फाल्गुन मास की पूर्णिमा को वसंत पूर्णिमा कहा जाता है और इसी दिन होलिका दहन भी किया जाता है, जिसे सामान्यतः छोटी होली के नाम से जाना जाता है। यह तिथि अत्यंत शुभ मानी जाती है। पूर्णिमा हर महीने आती है, लेकिन फाल्गुन पूर्णिमा का विशेष महत्व होता है क्योंकि इसी दिन होली उत्सव की शुरुआत होती है। इस दिन प्रातः स्नान आदि से निवृत्त होकर भगवान विष्णु की पूजा की जाती है। साथ ही, भगवान विष्णु के चौथे अवतार भगवान नृसिंह की आराधना का भी विधान है, जिससे जीवन में भय और बाधाओं से मुक्ति मिलती है। होलिका पूजन के लिए प्रातःकाल उत्तर या पूर्व दिशा की ओर मुख करके पूजा करनी चाहिए। पूजन से पहले अपने आसपास जल के छींटे देकर स्थान को शुद्ध कर लें। इसके बाद गाय के गोबर से होलिका का निर्माण किया जाता है। पूजा के लिए आवश्यक सामग्री में माला, रोली, गंध, पुष्प, कच्चा सूत, गुड़, साबुत हल्दी, मूंग, बताशे, गुलाल, नारियल, गेहूं की बालियां सहित पांच प्रकार के अनाज और एक लोटा जल अवश्य रखें। पूजा के समय भगवान नृसिंह का स्मरण करते हुए होलिका पर रोली, अक्षत, पुष्प और बताशे अर्पित करें। इसके बाद मौली को होलिका के चारों ओर तीन या सात बार परिक्रमा करते हुए लपेटें। इस प्रकार विधि-विधान से किया गया पूजन जीवन में सुख, समृद्धि और नकारात्मक शक्तियों से रक्षा प्रदान करता है।