फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि को नरसिंह द्वादशी के रूप में मनाया जाता है। भगवान विष्णु के प्रमुख अवतारों में से एक, नरसिंह अवतार का इस दिन विशेष महत्व है। इस अवतार में भगवान श्रीहरि विष्णु ने आधे मनुष्य और आधे सिंह का रूप धारण कर अत्याचारी दैत्यराज हिरण्यकशिपु का वध किया था और धर्म की रक्षा की थी। इस दिन घर के मुख्य द्वार तथा अन्य दरवाजों पर रोली से तिलक लगाना शुभ माना जाता है। साथ ही, भगवान विष्णु का स्मरण करते हुए उनके द्वारा जीवन में प्रदान की गई कृपा के लिए कृतज्ञता व्यक्त करनी चाहिए। यह दिन भक्ति और आस्था के साथ भगवान का आभार प्रकट करने का भी अवसर है। नरसिंह द्वादशी का व्रत करने से मनुष्य को सांसारिक सुखों के साथ-साथ मोक्ष की प्राप्ति भी होती है। इस दिन “ॐ वज्रनखाय विद्महे तीक्ष्ण दंष्ट्राय धीमहि तन्नो नृसिंह प्रचोदयात” मंत्र का जप करना अत्यंत फलदायक माना गया है, जिससे भय, बाधाएं और नकारात्मक शक्तियाँ दूर होती हैं तथा जीवन में साहस और संरक्षण का आशीर्वाद मिलता है।