फाल्गुन माह की द्वितीया को मनाई जाने वाली फुलेरा दूज को होली के आगमन का शुभ संकेत माना जाता है। इसी दिन से कृष्ण मंदिरों में फाल्गुन के रंग चढ़ने लगते हैं और वातावरण में होली की उमंग साफ महसूस होने लगती है। फुलेरा दूज के बाद ही होली की तैयारियां विधिवत शुरू हो जाती हैं। इस पर्व पर फूलों से सुंदर रंगोलियां बनाई जाती हैं और विशेष रूप से श्री राधा-कृष्ण का फूलों से मनोहारी श्रृंगार कर उनकी पूजा की जाती है। मंदिरों और घरों में भक्ति और उल्लास का अनोखा संगम देखने को मिलता है। भगवान कृष्ण को अर्पित करने के लिए विशेष भोग तैयार किए जाते हैं, जिनमें पोहा और अन्य पारंपरिक व्यंजन शामिल होते हैं। ‘फुलेरा’ शब्द का अर्थ ही फूलों की प्रचुरता से है, जो इस दिन की प्रमुख विशेषता को दर्शाता है। मान्यता है कि इस दिन भगवान कृष्ण फूलों के साथ होली खेलते हैं और इसी के साथ होली उत्सव की शुरुआत मानी जाती है।