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पौष विनायक चतुर्थी

31 दिसंबर 2027 · शुक्रवार पौष, शुक्ल चतुर्थी

पौष माह 2027 में विनायक चतुर्थी कब है?

संक्षिप्त उत्तर

पौष विनायक चतुर्थी 2027 कब है?

पौष विनायक चतुर्थी 2027 शुक्रवार, 31 दिसंबर 2027 को मनाई जाएगी। पौष विनायक चतुर्थी की तिथि पौष, शुक्ल चतुर्थी है। पौष विनायक चतुर्थी की पूजा का शुभ मुहूर्त 06:43 – 08:50 तक रहेगा।

दिनांक31 दिसंबर 2027
तिथिपौष, शुक्ल चतुर्थी
पूजा मुहूर्त06:43 – 08:50
पर्व जानकारी

पर्व सारांश

मुख्य तिथिपौष, शुक्ल चतुर्थीपौष माह के व्रत-त्यौहार
मुख्य देवताभगवान गणेश
वार-देवतामाँ लक्ष्मी · माँ संतोषीशुक्रवार
नक्षत्रश्रवणहर्षण
संक्षिप्त परिचय

पौष विनायक चतुर्थी का महत्व और उत्सव

पौष विनायक चतुर्थी पौष, शुक्ल चतुर्थी तिथि को मनाया जाने वाला हिंदू पर्व है। इस दिन भगवान गणेश की पूजा की जाती है और सुख-समृद्धि एवं रक्षा की प्रार्थना की जाती है।

पंचांग विवरण

त्योहार का पंचांग और शुभ समय

मुख्य पंचांग विवरण

तिथि (सूर्योदय)शुक्ल तृतीया
नक्षत्रश्रवण
योगहर्षण
करणगर
ऋतुशिशिरउत्तरायण
संवत्सररौद्र
दिशा शूलपश्चिमजौ या दही खाकर

पौष विनायक चतुर्थी के दिन पूजा, स्नान और दान का शुभ समय

मुहूर्त / योगसमयउपयोगस्थिति
ब्रह्म मुहूर्त 05:07 – 05:55 स्नान, जप, संकल्प शुभ
प्रातः पूजन 06:43 – 08:50 पूजा और संकल्प श्रेष्ठ
अभिजीत मुहूर्त 11:39 – 12:22 सामान्य शुभ कार्य शुभ
विजय मुहूर्त 15:54 – 16:36 कार्य-सिद्धि, संकल्प शुभ
सन्ध्या पूजन 16:31 – 17:43 दीप, आरती, कथा शुभ
राहु काल (वर्ज्य) 10:41 – 12:00 शुभ कार्य में टालें सावधानी
पौष विनायक चतुर्थी प्रारंभ 31 Dec 08:11 AM
ब्रह्म मुहूर्त जप / स्नान 05:07–05:55
प्रातः पूजा मुख्य संकल्प 06:43–08:50
अभिजीत शुभ मुहूर्त 11:39 – 12:22
पौष विनायक चतुर्थी समापन 01 Dec 10:55 AM
सन्ध्या पूजन दीप, आरती 16:31–17:43

समय वाराणसी के सूर्योदय/सूर्यास्त पर आधारित हैं; स्थान अनुसार थोड़ा अंतर संभव है।

पर्व विवरण

पौष विनायक चतुर्थी — महत्व, कथा और परंपरा

पौषमास हिंदूपंचांग का दसवाँ महीना है; हेमंत ऋतु की ठिठुरन अपने चरम पर रहती है और गंगा‑स्नान, तिल‑दान तथा सूर्य‑उपासना को विशेष पुण्यदायी माना जाता है। इसी महीने की शुक्लपक्ष की चतुर्थीपौषविनायकचतुर्थी’ कहलाती है, जबकि पूर्णिमा के बाद वाली कृष्णपक्ष की चतुर्थीसंकष्टीचतुर्थी’ कही जाती है। विनायकचतुर्थी पर श्रीगणेश की आराधना दो बार—दोपहर तथा मध्याह्न—की जाती है। जनविश्वास है कि इस दिन व्रत रखने से बाधाएँ कटती हैं और सभी कार्य सफल होते हैं। पूजाविधि सरल है: ब्रह्ममुहूर्त में स्नान कर संकल्प लें, दोपहर में गणेशजी को दूर्वा अर्पित करें, 21 लड्डुओं का नैवेद्य चढ़ाएँ औरगंगणपतयेनमः’ मंत्र की एक माला जपें। कहा जाता है कि गजानन का आशीष साधक को बल, बुद्धि और सफलता तीनों प्रदान करता है।

विश्वसनीयता एवं प्रामाणिकता

पौष विनायक चतुर्थी की तिथि कैसे निर्धारित हुई?

पंचांग-सत्यापित
पंचांग तिथिपौष, शुक्ल चतुर्थी
गणना का आधारतिथि-आधारित (चंद्र-सौर)
गणना पद्धतिदृक् गणित (Meeus)
संदर्भ स्थानउज्जैन
आराध्य देवभगवान गणेश
अंतिम संशोधन08 Apr 2026

तिथि का निर्धारण सूर्योदय के समय प्रचलित तिथि से होता है, और सूर्योदय प्रत्येक नगर में भिन्न होता है — इसलिए स्थान बदलने पर तारीख़ में एक दिन का अंतर संभव है। इसी कारण Bhakti Sarovar पर समय एक राष्ट्रीय औसत नहीं, बल्कि आपके चुने हुए नगर के वास्तविक सूर्योदय के अनुसार गणना किए जाते हैं। पूरी गणना पद्धति पढ़ें →

इस पृष्ठ के योगदानकर्ता
प्रमूल लेखनप्रियंका शर्मा शास्त्रीय सत्यापनचन्द्रभूषण मणि त्रिपाठी दीसंपादकीय समीक्षादीपक शर्मा

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सामान्य प्रश्न

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

2027 में पौष विनायक चतुर्थी 31 दिसंबर 2027 (शुक्रवार) को है।
पौष विनायक चतुर्थी पौष, शुक्ल चतुर्थी तिथि को मनाया जाने वाला पर्व है।
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अस्वीकरण

इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह केवल सामान्य सूचना हेतु हैं। भक्ति सरोवर इनका समर्थन नहीं करता। जानकारी विभिन्न पंचांग, प्रवचनों, मान्यताओं और धर्मग्रंथों से संग्रहित है। कृपया अपने विवेक का उपयोग करें।