सावन शुक्ल पंचमी को मनाई जाने वाली नाग पंचमी सर्प-पूजन का प्रमुख पर्व है। इस दिन अनन्त, वासुकि, पद्म, महापद्म, तक्षक, कुलीर, कर्कट और शंख—इन अष्टनागों की विशेष आराधना की जाती है। परंपरा के अनुसार धरती की खुदाई व ग्राम्य कर्म रोके जाते हैं, ताकि सर्पों का आवास बाधित न हो। पूजा के लिये नागदेव का चित्र या मिट्टी-धातु की प्रतिमा स्थापित कर दूध, खील-धान, दूब-दूर्वा और पुष्प अर्पित किए जाते हैं; कहीं-कहीं नागबेल के पत्ते भी समर्पित किए जाते हैं। भविष्य पुराण की कथा बताती है कि इसी तिथि पर आस्तिक मुनि ने जनमेजय के यज्ञ को रोककर नागों को यज्ञाग्नि से बचाया था, तब शीतल दूध से उनका स्नान कराकर शांति प्रदान की गई थी। माना जाता है कि इस दिन सर्प-पूजन करने से कालभय दूर रहता है और परिवार पर सदा रक्षा-कवच बना रहता है।