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श्री आदिशंकराचार्य प्राकट्योत्सव

10 मई 2027 · सोमवार चैत्र, शुक्ल पंचमी

वैसाख माह 2027 में श्री आदिशंकराचार्य प्राकट्योत्सव कब है?

संक्षिप्त उत्तर

श्री आदिशंकराचार्य प्राकट्योत्सव 2027 कब है?

श्री आदिशंकराचार्य प्राकट्योत्सव 2027 सोमवार, 10 मई 2027 को मनाई जाएगी। श्री आदिशंकराचार्य प्राकट्योत्सव की तिथि चैत्र, शुक्ल पंचमी है। श्री आदिशंकराचार्य प्राकट्योत्सव की पूजा का शुभ मुहूर्त 05:16 – 07:55 तक रहेगा।

दिनांक10 मई 2027
तिथिचैत्र, शुक्ल पंचमी
पूजा मुहूर्त05:16 – 07:55
पर्व जानकारी

पर्व सारांश

मुख्य तिथिचैत्र, शुक्ल पंचमी वैसाख माह के व्रत-त्यौहार
मुख्य देवताश्री आदिशंकराचार्य
वार-देवताशिव जीसोमवार
नक्षत्रआर्द्राधृति
संक्षिप्त परिचय

श्री आदिशंकराचार्य प्राकट्योत्सव का महत्व और उत्सव

श्री आदिशंकराचार्य प्राकट्योत्सव चैत्र, शुक्ल पंचमी तिथि को मनाया जाने वाला हिंदू पर्व है। इस दिन श्री आदिशंकराचार्य की पूजा की जाती है और सुख-समृद्धि एवं रक्षा की प्रार्थना की जाती है।

पंचांग विवरण

त्योहार का पंचांग और शुभ समय

मुख्य पंचांग विवरण

तिथि (सूर्योदय)शुक्ल चतुर्थी
नक्षत्रआर्द्रा
योगधृति
करणविष्टि
ऋतुग्रीष्मउत्तरायण
संवत्सररौद्र
दिशा शूलपूर्वदर्पण देखकर या दूध पीकर

श्री आदिशंकराचार्य प्राकट्योत्सव के दिन पूजा, स्नान और दान का शुभ समय

मुहूर्त / योगसमयउपयोगस्थिति
ब्रह्म मुहूर्त 03:40 – 04:28 स्नान, जप, संकल्प शुभ
प्रातः पूजन 05:16 – 07:55 पूजा और संकल्प श्रेष्ठ
अभिजीत मुहूर्त 11:27 – 12:21 सामान्य शुभ कार्य शुभ
विजय मुहूर्त 16:46 – 17:39 कार्य-सिद्धि, संकल्प शुभ
सन्ध्या पूजन 17:45 – 18:57 दीप, आरती, कथा शुभ
राहु काल (वर्ज्य) 06:55 – 08:35 शुभ कार्य में टालें सावधानी
तिथि शुरू 10 May 06:22 AM
ब्रह्म मुहूर्त जप / स्नान 03:40–04:28
प्रातः पूजा मुख्य संकल्प 05:16–07:55
अभिजीत शुभ मुहूर्त 11:27 – 12:21
तिथि समाप्त 11 May 03:47 AM
सन्ध्या पूजन दीप, आरती 17:45–18:57

समय वाराणसी के सूर्योदय/सूर्यास्त पर आधारित हैं; स्थान अनुसार थोड़ा अंतर संभव है।

पर्व विवरण

श्री आदिशंकराचार्य प्राकट्योत्सव — महत्व, कथा और परंपरा

श्री आदिशंकराचार्य प्राकट्योत्सव वैसाख मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाया जाता है। वैसाख का महीना साधना, ज्ञान और वैराग्य से जुड़ा माना जाता है, इसलिए इस मास में आदिगुरु शंकराचार्य का स्मरण विशेष अर्थ रखता है। आदि शंकराचार्य का जन्म केरल के कालड़ी में एक नंबूदरी ब्राह्मण परिवार में हुआ था। उन्हें भगवान शंकर का अवतार माना जाता है। आदि शंकराचार्य अद्वैत वेदांत के संस्थापक और महान हिंदू धर्म प्रचारक थे। उन्होंने जीवनभर सनातन धर्म के जीर्णोद्धार और वेदांत के प्रचार में स्वयं को समर्पित रखा। उनके प्रयासों से हिंदू धर्म को नई चेतना और दार्शनिक दृढ़ता प्राप्त हुई। वे जगद्गुरु और शंकर भगवद्पादाचार्य के नाम से भी प्रसिद्ध हैं। उनका अद्वैत दर्शन भारतीय संस्कृति में ज्ञान और धर्म का आधार माना जाता है।

विश्वसनीयता एवं प्रामाणिकता

श्री आदिशंकराचार्य प्राकट्योत्सव की तिथि कैसे निर्धारित हुई?

पंचांग-सत्यापित
पंचांग तिथिचैत्र, शुक्ल पंचमी
गणना का आधारतिथि-आधारित (चंद्र-सौर)
गणना पद्धतिदृक् गणित (Meeus)
संदर्भ स्थानउज्जैन
आराध्य देवश्री आदिशंकराचार्य
अंतिम संशोधन06 Jul 2026

तिथि का निर्धारण सूर्योदय के समय प्रचलित तिथि से होता है, और सूर्योदय प्रत्येक नगर में भिन्न होता है — इसलिए स्थान बदलने पर तारीख़ में एक दिन का अंतर संभव है। इसी कारण Bhakti Sarovar पर समय एक राष्ट्रीय औसत नहीं, बल्कि आपके चुने हुए नगर के वास्तविक सूर्योदय के अनुसार गणना किए जाते हैं। पूरी गणना पद्धति पढ़ें →

इस पृष्ठ के योगदानकर्ता
प्रमूल लेखनप्रियंका शर्मा शास्त्रीय सत्यापनचन्द्रभूषण मणि त्रिपाठी दीसंपादकीय समीक्षादीपक शर्मा

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सामान्य प्रश्न

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

2027 में श्री आदिशंकराचार्य प्राकट्योत्सव 10 मई 2027 (सोमवार) को है।
श्री आदिशंकराचार्य प्राकट्योत्सव चैत्र, शुक्ल पंचमी तिथि को मनाया जाने वाला पर्व है।
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अस्वीकरण

इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह केवल सामान्य सूचना हेतु हैं। भक्ति सरोवर इनका समर्थन नहीं करता। जानकारी विभिन्न पंचांग, प्रवचनों, मान्यताओं और धर्मग्रंथों से संग्रहित है। कृपया अपने विवेक का उपयोग करें।