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फुलेरा दूज

10 मार्च 2027 · बुधवार फाल्गुन, शुक्ल द्वितीया

फाल्गुन माह 2027 में फुलेरा दूज कब है?

संक्षिप्त उत्तर

फुलेरा दूज 2027 कब है?

फुलेरा दूज 2027 बुधवार, 10 मार्च 2027 को मनाई जाएगी। फुलेरा दूज की तिथि फाल्गुन, शुक्ल द्वितीया है। फुलेरा दूज की पूजा का शुभ मुहूर्त 06:12 – 08:34 तक रहेगा।

दिनांक10 मार्च 2027
तिथिफाल्गुन, शुक्ल द्वितीया
पूजा मुहूर्त06:12 – 08:34
पर्व जानकारी

पर्व सारांश

मुख्य तिथिफाल्गुन, शुक्ल द्वितीया फाल्गुन माह के व्रत-त्यौहार
मुख्य देवता भगवान कृष्ण
वार-देवताभगवान गणेशबुधवार
नक्षत्रउत्तर भाद्रपदशुक्ल
संक्षिप्त परिचय

फुलेरा दूज का महत्व और उत्सव

फुलेरा दूज फाल्गुन, शुक्ल द्वितीया तिथि को मनाया जाने वाला हिंदू पर्व है। इस दिन भगवान कृष्ण की पूजा की जाती है और सुख-समृद्धि एवं रक्षा की प्रार्थना की जाती है।

पंचांग विवरण

त्योहार का पंचांग और शुभ समय

मुख्य पंचांग विवरण

तिथि (सूर्योदय)शुक्ल द्वितीया
नक्षत्रउत्तर भाद्रपद
योगशुक्ल
करणकौलव
ऋतुवसन्तउत्तरायण
संवत्सरसिद्धार्थि
दिशा शूलउत्तरधनिया या तिल खाकर

फुलेरा दूज के दिन पूजा, स्नान और दान का शुभ समय

मुहूर्त / योगसमयउपयोगस्थिति
ब्रह्म मुहूर्त 04:36 – 05:24 स्नान, जप, संकल्प शुभ
प्रातः पूजन 06:12 – 08:34 पूजा और संकल्प श्रेष्ठ
अभिजीत मुहूर्त 11:44 – 12:32 सामान्य शुभ कार्य शुभ
विजय मुहूर्त 16:29 – 17:16 कार्य-सिद्धि, संकल्प शुभ
सन्ध्या पूजन 17:16 – 18:28 दीप, आरती, कथा शुभ
राहु काल (वर्ज्य) 12:08 – 13:37 शुभ कार्य में टालें सावधानी
तिथि शुरू 09 Mar 03:40 PM
ब्रह्म मुहूर्त जप / स्नान 04:36–05:24
प्रातः पूजा मुख्य संकल्प 06:12–08:34
अभिजीत शुभ मुहूर्त 11:44 – 12:32
तिथि समाप्त 10 Mar 03:52 PM
सन्ध्या पूजन दीप, आरती 17:16–18:28

समय वाराणसी के सूर्योदय/सूर्यास्त पर आधारित हैं; स्थान अनुसार थोड़ा अंतर संभव है।

पर्व विवरण

फुलेरा दूज — महत्व, कथा और परंपरा

फाल्गुन माह की द्वितीया को मनाई जाने वाली फुलेरा दूज को होली के आगमन का शुभ संकेत माना जाता है। इसी दिन से कृष्ण मंदिरों में फाल्गुन के रंग चढ़ने लगते हैं और वातावरण में होली की उमंग साफ महसूस होने लगती है। फुलेरा दूज के बाद ही होली की तैयारियां विधिवत शुरू हो जाती हैं। इस पर्व पर फूलों से सुंदर रंगोलियां बनाई जाती हैं और विशेष रूप से श्री राधा-कृष्ण का फूलों से मनोहारी श्रृंगार कर उनकी पूजा की जाती है। मंदिरों और घरों में भक्ति और उल्लास का अनोखा संगम देखने को मिलता है। भगवान कृष्ण को अर्पित करने के लिए विशेष भोग तैयार किए जाते हैं, जिनमें पोहा और अन्य पारंपरिक व्यंजन शामिल होते हैं। ‘फुलेरा’ शब्द का अर्थ ही फूलों की प्रचुरता से है, जो इस दिन की प्रमुख विशेषता को दर्शाता है। मान्यता है कि इस दिन भगवान कृष्ण फूलों के साथ होली खेलते हैं और इसी के साथ होली उत्सव की शुरुआत मानी जाती है।

 
 
विश्वसनीयता एवं प्रामाणिकता

फुलेरा दूज की तिथि कैसे निर्धारित हुई?

पंचांग-सत्यापित
पंचांग तिथिफाल्गुन, शुक्ल द्वितीया
गणना का आधारतिथि-आधारित (चंद्र-सौर)
गणना पद्धतिदृक् गणित (Meeus)
संदर्भ स्थानउज्जैन
आराध्य देवभगवान कृष्ण
अंतिम संशोधन28 Mar 2026

तिथि का निर्धारण सूर्योदय के समय प्रचलित तिथि से होता है, और सूर्योदय प्रत्येक नगर में भिन्न होता है — इसलिए स्थान बदलने पर तारीख़ में एक दिन का अंतर संभव है। इसी कारण Bhakti Sarovar पर समय एक राष्ट्रीय औसत नहीं, बल्कि आपके चुने हुए नगर के वास्तविक सूर्योदय के अनुसार गणना किए जाते हैं। पूरी गणना पद्धति पढ़ें →

इस पृष्ठ के योगदानकर्ता
प्रमूल लेखनप्रियंका शर्मा शास्त्रीय सत्यापनचन्द्रभूषण मणि त्रिपाठी दीसंपादकीय समीक्षादीपक शर्मा

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सामान्य प्रश्न

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

2027 में फुलेरा दूज 10 मार्च 2027 (बुधवार) को है।
फुलेरा दूज फाल्गुन, शुक्ल द्वितीया तिथि को मनाया जाने वाला पर्व है।
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अस्वीकरण

इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह केवल सामान्य सूचना हेतु हैं। भक्ति सरोवर इनका समर्थन नहीं करता। जानकारी विभिन्न पंचांग, प्रवचनों, मान्यताओं और धर्मग्रंथों से संग्रहित है। कृपया अपने विवेक का उपयोग करें।