हिन्दू व्रत एवं त्यौहार - BhaktiSarovar.in

उपांग ललिता व्रत

15 अक्टूबर 2026 · गुरुवार आश्विन, शुक्ल पंचमी

आश्विन माह 2026 में उपांग ललिता व्रत कब है?

संक्षिप्त उत्तर

उपांग ललिता व्रत 2026 कब है?

उपांग ललिता व्रत 2026 गुरुवार, 15 अक्टूबर 2026 को मनाई जाएगी। उपांग ललिता व्रत की तिथि आश्विन, शुक्ल पंचमी है। उपांग ललिता व्रत की पूजा का शुभ मुहूर्त 05:57 – 08:15 तक रहेगा।

दिनांक15 अक्टूबर 2026
तिथिआश्विन, शुक्ल पंचमी
पूजा मुहूर्त05:57 – 08:15
पर्व जानकारी

पर्व सारांश

मुख्य तिथिआश्विन, शुक्ल पंचमीआश्विन माह के व्रत-त्यौहार
मुख्य देवतादेवी त्रिपुरसुन्दरी
वार-देवताभगवान विष्णुगुरुवार
नक्षत्रज्येष्ठासौभाग्य
संक्षिप्त परिचय

उपांग ललिता व्रत का महत्व और उत्सव

उपांग ललिता व्रत आश्विन, शुक्ल पंचमी तिथि को मनाया जाने वाला हिंदू पर्व है। इस दिन देवी त्रिपुरसुन्दरी की पूजा की जाती है और सुख-समृद्धि एवं रक्षा की प्रार्थना की जाती है।

पंचांग विवरण

त्योहार का पंचांग और शुभ समय

मुख्य पंचांग विवरण

तिथि (सूर्योदय)शुक्ल पंचमी
नक्षत्रज्येष्ठा
योगसौभाग्य
करणबव
ऋतुशरददक्षिणायन
संवत्सरसिद्धार्थि
दिशा शूलदक्षिणदही खाकर

उपांग ललिता व्रत के दिन पूजा, स्नान और दान का शुभ समय

मुहूर्त / योगसमयउपयोगस्थिति
ब्रह्म मुहूर्त 04:21 – 05:09 स्नान, जप, संकल्प शुभ
प्रातः पूजन 05:57 – 08:15 पूजा और संकल्प श्रेष्ठ
अभिजीत मुहूर्त 11:20 – 12:07 सामान्य शुभ कार्य शुभ
विजय मुहूर्त 15:58 – 16:44 कार्य-सिद्धि, संकल्प शुभ
सन्ध्या पूजन 16:43 – 17:55 दीप, आरती, कथा शुभ
राहु काल (वर्ज्य) 13:10 – 14:37 शुभ कार्य में टालें सावधानी
तिथि शुरू 15 Oct 01:13 AM
ब्रह्म मुहूर्त जप / स्नान 04:21–05:09
प्रातः पूजा मुख्य संकल्प 05:57–08:15
अभिजीत शुभ मुहूर्त 11:20 – 12:07
तिथि समाप्त 16 Oct 03:25 AM
सन्ध्या पूजन दीप, आरती 16:43–17:55

समय वाराणसी के सूर्योदय/सूर्यास्त पर आधारित हैं; स्थान अनुसार थोड़ा अंतर संभव है।

पर्व विवरण

उपांग ललिता व्रत — महत्व, कथा और परंपरा

आश्विन शुक्लपंचमी, शारदीय नवरात्रि के मध्य दिन, को मनाया जाने वाला उपांग ललिता व्रत देवी त्रिपुरसुन्दरी की आराधना का विशेष पर्व है। कथा कहती है कि सती के आत्मत्याग के पश्चात जब शिव शोकविह्वल होकर उनके अंग लिए भ्रमण करने लगे, तब विष्णु ने सुदर्शन चक्र से देह विभाजित कर जगत को संकट से उबारा। उसी क्षण शक्ति का तेज ललिता नाम से प्रकट हुआ, जिसने शिव को अपने हृदय में धारण किया। कालिकापुराण बताता है कि गौरवर्ण, दो भुजाओं वाली यह देवी रक्तकमल पर आरूढ़ है और चण्डीसदृश पूजा स्वीकार करती है। व्रती प्रातः स्नान कर लाल पुष्प, सिंदूर, अक्षत, घृतदीप और नैवेद्य अर्पित करते हैं तथा “ॐ ऐं ह्रीं श्रीं ललितायै नमः” मंत्र जपते हैं। श्रद्धापूर्वक किया गया उपांग ललिता व्रत साधक को सौंदर्य, समृद्धि और विजय का आशीष प्रदान करता है।

 

विश्वसनीयता एवं प्रामाणिकता

उपांग ललिता व्रत की तिथि कैसे निर्धारित हुई?

पंचांग-सत्यापित
पंचांग तिथिआश्विन, शुक्ल पंचमी
गणना का आधारतिथि-आधारित (चंद्र-सौर)
गणना पद्धतिदृक् गणित (Meeus)
संदर्भ स्थानउज्जैन
आराध्य देवदेवी त्रिपुरसुन्दरी
अंतिम संशोधन21 Apr 2026

तिथि का निर्धारण सूर्योदय के समय प्रचलित तिथि से होता है, और सूर्योदय प्रत्येक नगर में भिन्न होता है — इसलिए स्थान बदलने पर तारीख़ में एक दिन का अंतर संभव है। इसी कारण Bhakti Sarovar पर समय एक राष्ट्रीय औसत नहीं, बल्कि आपके चुने हुए नगर के वास्तविक सूर्योदय के अनुसार गणना किए जाते हैं। पूरी गणना पद्धति पढ़ें →

इस पृष्ठ के योगदानकर्ता
प्रमूल लेखनप्रियंका शर्मा शास्त्रीय सत्यापनचन्द्रभूषण मणि त्रिपाठी दीसंपादकीय समीक्षादीपक शर्मा

गूगल पर भक्ति सरोवर को अपना पसंदीदा स्रोत बनाएं

जब आप गूगल पर "उपांग ललिता व्रत" या कोई भी व्रत-त्योहार खोजते हैं, तो गूगल आपको आपके पसंदीदा स्रोत से उत्तर दिखा सकता है। भक्ति सरोवर को अपना पसंदीदा स्रोत बनाने के लिए:

1
गूगल पर खोजेंकोई भी व्रत या त्योहार खोजें
2
भक्ति सरोवर चुनेंपरिणामों में हमारा लिंक ढूँढें और ⋮ (three-dot) मेनू दबाएं
3
"More from this site" चुनेंगूगल आपको भविष्य में भक्ति सरोवर के परिणाम प्राथमिकता से दिखाएगा
पसंदीदा स्रोत बनाएं →
सामान्य प्रश्न

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

2026 में उपांग ललिता व्रत 15 अक्टूबर 2026 (गुरुवार) को है।
उपांग ललिता व्रत आश्विन, शुक्ल पंचमी तिथि को मनाया जाने वाला पर्व है।
!

अस्वीकरण

इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह केवल सामान्य सूचना हेतु हैं। भक्ति सरोवर इनका समर्थन नहीं करता। जानकारी विभिन्न पंचांग, प्रवचनों, मान्यताओं और धर्मग्रंथों से संग्रहित है। कृपया अपने विवेक का उपयोग करें।