराधना से पूर्व-जन्मजित पाप क्षय होते हैं, पुण्य-फल प्रबल होता है और साधक के लिए तृप्ति, सामर्थ्य व भक्तियोग के द्वार खुलते हैं। दीपावली-उपरांत की शुभ ऊर्जा में यह रात्रि आत्म-निरसन, दीप-दान और दैवी अनुग्रह का श्रेष्ठ अवसर मानी जाती है।

विश्वसनीयता एवं प्रामाणिकता

वैकुण्ठ चतुर्दशी की तिथि कैसे निर्धारित हुई?

पंचांग-सत्यापित
पंचांग तिथिकार्तिक, शुक्ल चतुर्दशी
गणना का आधारतिथि-आधारित (चंद्र-सौर)
गणना पद्धतिदृक् गणित (Meeus)
संदर्भ स्थानउज्जैन
आराध्य देवभगवान शिव एवं भगवान विष्णु
अंतिम संशोधन20 Apr 2026

तिथि का निर्धारण सूर्योदय के समय प्रचलित तिथि से होता है, और सूर्योदय प्रत्येक नगर में भिन्न होता है — इसलिए स्थान बदलने पर तारीख़ में एक दिन का अंतर संभव है। इसी कारण Bhakti Sarovar पर समय एक राष्ट्रीय औसत नहीं, बल्कि आपके चुने हुए नगर के वास्तविक सूर्योदय के अनुसार गणना किए जाते हैं। पूरी गणना पद्धति पढ़ें →

इस पृष्ठ के योगदानकर्ता
प्रमूल लेखनप्रियंका शर्मा शास्त्रीय सत्यापनचन्द्रभूषण मणि त्रिपाठी दीसंपादकीय समीक्षादीपक शर्मा

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सामान्य प्रश्न

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

2026 में वैकुण्ठ चतुर्दशी 23 नवंबर 2026 (सोमवार) को है।
वैकुण्ठ चतुर्दशी कार्तिक, शुक्ल चतुर्दशी तिथि को मनाया जाने वाला पर्व है।
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अस्वीकरण

इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह केवल सामान्य सूचना हेतु हैं। भक्ति सरोवर इनका समर्थन नहीं करता। जानकारी विभिन्न पंचांग, प्रवचनों, मान्यताओं और धर्मग्रंथों से संग्रहित है। कृपया अपने विवेक का उपयोग करें।