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सुब्रहमन्य षष्ठी, चम्पा षष्ठी, स्कन्द षष्ठी

15 दिसंबर 2026 · मंगलवार मार्गशीर्ष, शुक्ल षष्ठी

मार्गशीर्ष माह 2026 में सुब्रहमन्य षष्ठी, चम्पा षष्ठी, स्कन्द षष्ठी कब है?

संक्षिप्त उत्तर

सुब्रहमन्य षष्ठी, चम्पा षष्ठी, स्कन्द षष्ठी 2026 कब है?

सुब्रहमन्य षष्ठी, चम्पा षष्ठी, स्कन्द षष्ठी 2026 मंगलवार, 15 दिसंबर 2026 को मनाई जाएगी। सुब्रहमन्य षष्ठी, चम्पा षष्ठी, स्कन्द षष्ठी की तिथि मार्गशीर्ष, शुक्ल षष्ठी है। सुब्रहमन्य षष्ठी, चम्पा षष्ठी, स्कन्द षष्ठी की पूजा का शुभ मुहूर्त 06:36 – 08:42 तक रहेगा।

दिनांक15 दिसंबर 2026
तिथिमार्गशीर्ष, शुक्ल षष्ठी
पूजा मुहूर्त06:36 – 08:42
पर्व जानकारी

पर्व सारांश

मुख्य तिथिमार्गशीर्ष, शुक्ल षष्ठीमार्गशीर्ष - अगहन माह के व्रत-त्यौहार
मुख्य देवताभगवान कार्तिकेय
वार-देवताहनुमान जीमंगलवार
नक्षत्रधनिष्ठाहर्षण
संक्षिप्त परिचय

सुब्रहमन्य षष्ठी, चम्पा षष्ठी, स्कन्द षष्ठी का महत्व और उत्सव

सुब्रहमन्य षष्ठी, चम्पा षष्ठी, स्कन्द षष्ठी मार्गशीर्ष, शुक्ल षष्ठी तिथि को मनाया जाने वाला हिंदू पर्व है। इस दिन भगवान कार्तिकेय की पूजा की जाती है और सुख-समृद्धि एवं रक्षा की प्रार्थना की जाती है।

पंचांग विवरण

त्योहार का पंचांग और शुभ समय

मुख्य पंचांग विवरण

तिथि (सूर्योदय)शुक्ल षष्ठी
नक्षत्रधनिष्ठा
योगहर्षण
करणकौलव
ऋतुहेमन्तदक्षिणायन
संवत्सरसिद्धार्थि
दिशा शूलउत्तरगुड़ खाकर

सुब्रहमन्य षष्ठी, चम्पा षष्ठी, स्कन्द षष्ठी के दिन पूजा, स्नान और दान का शुभ समय

मुहूर्त / योगसमयउपयोगस्थिति
ब्रह्म मुहूर्त 05:00 – 05:48 स्नान, जप, संकल्प शुभ
प्रातः पूजन 06:36 – 08:42 पूजा और संकल्प श्रेष्ठ
अभिजीत मुहूर्त 11:32 – 12:14 सामान्य शुभ कार्य शुभ
विजय मुहूर्त 15:45 – 16:27 कार्य-सिद्धि, संकल्प शुभ
सन्ध्या पूजन 16:22 – 17:34 दीप, आरती, कथा शुभ
राहु काल (वर्ज्य) 14:31 – 15:51 शुभ कार्य में टालें सावधानी
तिथि शुरू 14 Dec 07:15 PM
ब्रह्म मुहूर्त जप / स्नान 05:00–05:48
प्रातः पूजा मुख्य संकल्प 06:36–08:42
अभिजीत शुभ मुहूर्त 11:32 – 12:14
तिथि समाप्त 15 Dec 09:19 PM
सन्ध्या पूजन दीप, आरती 16:22–17:34

समय वाराणसी के सूर्योदय/सूर्यास्त पर आधारित हैं; स्थान अनुसार थोड़ा अंतर संभव है।

पर्व विवरण

सुब्रहमन्य षष्ठी, चम्पा षष्ठी, स्कन्द षष्ठी — महत्व, कथा और परंपरा

मार्गशीर्ष की शुक्ल षष्ठी को सुब्रह्मण्य, चम्पा या स्कन्द षष्ठी कहा जाता है। ठंडी भोर और पकती फसल की सोंधी सुगंध के बीच यह तिथि सेनापति कार्तिकेय के तेज का उत्सव है। श्रद्धालु प्रातः स्नान कर पीले पुष्प, दीप, मिठाई, खिलौना-रथ और स्वर्णाभूषण अर्पित करते हुए “ॐ स्कन्दाय नमः” मंत्र का 108 जप करते हैं। पुराणों में वर्णित है कि इसी दिन कुमार ने तारकासुर का संहार किया था; अतः यह पूजन रोग, भय और दरिद्रता को दूर कर साहस, ऊर्जा और विजय का वरदान देता है। मार्गशीर्ष की पावन ऋतु में मनाया जाने वाला यह व्रत साधक को नई चेतना और लक्ष्य-सिद्धि का संकल्प प्रदान करता है।

विश्वसनीयता एवं प्रामाणिकता

सुब्रहमन्य षष्ठी, चम्पा षष्ठी, स्कन्द षष्ठी की तिथि कैसे निर्धारित हुई?

पंचांग-सत्यापित
पंचांग तिथिमार्गशीर्ष, शुक्ल षष्ठी
गणना का आधारतिथि-आधारित (चंद्र-सौर)
गणना पद्धतिदृक् गणित (Meeus)
संदर्भ स्थानउज्जैन
आराध्य देवभगवान कार्तिकेय
अंतिम संशोधन19 Apr 2026

तिथि का निर्धारण सूर्योदय के समय प्रचलित तिथि से होता है, और सूर्योदय प्रत्येक नगर में भिन्न होता है — इसलिए स्थान बदलने पर तारीख़ में एक दिन का अंतर संभव है। इसी कारण Bhakti Sarovar पर समय एक राष्ट्रीय औसत नहीं, बल्कि आपके चुने हुए नगर के वास्तविक सूर्योदय के अनुसार गणना किए जाते हैं। पूरी गणना पद्धति पढ़ें →

इस पृष्ठ के योगदानकर्ता
प्रमूल लेखनप्रियंका शर्मा शास्त्रीय सत्यापनचन्द्रभूषण मणि त्रिपाठी दीसंपादकीय समीक्षादीपक शर्मा

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सामान्य प्रश्न

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

2026 में सुब्रहमन्य षष्ठी, चम्पा षष्ठी, स्कन्द षष्ठी 15 दिसंबर 2026 (मंगलवार) को है।
सुब्रहमन्य षष्ठी, चम्पा षष्ठी, स्कन्द षष्ठी मार्गशीर्ष, शुक्ल षष्ठी तिथि को मनाया जाने वाला पर्व है।
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अस्वीकरण

इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह केवल सामान्य सूचना हेतु हैं। भक्ति सरोवर इनका समर्थन नहीं करता। जानकारी विभिन्न पंचांग, प्रवचनों, मान्यताओं और धर्मग्रंथों से संग्रहित है। कृपया अपने विवेक का उपयोग करें।