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शनि जयंती

4 जून 2027 · शुक्रवार ज्येष्ठ, कृष्ण अमावस्या

शनि जयंती कब है?

संक्षिप्त उत्तर

शनि जयंती 2027 कब है?

शनि जयंती 2027 शुक्रवार, 4 जून 2027 को मनाई जाएगी। शनि जयंती की तिथि ज्येष्ठ, कृष्ण अमावस्या है। शनि जयंती की पूजा का शुभ मुहूर्त 05:07 – 07:50 तक रहेगा।

दिनांक4 जून 2027
तिथिज्येष्ठ, कृष्ण अमावस्या
पूजा मुहूर्त05:07 – 07:50
पर्व जानकारी

पर्व सारांश

मुख्य तिथिज्येष्ठ, कृष्ण अमावस्याज्येष्ठ माह के व्रत-त्योहार
मुख्य देवताSri ShaniDeva
वार-देवतामाँ लक्ष्मी · माँ संतोषी शुक्रवार
नक्षत्रकृत्तिकासुकर्मा
संक्षिप्त परिचय

शनि जयंती का महत्व और उत्सव

शनि जयंती ज्येष्ठ, कृष्ण अमावस्या तिथि को मनाया जाने वाला हिंदू पर्व है। इस दिन Sri ShaniDeva की पूजा की जाती है और सुख-समृद्धि एवं रक्षा की प्रार्थना की जाती है।

पंचांग विवरण

त्योहार का पंचांग और शुभ समय

मुख्य पंचांग विवरण

तिथि (सूर्योदय)कृष्ण अमावस्या
नक्षत्रकृत्तिका
योगसुकर्मा
करणचतुष्पद
ऋतुग्रीष्मउत्तरायण
संवत्सररौद्र
दिशा शूलपश्चिमजौ या दही खाकर

शनि जयंती के दिन पूजा, स्नान और दान का शुभ समय

मुहूर्त / योगसमयउपयोगस्थिति
ब्रह्म मुहूर्त 03:31 – 04:19 स्नान, जप, संकल्प शुभ
प्रातः पूजन 05:07 – 07:50 पूजा और संकल्प श्रेष्ठ
अभिजीत मुहूर्त 11:29 – 12:23 सामान्य शुभ कार्य शुभ
विजय मुहूर्त 16:56 – 17:51 कार्य-सिद्धि, संकल्प शुभ
सन्ध्या पूजन 17:58 – 19:10 दीप, आरती, कथा शुभ
राहु काल (वर्ज्य) 10:14 – 11:56 शुभ कार्य में टालें सावधानी
तिथि शुरू 04 Jun 04:05 AM
ब्रह्म मुहूर्त जप / स्नान 03:31–04:19
प्रातः पूजा मुख्य संकल्प 05:07–07:50
अभिजीत शुभ मुहूर्त 11:29 – 12:23
तिथि समाप्त 05 Jun 01:09 AM
सन्ध्या पूजन दीप, आरती 17:58–19:10

समय वाराणसी के सूर्योदय/सूर्यास्त पर आधारित हैं; स्थान अनुसार थोड़ा अंतर संभव है।

पर्व विवरण

शनि जयंती — महत्व, कथा और परंपरा

ज्येष्ठ अमावस्या का दिन शनिदेव के जन्मोत्सव के रूप में विशेष महत्व रखता है, क्योंकि पुराणों के अनुसार इसी तिथि पर न्यायप्रिय शनि देव का अवतरण हुआ था। मंद गति से चलने वाले ये नवग्रहों में एकमात्र ऐसे देव हैं जिन्हें कलियुग का दण्डाधिकारी भी कहा जाता है—शत्रु नहीं, कर्मफल के निष्पक्ष वितरक। इस कारण ज्येष्ठ अमावस्या पर शनि-दोष निवारण के उपाय, जैसे तेल-अभिषेक, काली उड़द या काला तिल दान तथा शनि चालीसा का पाठ, खूब किए जाते हैं। परंपरा बताती है कि इस दिन वट सावित्री व्रत के साथ-साथ पिंडदान और गऊ-दान करने से पूर्वजों की शांति तथा परिवार की सुख-समृद्धि मिलती है। पर्व का आरंभ प्रातः नदी, सरोवर या कुंड में स्नान से करें; सूर्यदेव को तांबे के पात्र से जल अर्पित करें और बहते जल में काले तिल प्रवाहित करें। माना जाता है कि ऐसे संकल्पपूर्वक किए गए दान-धर्म और शनि पूजन से जीवन में संतुलन आता है, बाधाएँ शांत होती हैं और कर्मों का फल सुगम हो जाता है।

विश्वसनीयता एवं प्रामाणिकता

शनि जयंती की तिथि कैसे निर्धारित हुई?

पंचांग-सत्यापित
पंचांग तिथिज्येष्ठ, कृष्ण अमावस्या
गणना का आधारतिथि-आधारित (चंद्र-सौर)
गणना पद्धतिदृक् गणित (Meeus)
संदर्भ स्थानउज्जैन
आराध्य देवSri ShaniDeva
अंतिम संशोधन15 Jun 2026

तिथि का निर्धारण सूर्योदय के समय प्रचलित तिथि से होता है, और सूर्योदय प्रत्येक नगर में भिन्न होता है — इसलिए स्थान बदलने पर तारीख़ में एक दिन का अंतर संभव है। इसी कारण Bhakti Sarovar पर समय एक राष्ट्रीय औसत नहीं, बल्कि आपके चुने हुए नगर के वास्तविक सूर्योदय के अनुसार गणना किए जाते हैं। पूरी गणना पद्धति पढ़ें →

इस पृष्ठ के योगदानकर्ता
प्रमूल लेखनप्रियंका शर्मा शास्त्रीय सत्यापनचन्द्रभूषण मणि त्रिपाठी दीसंपादकीय समीक्षादीपक शर्मा

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सामान्य प्रश्न

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

2027 में शनि जयंती 4 जून 2027 ( शुक्रवार) को है।
शनि जयंती ज्येष्ठ, कृष्ण अमावस्या तिथि को मनाया जाने वाला पर्व है।
!

अस्वीकरण

इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह केवल सामान्य सूचना हेतु हैं। भक्ति सरोवर इनका समर्थन नहीं करता। जानकारी विभिन्न पंचांग, प्रवचनों, मान्यताओं और धर्मग्रंथों से संग्रहित है। कृपया अपने विवेक का उपयोग करें।