श्रावण मास की कृष्ण पक्ष त्रयोदशी पर आने वाला सोम प्रदोष व्रत शिव-भक्तों के लिए अत्यन्त फलदायी माना गया है। यह व्रत प्रत्येक पक्ष की त्रयोदशी को रखा जाता है, किन्तु सोमवार का संयोग इसे विशेष महत्त्व देता है। पूजा का सर्वोत्तम समय सूर्यास्त से लगभग पैंतालीस मिनट पहले आरम्भ होकर उतने ही समय बाद तक रहता है; इसी अवधि में शिव-परिवार का अभिषेक और आरती सम्पन्न की जाती है। व्रती स्नान-जल में केसर या केवड़ा-जल मिलाकर स्नान करते हैं, तत्पश्चात श्रद्धा-पूर्वक “ॐ कृष्णाय वासुदेवाय हरये परमात्मने प्रणतः क्लेशनाशाय गोविन्दाय नमः” मंत्र का सत्ताइस बार जप करते हैं। मान्यता है कि इस साधना से घर-परिवार के विवाद, दारिद्र्य और रोग शांत होकर जीवन में सुख-समृद्धि तथा शान्ति का स्थायी वास होता है।