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श्री वराह प्राकट्योत्सव

13 सितंबर 2026 · रविवार भाद्रपद, शुक्ल तृतीया

भाद्रपद माह 2026 में श्री वराह प्राकट्योत्सव कब है?

संक्षिप्त उत्तर

श्री वराह प्राकट्योत्सव 2026 कब है?

श्री वराह प्राकट्योत्सव 2026 रविवार, 13 सितंबर 2026 को मनाई जाएगी। श्री वराह प्राकट्योत्सव की तिथि भाद्रपद, शुक्ल तृतीया है। श्री वराह प्राकट्योत्सव की पूजा का शुभ मुहूर्त 05:43 – 08:11 तक रहेगा।

दिनांक13 सितंबर 2026
तिथिभाद्रपद, शुक्ल तृतीया
पूजा मुहूर्त05:43 – 08:11
पर्व जानकारी

पर्व सारांश

मुख्य तिथिभाद्रपद, शुक्ल तृतीया भाद्रपद माह के व्रत-त्यौहार
मुख्य देवताभगवान विष्णु
वार-देवतासूर्य देवरविवार
नक्षत्रहस्तशुक्ल
संक्षिप्त परिचय

श्री वराह प्राकट्योत्सव का महत्व और उत्सव

श्री वराह प्राकट्योत्सव भाद्रपद, शुक्ल तृतीया तिथि को मनाया जाने वाला हिंदू पर्व है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा की जाती है और सुख-समृद्धि एवं रक्षा की प्रार्थना की जाती है।

पंचांग विवरण

त्योहार का पंचांग और शुभ समय

मुख्य पंचांग विवरण

तिथि (सूर्योदय)शुक्ल द्वितीया
नक्षत्रहस्त
योगशुक्ल
करणकौलव
ऋतुशरददक्षिणायन
संवत्सरसिद्धार्थि
दिशा शूलपश्चिमघी या दलिया खाकर

श्री वराह प्राकट्योत्सव के दिन पूजा, स्नान और दान का शुभ समय

मुहूर्त / योगसमयउपयोगस्थिति
ब्रह्म मुहूर्त 04:07 – 04:55 स्नान, जप, संकल्प शुभ
प्रातः पूजन 05:43 – 08:11 पूजा और संकल्प श्रेष्ठ
अभिजीत मुहूर्त 11:29 – 12:18 सामान्य शुभ कार्य शुभ
विजय मुहूर्त 16:26 – 17:15 कार्य-सिद्धि, संकल्प शुभ
सन्ध्या पूजन 17:17 – 18:29 दीप, आरती, कथा शुभ
राहु काल (वर्ज्य) 16:32 – 18:04 शुभ कार्य में टालें सावधानी
तिथि शुरू 13 Sep 07:08 AM
ब्रह्म मुहूर्त जप / स्नान 04:07–04:55
प्रातः पूजा मुख्य संकल्प 05:43–08:11
अभिजीत शुभ मुहूर्त 11:29 – 12:18
तिथि समाप्त 14 Sep 07:06 AM
सन्ध्या पूजन दीप, आरती 17:17–18:29

समय वाराणसी के सूर्योदय/सूर्यास्त पर आधारित हैं; स्थान अनुसार थोड़ा अंतर संभव है।

पर्व विवरण

श्री वराह प्राकट्योत्सव — महत्व, कथा और परंपरा

भाद्रपद शुक्ल तृतीया को मनाया जाने वाला श्री वराह प्राकट्योत्सव विष्णु के तृतीय अवतार की स्मृति है। वर्षा की थमती रिमझिम, हरे-भरे खेत और शरद के प्रथम संकेतों के बीच यह पर्व धरती के उद्धारक वराह भगवान की जय-ध्वनि करता है। पुराण बताते हैं कि श्रीहरि ने इसी तिथि पर वराह रूप धारण कर हिरण्याक्ष दैत्य का वध किया और डूबी हुई पृथ्वी को अपनी प्रतापी शूकराकृति पर उठा लिया। देश-भर में यह उत्सव उल्लास से मनाया जाता है; मथुरा के प्राचीन वराह मंदिर में पंचामृत-अभिषेक, वेदघोष और कीर्तन दिन-भर गूँजते हैं, जबकि तिरुमला के भू-वराह स्वामी मंदिर में विशाल विशेष पूजन होता है। भक्त तिल, घृत और लाल पुष्प अर्पित कर “ॐ श्री वराहाय नमः” मंत्र जपते हैं, जिससे संकटों का नाश और परिवार में स्थायित्व व समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है।

विश्वसनीयता एवं प्रामाणिकता

श्री वराह प्राकट्योत्सव की तिथि कैसे निर्धारित हुई?

पंचांग-सत्यापित
पंचांग तिथिभाद्रपद, शुक्ल तृतीया
गणना का आधारतिथि-आधारित (चंद्र-सौर)
गणना पद्धतिदृक् गणित (Meeus)
संदर्भ स्थानउज्जैन
आराध्य देवभगवान विष्णु
अंतिम संशोधन23 Apr 2026

तिथि का निर्धारण सूर्योदय के समय प्रचलित तिथि से होता है, और सूर्योदय प्रत्येक नगर में भिन्न होता है — इसलिए स्थान बदलने पर तारीख़ में एक दिन का अंतर संभव है। इसी कारण Bhakti Sarovar पर समय एक राष्ट्रीय औसत नहीं, बल्कि आपके चुने हुए नगर के वास्तविक सूर्योदय के अनुसार गणना किए जाते हैं। पूरी गणना पद्धति पढ़ें →

इस पृष्ठ के योगदानकर्ता
प्रमूल लेखनप्रियंका शर्मा शास्त्रीय सत्यापनचन्द्रभूषण मणि त्रिपाठी दीसंपादकीय समीक्षादीपक शर्मा

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सामान्य प्रश्न

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

2026 में श्री वराह प्राकट्योत्सव 13 सितंबर 2026 (रविवार) को है।
श्री वराह प्राकट्योत्सव भाद्रपद, शुक्ल तृतीया तिथि को मनाया जाने वाला पर्व है।
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अस्वीकरण

इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह केवल सामान्य सूचना हेतु हैं। भक्ति सरोवर इनका समर्थन नहीं करता। जानकारी विभिन्न पंचांग, प्रवचनों, मान्यताओं और धर्मग्रंथों से संग्रहित है। कृपया अपने विवेक का उपयोग करें।