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पूर्णिमा श्राद्ध

26 सितंबर 2026 · शनिवार भाद्रपद, शुक्ल पूर्णिमा

भाद्रपद माह 2026 में पूर्णिमा श्राद्ध कब है?

संक्षिप्त उत्तर

पूर्णिमा श्राद्ध 2026 कब है?

पूर्णिमा श्राद्ध 2026 शनिवार, 26 सितंबर 2026 को मनाई जाएगी। पूर्णिमा श्राद्ध की तिथि भाद्रपद, शुक्ल पूर्णिमा है। पूर्णिमा श्राद्ध की पूजा का शुभ मुहूर्त 05:48 – 08:12 तक रहेगा।

दिनांक26 सितंबर 2026
तिथिभाद्रपद, शुक्ल पूर्णिमा
पूजा मुहूर्त05:48 – 08:12
पर्व जानकारी

पर्व सारांश

मुख्य तिथिभाद्रपद, शुक्ल पूर्णिमाभाद्रपद माह के व्रत-त्यौहार
वार-देवताशनि देवशनिवार
नक्षत्रपूर्व भाद्रपदगण्ड
संक्षिप्त परिचय

पूर्णिमा श्राद्ध का महत्व और उत्सव

पूर्णिमा श्राद्ध भाद्रपद, शुक्ल पूर्णिमा तिथि को मनाया जाने वाला हिंदू पर्व है।

पंचांग विवरण

त्योहार का पंचांग और शुभ समय

मुख्य पंचांग विवरण

तिथि (सूर्योदय)शुक्ल पूर्णिमा
नक्षत्रपूर्व भाद्रपद
योगगण्ड
करणविष्टि
ऋतुशरददक्षिणायन
संवत्सरसिद्धार्थि
दिशा शूलपूर्वअदरक या तिल खाकर

पूर्णिमा श्राद्ध के दिन पूजा, स्नान और दान का शुभ समय

मुहूर्त / योगसमयउपयोगस्थिति
ब्रह्म मुहूर्त 04:12 – 05:00 स्नान, जप, संकल्प शुभ
प्रातः पूजन 05:48 – 08:12 पूजा और संकल्प श्रेष्ठ
अभिजीत मुहूर्त 11:25 – 12:13 सामान्य शुभ कार्य शुभ
विजय मुहूर्त 16:14 – 17:02 कार्य-सिद्धि, संकल्प शुभ
सन्ध्या पूजन 17:03 – 18:15 दीप, आरती, कथा शुभ
राहु काल (वर्ज्य) 08:48 – 10:19 शुभ कार्य में टालें सावधानी
तिथि शुरू 25 Sep 11:06 PM
ब्रह्म मुहूर्त जप / स्नान 04:12–05:00
प्रातः पूजा मुख्य संकल्प 05:48–08:12
अभिजीत शुभ मुहूर्त 11:25 – 12:13
तिथि समाप्त 26 Sep 10:18 PM
सन्ध्या पूजन दीप, आरती 17:03–18:15

समय वाराणसी के सूर्योदय/सूर्यास्त पर आधारित हैं; स्थान अनुसार थोड़ा अंतर संभव है।

पर्व विवरण

पूर्णिमा श्राद्ध — महत्व, कथा और परंपरा

भाद्रपदशुक्लपूर्णिमा पर किया जाने वाला पूर्णिमा श्राद्ध पितृपक्ष का पहला संस्कार है, विशेषतः उन पूर्वजों के लिए जिनकी मृत्यु पूर्णिमा तिथि को हुई या जिनकी तिथि स्मरण में नहीं रही। सूर्योदय के बाद स्नान कर कुशअंगूठी व दक्षिणावर्त जनेऊ धारण करें और तिलजल से पितरों का आवाहन करें। फिर तिल, अक्षत, घी, शहद और पके चावल के पिण्ड दक्षिण दिशा की ओर अर्पित कर बारह तर्पण दें। इसके पश्चात् ब्राह्मणों को दूधचावल, घृतयुक्त शाक तथा मधुर व्यंजन परोसें और वस्त्रदक्षिणा दें। गौग्रास के पाँच ग्रास, कुत्ते व कौओं को अन्न देना भी अनिवार्य कर्म माना गया है। विश्वास है कि इस श्राद्ध से पितृतृप्ति होती है, कुल में आयुआरोग्य और समृद्धि बढ़ती है तथा अनजाने पितृऋण का शमन होता है।

विश्वसनीयता एवं प्रामाणिकता

पूर्णिमा श्राद्ध की तिथि कैसे निर्धारित हुई?

पंचांग-सत्यापित
पंचांग तिथिभाद्रपद, शुक्ल पूर्णिमा
गणना का आधारतिथि-आधारित (चंद्र-सौर)
गणना पद्धतिदृक् गणित (Meeus)
संदर्भ स्थानउज्जैन
अंतिम संशोधन23 Apr 2026

तिथि का निर्धारण सूर्योदय के समय प्रचलित तिथि से होता है, और सूर्योदय प्रत्येक नगर में भिन्न होता है — इसलिए स्थान बदलने पर तारीख़ में एक दिन का अंतर संभव है। इसी कारण Bhakti Sarovar पर समय एक राष्ट्रीय औसत नहीं, बल्कि आपके चुने हुए नगर के वास्तविक सूर्योदय के अनुसार गणना किए जाते हैं। पूरी गणना पद्धति पढ़ें →

इस पृष्ठ के योगदानकर्ता
प्रमूल लेखनप्रियंका शर्मा शास्त्रीय सत्यापनचन्द्रभूषण मणि त्रिपाठी दीसंपादकीय समीक्षादीपक शर्मा

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सामान्य प्रश्न

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

2026 में पूर्णिमा श्राद्ध 26 सितंबर 2026 (शनिवार) को है।
पूर्णिमा श्राद्ध भाद्रपद, शुक्ल पूर्णिमा तिथि को मनाया जाने वाला पर्व है।
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अस्वीकरण

इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह केवल सामान्य सूचना हेतु हैं। भक्ति सरोवर इनका समर्थन नहीं करता। जानकारी विभिन्न पंचांग, प्रवचनों, मान्यताओं और धर्मग्रंथों से संग्रहित है। कृपया अपने विवेक का उपयोग करें।