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पौष चन्द्र दर्शन

9 जनवरी 2027 · शनिवार पौष, शुक्ल द्वितीया

पौष माह 2027 में चन्द्र दर्शन कब है?

संक्षिप्त उत्तर

पौष चन्द्र दर्शन 2027 कब है?

पौष चन्द्र दर्शन 2027 शनिवार, 9 जनवरी 2027 को मनाई जाएगी। पौष चन्द्र दर्शन की तिथि पौष, शुक्ल द्वितीया है। पौष चन्द्र दर्शन की पूजा का शुभ मुहूर्त 06:45 – 08:53 तक रहेगा।

दिनांक9 जनवरी 2027
तिथिपौष, शुक्ल द्वितीया
पूजा मुहूर्त06:45 – 08:53
पर्व जानकारी

पर्व सारांश

मुख्य तिथिपौष, शुक्ल द्वितीयापौष माह के व्रत-त्यौहार
मुख्य देवताभगवान चंद्रदेव
वार-देवताशनि देवशनिवार
नक्षत्रउत्तराषाढ़ाहर्षण
संक्षिप्त परिचय

पौष चन्द्र दर्शन का महत्व और उत्सव

पौष चन्द्र दर्शन पौष, शुक्ल द्वितीया तिथि को मनाया जाने वाला हिंदू पर्व है। इस दिन भगवान चंद्रदेव की पूजा की जाती है और सुख-समृद्धि एवं रक्षा की प्रार्थना की जाती है।

पंचांग विवरण

त्योहार का पंचांग और शुभ समय

मुख्य पंचांग विवरण

तिथि (सूर्योदय)शुक्ल द्वितीया
नक्षत्रउत्तराषाढ़ा
योगहर्षण
करणबालव
ऋतुशिशिरउत्तरायण
संवत्सरसिद्धार्थि
दिशा शूलपूर्वअदरक या तिल खाकर

पौष चन्द्र दर्शन के दिन पूजा, स्नान और दान का शुभ समय

मुहूर्त / योगसमयउपयोगस्थिति
ब्रह्म मुहूर्त 05:09 – 05:57 स्नान, जप, संकल्प शुभ
प्रातः पूजन 06:45 – 08:53 पूजा और संकल्प श्रेष्ठ
अभिजीत मुहूर्त 11:43 – 12:26 सामान्य शुभ कार्य शुभ
विजय मुहूर्त 15:59 – 16:42 कार्य-सिद्धि, संकल्प शुभ
सन्ध्या पूजन 16:37 – 17:49 दीप, आरती, कथा शुभ
राहु काल (वर्ज्य) 09:25 – 10:45 शुभ कार्य में टालें सावधानी
तिथि शुरू 09 Jan 05:41 PM
ब्रह्म मुहूर्त जप / स्नान 05:09–05:57
प्रातः पूजा मुख्य संकल्प 06:45–08:53
अभिजीत शुभ मुहूर्त 11:43 – 12:26
तिथि समाप्त 09 Jan 06:58 PM
सन्ध्या पूजन दीप, आरती 16:37–17:49

समय वाराणसी के सूर्योदय/सूर्यास्त पर आधारित हैं; स्थान अनुसार थोड़ा अंतर संभव है।

पर्व विवरण

पौष चन्द्र दर्शन — महत्व, कथा और परंपरा

हेमंतऋतु की कड़कड़ाती ठंड लिएपौषमास में, अमावस्या के बाद जब पहली बार पतली चाँदीसी कलिका आकाश पर उभरती है, वही क्षण ‘पौषचन्द्रदर्शन’ कहलाता है। शास्त्रों के अनुसार चन्द्रदेव मन, बुद्धि और स्मृति के अधिपति हैं; इसलिए सूर्यास्त के तुरन्त बाद पश्चिमी क्षितिज पर दिखने वाली इस रेखा का दर्शन कर उपवास तोड़ना विशेष पुण्यदायी है। पूजा विधि सरल है: शांत चित्त से “ॐचंचन्द्रायनमः” का 108बार जप करें, फिर ताम्रपात्र में दुग्ध, चंदन और सफेद पुष्प अर्पित करके चन्द्रदेव को अर्घ्य दें। जिन कुण्डलियों में नीच या पीड़ित चन्द्रमा मानसिक अस्थिरता, स्मृतिदोष या पारिवारिक कलह पैदा करता हो, उनके लिए यह दिन ग्रहदोष शमन का श्रेष्ठ अवसर है। सम्पूर्ण पौष जहाँ सूर्यउपासना के लिए प्रसिद्ध है, वहीं यह एक तिथि चित्त को चाँदनीसी निर्मल बनाकर संतुलन और सौम्यता का वरदान भी देती है।

विश्वसनीयता एवं प्रामाणिकता

पौष चन्द्र दर्शन की तिथि कैसे निर्धारित हुई?

पंचांग-सत्यापित
पंचांग तिथिपौष, शुक्ल द्वितीया
गणना का आधारतिथि-आधारित (चंद्र-सौर)
गणना पद्धतिदृक् गणित (Meeus)
संदर्भ स्थानउज्जैन
आराध्य देवभगवान चंद्रदेव
अंतिम संशोधन18 Apr 2026

तिथि का निर्धारण सूर्योदय के समय प्रचलित तिथि से होता है, और सूर्योदय प्रत्येक नगर में भिन्न होता है — इसलिए स्थान बदलने पर तारीख़ में एक दिन का अंतर संभव है। इसी कारण Bhakti Sarovar पर समय एक राष्ट्रीय औसत नहीं, बल्कि आपके चुने हुए नगर के वास्तविक सूर्योदय के अनुसार गणना किए जाते हैं। पूरी गणना पद्धति पढ़ें →

इस पृष्ठ के योगदानकर्ता
प्रमूल लेखनप्रियंका शर्मा शास्त्रीय सत्यापनचन्द्रभूषण मणि त्रिपाठी दीसंपादकीय समीक्षादीपक शर्मा

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सामान्य प्रश्न

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

2027 में पौष चन्द्र दर्शन 9 जनवरी 2027 (शनिवार) को है।
पौष चन्द्र दर्शन पौष, शुक्ल द्वितीया तिथि को मनाया जाने वाला पर्व है।
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अस्वीकरण

इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह केवल सामान्य सूचना हेतु हैं। भक्ति सरोवर इनका समर्थन नहीं करता। जानकारी विभिन्न पंचांग, प्रवचनों, मान्यताओं और धर्मग्रंथों से संग्रहित है। कृपया अपने विवेक का उपयोग करें।