प्रत्येक माह की त्रयोदशी तिथि को प्रदोष व्रत रखा जाता है। भगवान शिव की अराधना करने, प्रदोष व्रत और पूजा अर्चना करने से भक्तों के सारे संकट दूर होते हैं। त्रयोदशी तिथि के दिन प्रदोष काल में ही प्रदोष व्रत की पूजा-अर्चना करनी चाहिए, प्रदोष काल वह समय होता है, जब दिन और रात मिलते हैं। मान्यता है कि इस दिन चंद्रमा की पूजा करने से कुंडली में स्थित चंद्रमा की स्थित मजबूत होती है। इस दिन व्रत रखने से व्यक्ति को अच्छा स्वास्थ्य और दीर्घ आयु प्राप्त होती है। प्रदोष व्रत के दिन शिवजी को गंगा जल, अक्षत्, पुष्प, धतूरा, धूप, फल, चंदन, गाय का दूध, भांग आदि अर्पित कर पूजन करना चाहिये।