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त्रिपुर भैरवी प्राकट्योत्सव

23 दिसंबर 2026 · बुधवार मार्गशीर्ष, शुक्ल पूर्णिमा

मार्गशीर्ष माह 2026 में त्रिपुर भैरवी प्राकट्योत्सव कब है?

संक्षिप्त उत्तर

त्रिपुर भैरवी प्राकट्योत्सव 2026 कब है?

त्रिपुर भैरवी प्राकट्योत्सव 2026 बुधवार, 23 दिसंबर 2026 को मनाई जाएगी। त्रिपुर भैरवी प्राकट्योत्सव की तिथि मार्गशीर्ष, शुक्ल पूर्णिमा है। त्रिपुर भैरवी प्राकट्योत्सव की पूजा का शुभ मुहूर्त 06:40 – 08:46 तक रहेगा।

दिनांक23 दिसंबर 2026
तिथिमार्गशीर्ष, शुक्ल पूर्णिमा
पूजा मुहूर्त06:40 – 08:46
पर्व जानकारी

पर्व सारांश

मुख्य तिथिमार्गशीर्ष, शुक्ल पूर्णिमा मार्गशीर्ष - अगहन माह के व्रत-त्यौहार
मुख्य देवतात्रिपुर भैरवी
वार-देवताभगवान गणेशबुधवार
नक्षत्ररोहिणीशुभ
संक्षिप्त परिचय

त्रिपुर भैरवी प्राकट्योत्सव का महत्व और उत्सव

त्रिपुर भैरवी प्राकट्योत्सव मार्गशीर्ष, शुक्ल पूर्णिमा तिथि को मनाया जाने वाला हिंदू पर्व है। इस दिन त्रिपुर भैरवी की पूजा की जाती है और सुख-समृद्धि एवं रक्षा की प्रार्थना की जाती है।

पंचांग विवरण

त्योहार का पंचांग और शुभ समय

मुख्य पंचांग विवरण

तिथि (सूर्योदय)शुक्ल चतुर्दशी
नक्षत्ररोहिणी
योगशुभ
करणवणिज
ऋतुशिशिरउत्तरायण
संवत्सरसिद्धार्थि
दिशा शूलउत्तरधनिया या तिल खाकर

त्रिपुर भैरवी प्राकट्योत्सव के दिन पूजा, स्नान और दान का शुभ समय

मुहूर्त / योगसमयउपयोगस्थिति
ब्रह्म मुहूर्त 05:04 – 05:52 स्नान, जप, संकल्प शुभ
प्रातः पूजन 06:40 – 08:46 पूजा और संकल्प श्रेष्ठ
अभिजीत मुहूर्त 11:36 – 12:18 सामान्य शुभ कार्य शुभ
विजय मुहूर्त 15:49 – 16:31 कार्य-सिद्धि, संकल्प शुभ
सन्ध्या पूजन 16:26 – 17:38 दीप, आरती, कथा शुभ
राहु काल (वर्ज्य) 11:57 – 13:16 शुभ कार्य में टालें सावधानी
तिथि शुरू 23 Dec 10:47 AM
ब्रह्म मुहूर्त जप / स्नान 05:04–05:52
प्रातः पूजा मुख्य संकल्प 06:40–08:46
अभिजीत शुभ मुहूर्त 11:36 – 12:18
तिथि समाप्त 24 Dec 06:57 AM
सन्ध्या पूजन दीप, आरती 16:26–17:38

समय वाराणसी के सूर्योदय/सूर्यास्त पर आधारित हैं; स्थान अनुसार थोड़ा अंतर संभव है।

पर्व विवरण

त्रिपुर भैरवी प्राकट्योत्सव — महत्व, कथा और परंपरा

मार्गशीर्ष शुक्ल पूर्णिमा पर मनाया जाने वाला त्रिपुर भैरवी प्राकट्य उत्सव भगवान शिव के त्रिपुरारी रूप की विध्वंसकारी शक्ति का स्मरण कराता है। दस महाविद्याओं में छठी मानी जाने वाली यह देवी श्यामवर्ण, दिगंबर तथा त्रिनेत्रधारी हैं; उनके मस्तक पर अर्धचंद्र सुशोभित है, गले में नरमुंडों की माला है, और शरीर रुद्राक्ष-सर्पों से भूषित रहता है। उनकी तेजस्वी आभा सहस्र उदित सूर्यों जैसी वर्णित की गई है, जो सृष्टि के विनाश एवं पुनरुत्पत्ति की निरंतरता का बोध कराती है। इस दिन भक्त प्रातः स्नान कर यथाविधि कलश-स्थापन, दीपाराधना, हवन और “ॐ त्रिपुरभैरव्यै नमः” मंत्र-जप करते हैं। मान्यता है कि देवी के प्रसन्न होने पर साधक के सभी कष्ट विलीन हो जाते हैं तथा इच्छित सिद्धियाँ सहज उपलब्ध हो जाती हैं।

विश्वसनीयता एवं प्रामाणिकता

त्रिपुर भैरवी प्राकट्योत्सव की तिथि कैसे निर्धारित हुई?

पंचांग-सत्यापित
पंचांग तिथिमार्गशीर्ष, शुक्ल पूर्णिमा
गणना का आधारतिथि-आधारित (चंद्र-सौर)
गणना पद्धतिदृक् गणित (Meeus)
संदर्भ स्थानउज्जैन
आराध्य देवत्रिपुर भैरवी
अंतिम संशोधन19 Apr 2026

तिथि का निर्धारण सूर्योदय के समय प्रचलित तिथि से होता है, और सूर्योदय प्रत्येक नगर में भिन्न होता है — इसलिए स्थान बदलने पर तारीख़ में एक दिन का अंतर संभव है। इसी कारण Bhakti Sarovar पर समय एक राष्ट्रीय औसत नहीं, बल्कि आपके चुने हुए नगर के वास्तविक सूर्योदय के अनुसार गणना किए जाते हैं। पूरी गणना पद्धति पढ़ें →

इस पृष्ठ के योगदानकर्ता
प्रमूल लेखनप्रियंका शर्मा शास्त्रीय सत्यापनचन्द्रभूषण मणि त्रिपाठी दीसंपादकीय समीक्षादीपक शर्मा

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सामान्य प्रश्न

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

2026 में त्रिपुर भैरवी प्राकट्योत्सव 23 दिसंबर 2026 (बुधवार) को है।
त्रिपुर भैरवी प्राकट्योत्सव मार्गशीर्ष, शुक्ल पूर्णिमा तिथि को मनाया जाने वाला पर्व है।
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अस्वीकरण

इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह केवल सामान्य सूचना हेतु हैं। भक्ति सरोवर इनका समर्थन नहीं करता। जानकारी विभिन्न पंचांग, प्रवचनों, मान्यताओं और धर्मग्रंथों से संग्रहित है। कृपया अपने विवेक का उपयोग करें।