श्री कालभैरव कालाष्टमी वैसाख — महत्व, कथा और परंपरा
वैसाख मास की कालाष्टमी कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाई जाती है। इस दिन भगवान शिव के उग्र स्वरूप कालभैरव की पूजा का विशेष महत्व है। हिंदू पंचांग के अनुसार प्रत्येक मास की कृष्ण अष्टमी को कालाष्टमी आती है और इसे साधना व संरक्षण से जुड़ा पर्व माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि कालभैरव की आराधना से भय, बाधाएँ और नकारात्मक प्रभाव दूर होते हैं तथा कार्यों में सफलता प्राप्त होती है। कालभैरव प्राकट्योत्सव सबसे प्रमुख कालाष्टमी मानी जाती है, जिसे भैरव अष्टमी भी कहते हैं। उत्तर भारतीय पूर्णिमांत पंचांग में यह मार्गशीर्ष मास में और दक्षिण भारतीय अमांत पंचांग में कार्तिक मास में आती है। इसी तिथि को भगवान शिव के भैरव रूप में प्राकट्य की मान्यता है।