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शरद पूर्णिमा

25 अक्टूबर 2026 · रविवार आश्विन, शुक्ल पूर्णिमा

आश्विन माह 2026 में शरद पूर्णिमा कब है?

संक्षिप्त उत्तर

शरद पूर्णिमा 2026 कब है?

शरद पूर्णिमा 2026 रविवार, 25 अक्टूबर 2026 को मनाई जाएगी। शरद पूर्णिमा की तिथि आश्विन, शुक्ल पूर्णिमा है। शरद पूर्णिमा की पूजा का शुभ मुहूर्त 06:02 – 08:18 तक रहेगा।

दिनांक25 अक्टूबर 2026
तिथिआश्विन, शुक्ल पूर्णिमा
पूजा मुहूर्त06:02 – 08:18
पर्व जानकारी

पर्व सारांश

मुख्य तिथिआश्विन, शुक्ल पूर्णिमाआश्विन माह के व्रत-त्यौहार
मुख्य देवतामाँ लक्ष्मी
वार-देवतासूर्य देवरविवार
नक्षत्ररेवतीहर्षण
संक्षिप्त परिचय

शरद पूर्णिमा का महत्व और उत्सव

शरद पूर्णिमा आश्विन, शुक्ल पूर्णिमा तिथि को मनाया जाने वाला हिंदू पर्व है। इस दिन माँ लक्ष्मी की पूजा की जाती है और सुख-समृद्धि एवं रक्षा की प्रार्थना की जाती है।

पंचांग विवरण

त्योहार का पंचांग और शुभ समय

मुख्य पंचांग विवरण

तिथि (सूर्योदय)शुक्ल चतुर्दशी
नक्षत्ररेवती
योगहर्षण
करणवणिज
ऋतुहेमन्तदक्षिणायन
संवत्सरसिद्धार्थि
दिशा शूलपश्चिमघी या दलिया खाकर

शरद पूर्णिमा के दिन पूजा, स्नान और दान का शुभ समय

मुहूर्त / योगसमयउपयोगस्थिति
ब्रह्म मुहूर्त 04:26 – 05:14 स्नान, जप, संकल्प शुभ
प्रातः पूजन 06:02 – 08:18 पूजा और संकल्प श्रेष्ठ
अभिजीत मुहूर्त 11:19 – 12:04 सामान्य शुभ कार्य शुभ
विजय मुहूर्त 15:51 – 16:36 कार्य-सिद्धि, संकल्प शुभ
सन्ध्या पूजन 16:34 – 17:46 दीप, आरती, कथा शुभ
राहु काल (वर्ज्य) 15:57 – 17:22 शुभ कार्य में टालें सावधानी
तिथि शुरू 25 Oct 11:55 AM
ब्रह्म मुहूर्त जप / स्नान 04:26–05:14
प्रातः पूजा मुख्य संकल्प 06:02–08:18
अभिजीत शुभ मुहूर्त 11:19 – 12:04
तिथि समाप्त 26 Oct 09:41 AM
सन्ध्या पूजन दीप, आरती 16:34–17:46

समय वाराणसी के सूर्योदय/सूर्यास्त पर आधारित हैं; स्थान अनुसार थोड़ा अंतर संभव है।

पर्व विवरण

शरद पूर्णिमा — महत्व, कथा और परंपरा

आश्विनशुक्लपूर्णिमा को ‘शरद’ या ‘कोजागर’ पूर्णिमा कहते हैं। शास्त्रों में मान्यता है कि इस रात देवीलक्ष्मी आकाशविचरण करते हुए पुकारती हैं—“कोजागर्ति?” अर्थातकौन जाग रहा है? जो साधक जगकर लक्ष्मीपूजन करता है, उस पर समृद्धि की वर्षा होती है और दरिद्रता मिटती है। परम्परा के अनुसार, इस चाँदनी रात में घरआँगन के कोनेकोने में घी के ग्यारह दीप जलाए जाते हैं; दूधचावल की खीर खुले आकाश तले रख कर ‘अमृतकिरणों’ का स्पर्श दिया जाता है। विश्वास है कि चन्द्रतत्व से पूरित यह प्रसाद आरोग्य और सौभाग्य बढ़ाता है। आश्विनमास अपने साथ शरदऋतु की शीतल बयार, स्वच्छ गगन और पके धान की सुवास लाता है; इसी सौम्य वातावरण में कोजागरी व्रत साधक को मन, वचन और कर्म से जागरूक रहने की प्रेरणा देता है।

 

विश्वसनीयता एवं प्रामाणिकता

शरद पूर्णिमा की तिथि कैसे निर्धारित हुई?

पंचांग-सत्यापित
पंचांग तिथिआश्विन, शुक्ल पूर्णिमा
गणना का आधारतिथि-आधारित (चंद्र-सौर)
गणना पद्धतिदृक् गणित (Meeus)
संदर्भ स्थानउज्जैन
आराध्य देवमाँ लक्ष्मी
अंतिम संशोधन21 Apr 2026

तिथि का निर्धारण सूर्योदय के समय प्रचलित तिथि से होता है, और सूर्योदय प्रत्येक नगर में भिन्न होता है — इसलिए स्थान बदलने पर तारीख़ में एक दिन का अंतर संभव है। इसी कारण Bhakti Sarovar पर समय एक राष्ट्रीय औसत नहीं, बल्कि आपके चुने हुए नगर के वास्तविक सूर्योदय के अनुसार गणना किए जाते हैं। पूरी गणना पद्धति पढ़ें →

इस पृष्ठ के योगदानकर्ता
प्रमूल लेखनप्रियंका शर्मा शास्त्रीय सत्यापनचन्द्रभूषण मणि त्रिपाठी दीसंपादकीय समीक्षादीपक शर्मा

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सामान्य प्रश्न

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

2026 में शरद पूर्णिमा 25 अक्टूबर 2026 (रविवार) को है।
शरद पूर्णिमा आश्विन, शुक्ल पूर्णिमा तिथि को मनाया जाने वाला पर्व है।
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अस्वीकरण

इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह केवल सामान्य सूचना हेतु हैं। भक्ति सरोवर इनका समर्थन नहीं करता। जानकारी विभिन्न पंचांग, प्रवचनों, मान्यताओं और धर्मग्रंथों से संग्रहित है। कृपया अपने विवेक का उपयोग करें।