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श्री भैरव कालाष्टमी माघ

29 जनवरी 2027 · शुक्रवार माघ, कृष्ण अष्टमी

माघ माह 2027 में श्री भैरव कालाष्टमी कब है?

संक्षिप्त उत्तर

श्री भैरव कालाष्टमी माघ 2027 कब है?

श्री भैरव कालाष्टमी माघ 2027 शुक्रवार, 29 जनवरी 2027 को मनाई जाएगी। श्री भैरव कालाष्टमी माघ की तिथि माघ, कृष्ण अष्टमी है। श्री भैरव कालाष्टमी माघ की पूजा का शुभ मुहूर्त 06:42 – 08:53 तक रहेगा।

दिनांक29 जनवरी 2027
तिथिमाघ, कृष्ण अष्टमी
पूजा मुहूर्त06:42 – 08:53
पर्व जानकारी

पर्व सारांश

मुख्य तिथिमाघ, कृष्ण अष्टमीमाघ माह के व्रत-त्यौहार
मुख्य देवताभगवान भैरव
वार-देवतामाँ लक्ष्मी · माँ संतोषीशुक्रवार
नक्षत्रस्वातिशूल
संक्षिप्त परिचय

श्री भैरव कालाष्टमी माघ का महत्व और उत्सव

श्री भैरव कालाष्टमी माघ माघ, कृष्ण अष्टमी तिथि को मनाया जाने वाला हिंदू पर्व है। इस दिन भगवान भैरव की पूजा की जाती है और सुख-समृद्धि एवं रक्षा की प्रार्थना की जाती है।

पंचांग विवरण

त्योहार का पंचांग और शुभ समय

मुख्य पंचांग विवरण

तिथि (सूर्योदय)कृष्ण अष्टमी
नक्षत्रस्वाति
योगशूल
करणबालव
ऋतुशिशिरउत्तरायण
संवत्सरसिद्धार्थि
दिशा शूलपश्चिमजौ या दही खाकर

श्री भैरव कालाष्टमी माघ के दिन पूजा, स्नान और दान का शुभ समय

मुहूर्त / योगसमयउपयोगस्थिति
ब्रह्म मुहूर्त 05:06 – 05:54 स्नान, जप, संकल्प शुभ
प्रातः पूजन 06:42 – 08:53 पूजा और संकल्प श्रेष्ठ
अभिजीत मुहूर्त 11:49 – 12:33 सामान्य शुभ कार्य शुभ
विजय मुहूर्त 16:12 – 16:56 कार्य-सिद्धि, संकल्प शुभ
सन्ध्या पूजन 16:52 – 18:04 दीप, आरती, कथा शुभ
राहु काल (वर्ज्य) 10:48 – 12:11 शुभ कार्य में टालें सावधानी
तिथि शुरू 29 Jan 04:02 AM
ब्रह्म मुहूर्त जप / स्नान 05:06–05:54
प्रातः पूजा मुख्य संकल्प 06:42–08:53
अभिजीत शुभ मुहूर्त 11:49 – 12:33
तिथि समाप्त 30 Jan 04:57 AM
सन्ध्या पूजन दीप, आरती 16:52–18:04

समय वाराणसी के सूर्योदय/सूर्यास्त पर आधारित हैं; स्थान अनुसार थोड़ा अंतर संभव है।

पर्व विवरण

श्री भैरव कालाष्टमी माघ — महत्व, कथा और परंपरा

माघ मास की गहराती सर्दी में, जब दिन छोटे और रातें लंबी होती हैं, भगवान शिव का तेजस्वी कालस्वरूप, श्री भैरव, भक्तों को निर्भीक रहने का संदेश देता है। इस माह की कालाष्टमी, जिसे भैरवाष्टमी भी कहते हैं, साल की बारहों कालाष्टमियों में सर्वोच्च मानी गई है। भक्त असितांग, चंड, रूरू, क्रोध, उन्मत्त, कपाल, भीषण और संहार—भैरव जी के आठों स्वरूपों का विधिवत पूजन करते हैं, हालांकि बटुक भैरव की विशेष आराधना सबसे अधिक प्रचलित है। सरसों के तेल का दीप, काले तिल, गुड़ और नारियल चढ़ाकर संकटों का निवारण माँगा जाता है। प्रचलित विश्वास है कि कालभैरव अष्टक का सस्वर पाठ भय, रोग और अनिष्ट शक्तियों से रक्षा कर साधक को अचल साहस प्रदान करता है, ठीक वैसे ही जैसे माघ का उजला सूर्योदय शीत की कठोरता को हर लेता है।

विश्वसनीयता एवं प्रामाणिकता

श्री भैरव कालाष्टमी माघ की तिथि कैसे निर्धारित हुई?

पंचांग-सत्यापित
पंचांग तिथिमाघ, कृष्ण अष्टमी
गणना का आधारतिथि-आधारित (चंद्र-सौर)
गणना पद्धतिदृक् गणित (Meeus)
संदर्भ स्थानउज्जैन
आराध्य देवभगवान भैरव
अंतिम संशोधन30 Mar 2026

तिथि का निर्धारण सूर्योदय के समय प्रचलित तिथि से होता है, और सूर्योदय प्रत्येक नगर में भिन्न होता है — इसलिए स्थान बदलने पर तारीख़ में एक दिन का अंतर संभव है। इसी कारण Bhakti Sarovar पर समय एक राष्ट्रीय औसत नहीं, बल्कि आपके चुने हुए नगर के वास्तविक सूर्योदय के अनुसार गणना किए जाते हैं। पूरी गणना पद्धति पढ़ें →

इस पृष्ठ के योगदानकर्ता
प्रमूल लेखनप्रियंका शर्मा शास्त्रीय सत्यापनचन्द्रभूषण मणि त्रिपाठी दीसंपादकीय समीक्षादीपक शर्मा

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सामान्य प्रश्न

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

2027 में श्री भैरव कालाष्टमी माघ 29 जनवरी 2027 (शुक्रवार) को है।
श्री भैरव कालाष्टमी माघ माघ, कृष्ण अष्टमी तिथि को मनाया जाने वाला पर्व है।
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अस्वीकरण

इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह केवल सामान्य सूचना हेतु हैं। भक्ति सरोवर इनका समर्थन नहीं करता। जानकारी विभिन्न पंचांग, प्रवचनों, मान्यताओं और धर्मग्रंथों से संग्रहित है। कृपया अपने विवेक का उपयोग करें।