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शाकम्भरी पूर्णिमा

22 जनवरी 2027 · शुक्रवार पौष, शुक्ल अष्टमी

पौष माह 2027 में शाकम्भरी पूर्णिमा कब है?

संक्षिप्त उत्तर

शाकम्भरी पूर्णिमा 2027 कब है?

शाकम्भरी पूर्णिमा 2027 शुक्रवार, 22 जनवरी 2027 को मनाई जाएगी। शाकम्भरी पूर्णिमा की तिथि पौष, शुक्ल अष्टमी है। शाकम्भरी पूर्णिमा की पूजा का शुभ मुहूर्त 06:45 – 08:55 तक रहेगा।

दिनांक22 जनवरी 2027
तिथिपौष, शुक्ल अष्टमी
पूजा मुहूर्त06:45 – 08:55
पर्व जानकारी

पर्व सारांश

मुख्य तिथिपौष, शुक्ल अष्टमी पौष माह के व्रत-त्यौहार
मुख्य देवतामाँ शाकम्भरी
वार-देवतामाँ लक्ष्मी · माँ संतोषीशुक्रवार
नक्षत्रपुनर्वसुविष्कम्भ
संक्षिप्त परिचय

शाकम्भरी पूर्णिमा का महत्व और उत्सव

शाकम्भरी पूर्णिमा पौष, शुक्ल अष्टमी तिथि को मनाया जाने वाला हिंदू पर्व है। इस दिन माँ शाकम्भरी की पूजा की जाती है और सुख-समृद्धि एवं रक्षा की प्रार्थना की जाती है।

पंचांग विवरण

त्योहार का पंचांग और शुभ समय

मुख्य पंचांग विवरण

तिथि (सूर्योदय)शुक्ल पूर्णिमा
नक्षत्रपुनर्वसु
योगविष्कम्भ
करणविष्टि
ऋतुशिशिरउत्तरायण
संवत्सरसिद्धार्थि
दिशा शूलपश्चिमजौ या दही खाकर

शाकम्भरी पूर्णिमा के दिन पूजा, स्नान और दान का शुभ समय

मुहूर्त / योगसमयउपयोगस्थिति
ब्रह्म मुहूर्त 05:09 – 05:57 स्नान, जप, संकल्प शुभ
प्रातः पूजन 06:45 – 08:55 पूजा और संकल्प श्रेष्ठ
अभिजीत मुहूर्त 11:47 – 12:31 सामान्य शुभ कार्य शुभ
विजय मुहूर्त 16:08 – 16:51 कार्य-सिद्धि, संकल्प शुभ
सन्ध्या पूजन 16:47 – 17:59 दीप, आरती, कथा शुभ
राहु काल (वर्ज्य) 10:48 – 12:09 शुभ कार्य में टालें सावधानी
तिथि शुरू 21 Jan 09:29 PM
ब्रह्म मुहूर्त जप / स्नान 05:09–05:57
प्रातः पूजा मुख्य संकल्प 06:45–08:55
अभिजीत शुभ मुहूर्त 11:47 – 12:31
तिथि समाप्त 22 Jan 05:46 PM
सन्ध्या पूजन दीप, आरती 16:47–17:59

समय वाराणसी के सूर्योदय/सूर्यास्त पर आधारित हैं; स्थान अनुसार थोड़ा अंतर संभव है।

पर्व विवरण

शाकम्भरी पूर्णिमा — महत्व, कथा और परंपरा

धर्मग्रंथों में वर्णित पौष शुक्ल अष्टमी से आरम्भ होकर पौष पूर्णिमा तक चलने वाले आठ-दिवसीय शाकंभरी नवरात्र का अंतिम और प्रमुख दिन शाकंभरी पूर्णिमा है; इसी तिथि को माता की जयंती मनाई जाती है। शाक = सब्ज़ी, अंभरी = धारण/प्रदान करने वाली; दुर्गा के इस रूप ने भुखमरी से त्रस्त जगत को वनस्पतियों, फल-अन्न से पोषण दिया—इसी से नाम शाकंभरी पड़ा। मार्कंडेय पुराण में वर्णित रक्तदंतिका, भीमा, भ्रामरी आदि रूपों में यह स्वरूप विशेष लोकप्रिय है। पौष मास कड़ी सर्दी का समय है; अनेक क्षेत्रों में इसी पूर्णिमा से माघ स्नान-दान आरम्भ माना जाता है, अतः इसे पौष पूर्णिमा भी कहा जाता है। मंदिरों में माँ को साग-सब्ज़ी, अनाज, फल, तिल व गुड़ से अलंकृत कर अर्चना की जाती है; भक्त परिवार-समृद्धि और आरोग्य की कामना करते हैं।

विश्वसनीयता एवं प्रामाणिकता

शाकम्भरी पूर्णिमा की तिथि कैसे निर्धारित हुई?

पंचांग-सत्यापित
पंचांग तिथिपौष, शुक्ल अष्टमी
गणना का आधारतिथि-आधारित (चंद्र-सौर)
गणना पद्धतिदृक् गणित (Meeus)
संदर्भ स्थानउज्जैन
आराध्य देवमाँ शाकम्भरी
अंतिम संशोधन19 Aug 2026

तिथि का निर्धारण सूर्योदय के समय प्रचलित तिथि से होता है, और सूर्योदय प्रत्येक नगर में भिन्न होता है — इसलिए स्थान बदलने पर तारीख़ में एक दिन का अंतर संभव है। इसी कारण Bhakti Sarovar पर समय एक राष्ट्रीय औसत नहीं, बल्कि आपके चुने हुए नगर के वास्तविक सूर्योदय के अनुसार गणना किए जाते हैं। पूरी गणना पद्धति पढ़ें →

इस पृष्ठ के योगदानकर्ता
प्रमूल लेखनप्रियंका शर्मा शास्त्रीय सत्यापनचन्द्रभूषण मणि त्रिपाठी दीसंपादकीय समीक्षादीपक शर्मा

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सामान्य प्रश्न

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

2027 में शाकम्भरी पूर्णिमा 22 जनवरी 2027 (शुक्रवार) को है।
शाकम्भरी पूर्णिमा पौष, शुक्ल अष्टमी तिथि को मनाया जाने वाला पर्व है।
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अस्वीकरण

इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह केवल सामान्य सूचना हेतु हैं। भक्ति सरोवर इनका समर्थन नहीं करता। जानकारी विभिन्न पंचांग, प्रवचनों, मान्यताओं और धर्मग्रंथों से संग्रहित है। कृपया अपने विवेक का उपयोग करें।