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पौष शनि त्रयोदशी

25 दिसंबर 2027 · शनिवार पौष, कृष्ण त्रयोदशी

पौष माह 2027 में शनि त्रयोदशी कब है?

संक्षिप्त उत्तर

पौष शनि त्रयोदशी 2027 कब है?

पौष शनि त्रयोदशी 2027 शनिवार, 25 दिसंबर 2027 को मनाई जाएगी। पौष शनि त्रयोदशी की तिथि पौष, कृष्ण त्रयोदशी है। पौष शनि त्रयोदशी की पूजा का शुभ मुहूर्त 06:41 – 08:47 तक रहेगा।

दिनांक25 दिसंबर 2027
तिथिपौष, कृष्ण त्रयोदशी
पूजा मुहूर्त06:41 – 08:47
पर्व जानकारी

पर्व सारांश

मुख्य तिथिपौष, कृष्ण त्रयोदशीपौष माह के व्रत-त्यौहार
मुख्य देवताभगवान शिव और शनिदेव
वार-देवताशनि देवशनिवार
नक्षत्रअनुराधाधृति
संक्षिप्त परिचय

पौष शनि त्रयोदशी का महत्व और उत्सव

पौष शनि त्रयोदशी पौष, कृष्ण त्रयोदशी तिथि को मनाया जाने वाला हिंदू पर्व है। इस दिन भगवान शिव और शनिदेव की पूजा की जाती है और सुख-समृद्धि एवं रक्षा की प्रार्थना की जाती है।

पंचांग विवरण

त्योहार का पंचांग और शुभ समय

मुख्य पंचांग विवरण

तिथि (सूर्योदय)कृष्ण त्रयोदशी
नक्षत्रअनुराधा
योगधृति
करणगर
ऋतुशिशिरउत्तरायण
संवत्सररौद्र
दिशा शूलपूर्वअदरक या तिल खाकर

पौष शनि त्रयोदशी के दिन पूजा, स्नान और दान का शुभ समय

मुहूर्त / योगसमयउपयोगस्थिति
ब्रह्म मुहूर्त 05:05 – 05:53 स्नान, जप, संकल्प शुभ
प्रातः पूजन 06:41 – 08:47 पूजा और संकल्प श्रेष्ठ
अभिजीत मुहूर्त 11:36 – 12:19 सामान्य शुभ कार्य शुभ
विजय मुहूर्त 15:50 – 16:32 कार्य-सिद्धि, संकल्प शुभ
सन्ध्या पूजन 16:27 – 17:39 दीप, आरती, कथा शुभ
राहु काल (वर्ज्य) 09:19 – 10:38 शुभ कार्य में टालें सावधानी
तिथि शुरू 24 Dec 11:08 PM
ब्रह्म मुहूर्त जप / स्नान 05:05–05:53
प्रातः पूजा मुख्य संकल्प 06:41–08:47
अभिजीत शुभ मुहूर्त 11:36 – 12:19
तिथि समाप्त 25 Dec 11:31 PM
सन्ध्या पूजन दीप, आरती 16:27–17:39

समय वाराणसी के सूर्योदय/सूर्यास्त पर आधारित हैं; स्थान अनुसार थोड़ा अंतर संभव है।

पर्व विवरण

पौष शनि त्रयोदशी — महत्व, कथा और परंपरा

पौष मास की कृष्ण पक्ष त्रयोदशी को रखा जाने वाला शनि प्रदोष व्रत भगवान शिव और न्याय के देवता शनिदेव, दोनों का आशीर्वाद पाने का परम अवसर माना जाता है। हिम‑ऋतु का यह पौष महीना सूर्य के उत्तरायण होने की तैयारी का भी संकेत देता है; ऐसे समय प्रदोष‑काल में की गई शिव‑आराधना को शीघ्र फलदायी कहा गया है। शास्त्र निर्देश देते हैं कि जो साधक 11 निरंतर शनि प्रदोष अथवा पूरे वर्ष की सभी त्रयोदशियों पर व्रत रखता है, उसकी रुकी हुई योजनाएँ तेजी से पूर्ण होती हैं और साढ़ेसाती‑ढैय्या का प्रभाव क्षीण हो जाता है। उपवास के साथ बिल्वपत्र, काले तिल, तिल के तेल का दीप तथा नीले फूल अर्पित कर महादेव की पूजा की जाती है। संध्या पश्चात प्रदोष‑कथा श्रवण और दान‑पुण्य करने से सर्वकार्य‑सिद्धि का वरदान मिलता है।

विश्वसनीयता एवं प्रामाणिकता

पौष शनि त्रयोदशी की तिथि कैसे निर्धारित हुई?

पंचांग-सत्यापित
पंचांग तिथिपौष, कृष्ण त्रयोदशी
गणना का आधारतिथि-आधारित (चंद्र-सौर)
गणना पद्धतिदृक् गणित (Meeus)
संदर्भ स्थानउज्जैन
आराध्य देवभगवान शिव और शनिदेव
अंतिम संशोधन18 Apr 2026

तिथि का निर्धारण सूर्योदय के समय प्रचलित तिथि से होता है, और सूर्योदय प्रत्येक नगर में भिन्न होता है — इसलिए स्थान बदलने पर तारीख़ में एक दिन का अंतर संभव है। इसी कारण Bhakti Sarovar पर समय एक राष्ट्रीय औसत नहीं, बल्कि आपके चुने हुए नगर के वास्तविक सूर्योदय के अनुसार गणना किए जाते हैं। पूरी गणना पद्धति पढ़ें →

इस पृष्ठ के योगदानकर्ता
प्रमूल लेखनप्रियंका शर्मा शास्त्रीय सत्यापनचन्द्रभूषण मणि त्रिपाठी दीसंपादकीय समीक्षादीपक शर्मा

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सामान्य प्रश्न

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

2027 में पौष शनि त्रयोदशी 25 दिसंबर 2027 (शनिवार) को है।
पौष शनि त्रयोदशी पौष, कृष्ण त्रयोदशी तिथि को मनाया जाने वाला पर्व है।
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अस्वीकरण

इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह केवल सामान्य सूचना हेतु हैं। भक्ति सरोवर इनका समर्थन नहीं करता। जानकारी विभिन्न पंचांग, प्रवचनों, मान्यताओं और धर्मग्रंथों से संग्रहित है। कृपया अपने विवेक का उपयोग करें।