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श्री वल्लभाचार्य जयंती

2 मई 2027 · रविवार वैसाख, कृष्ण एकादशी

वैसाख माह 2027 में श्री वल्लभाचार्य जयंती कब है?

संक्षिप्त उत्तर

श्री वल्लभाचार्य जयंती 2027 कब है?

श्री वल्लभाचार्य जयंती 2027 रविवार, 2 मई 2027 को मनाई जाएगी। श्री वल्लभाचार्य जयंती की तिथि वैसाख, कृष्ण एकादशी है। श्री वल्लभाचार्य जयंती की पूजा का शुभ मुहूर्त 05:21 – 07:58 तक रहेगा।

दिनांक2 मई 2027
तिथिवैसाख, कृष्ण एकादशी
पूजा मुहूर्त05:21 – 07:58
पर्व जानकारी

पर्व सारांश

मुख्य तिथिवैसाख, कृष्ण एकादशीवैसाख माह के व्रत-त्यौहार
मुख्य देवताजगद्गुरु श्री वल्लभाचार्य जी
वार-देवतासूर्य देवरविवार
नक्षत्रपूर्व भाद्रपदइन्द्र
संक्षिप्त परिचय

श्री वल्लभाचार्य जयंती का महत्व और उत्सव

श्री वल्लभाचार्य जयंती वैसाख, कृष्ण एकादशी तिथि को मनाया जाने वाला हिंदू पर्व है। इस दिन जगद्गुरु श्री वल्लभाचार्य जी की पूजा की जाती है और सुख-समृद्धि एवं रक्षा की प्रार्थना की जाती है।

पंचांग विवरण

त्योहार का पंचांग और शुभ समय

मुख्य पंचांग विवरण

तिथि (सूर्योदय)कृष्ण एकादशी
नक्षत्रपूर्व भाद्रपद
योगइन्द्र
करणबव
ऋतुग्रीष्मउत्तरायण
संवत्सररौद्र
दिशा शूलपश्चिमघी या दलिया खाकर

श्री वल्लभाचार्य जयंती के दिन पूजा, स्नान और दान का शुभ समय

मुहूर्त / योगसमयउपयोगस्थिति
ब्रह्म मुहूर्त 03:45 – 04:33 स्नान, जप, संकल्प शुभ
प्रातः पूजन 05:21 – 07:58 पूजा और संकल्प श्रेष्ठ
अभिजीत मुहूर्त 11:28 – 12:21 सामान्य शुभ कार्य शुभ
विजय मुहूर्त 16:43 – 17:36 कार्य-सिद्धि, संकल्प शुभ
सन्ध्या पूजन 17:41 – 18:53 दीप, आरती, कथा शुभ
राहु काल (वर्ज्य) 16:50 – 18:28 शुभ कार्य में टालें सावधानी
तिथि शुरू 02 May 06:00 AM
ब्रह्म मुहूर्त जप / स्नान 03:45–04:33
प्रातः पूजा मुख्य संकल्प 05:21–07:58
अभिजीत शुभ मुहूर्त 11:28 – 12:21
तिथि समाप्त 03 May 06:00 AM
सन्ध्या पूजन दीप, आरती 17:41–18:53

समय वाराणसी के सूर्योदय/सूर्यास्त पर आधारित हैं; स्थान अनुसार थोड़ा अंतर संभव है।

पर्व विवरण

श्री वल्लभाचार्य जयंती — महत्व, कथा और परंपरा

श्री वल्लभाचार्य जयंती वैसाख मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को श्रद्धा के साथ मनाई जाती है। जगद्गुरु श्री वल्लभाचार्य जी का जन्म सन् 1479 में छत्तीसगढ़ के चंपारण्य में हुआ था। वैसाख का महीना साधना, चिंतन और वैष्णव भक्ति से जुड़ा माना जाता है, और इसी पावन समय में वल्लभाचार्य जी के जीवन और दर्शन का स्मरण विशेष महत्व रखता है। श्री वल्लभाचार्य जी भगवान श्रीकृष्ण के परम भक्त और पुष्टिमार्ग के प्रवर्तक थे। उनका दर्शन वेदांत पर आधारित था, जिसमें ब्रह्म, जगत और जीव, तीनों की सार्थकता को स्वीकार किया गया है। वे श्रीकृष्ण को अनंत दिव्य गुणों से युक्त परब्रह्म मानते थे और उनकी लीलाओं को ही परम आनंद का स्रोत बताते थे। उनकी रचनाएँ लोककल्याण और सदाचार के संवर्धन की भावना से प्रेरित हैं। उनके योगदान के सम्मान में भारत सरकार ने वर्ष 1977 में उनके नाम का डाक टिकट भी जारी किया था।

विश्वसनीयता एवं प्रामाणिकता

श्री वल्लभाचार्य जयंती की तिथि कैसे निर्धारित हुई?

पंचांग-सत्यापित
पंचांग तिथिवैसाख, कृष्ण एकादशी
गणना का आधारतिथि-आधारित (चंद्र-सौर)
गणना पद्धतिदृक् गणित (Meeus)
संदर्भ स्थानउज्जैन
आराध्य देवजगद्गुरु श्री वल्लभाचार्य जी
अंतिम संशोधन06 Jul 2026

तिथि का निर्धारण सूर्योदय के समय प्रचलित तिथि से होता है, और सूर्योदय प्रत्येक नगर में भिन्न होता है — इसलिए स्थान बदलने पर तारीख़ में एक दिन का अंतर संभव है। इसी कारण Bhakti Sarovar पर समय एक राष्ट्रीय औसत नहीं, बल्कि आपके चुने हुए नगर के वास्तविक सूर्योदय के अनुसार गणना किए जाते हैं। पूरी गणना पद्धति पढ़ें →

इस पृष्ठ के योगदानकर्ता
प्रमूल लेखनप्रियंका शर्मा शास्त्रीय सत्यापनचन्द्रभूषण मणि त्रिपाठी दीसंपादकीय समीक्षादीपक शर्मा

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सामान्य प्रश्न

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

2027 में श्री वल्लभाचार्य जयंती 2 मई 2027 (रविवार) को है।
श्री वल्लभाचार्य जयंती वैसाख, कृष्ण एकादशी तिथि को मनाया जाने वाला पर्व है।
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अस्वीकरण

इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह केवल सामान्य सूचना हेतु हैं। भक्ति सरोवर इनका समर्थन नहीं करता। जानकारी विभिन्न पंचांग, प्रवचनों, मान्यताओं और धर्मग्रंथों से संग्रहित है। कृपया अपने विवेक का उपयोग करें।