मेष संक्रांति वह पावन तिथि है जब सूर्य मीन राशि से निकलकर मेष राशि में प्रवेश करते हैं। इसी के साथ सौर वैसाख मास का आरंभ होता है और सूर्य की उत्तरायण यात्रा का आधा चरण पूर्ण माना जाता है। यह काल ऋतु परिवर्तन और नई ऊर्जा का संकेत देता है, जब प्रकृति में स्थिरता और गति दोनों का संतुलन दिखाई देता है। भारत के विभिन्न क्षेत्रों में मेष संक्रांति अलग-अलग नामों से मनाई जाती है। बिहार में इसे सतुआनी, ओडिशा में पना संक्रांति, तमिलनाडु में पुथांडु, पश्चिम बंगाल में पोइला बैसाख, असम में बोहाग बिहू, पंजाब में वैसाख और केरल में विशु कहा जाता है। कई स्थानों पर यह नववर्ष के रूप में भी मनाई जाती है। इस दिन प्रातः सूर्योदय के समय सूर्यदेव को अर्घ्य देना, गायत्री मंत्र का जप करना, दान-पुण्य और पवित्र नदियों में स्नान करना विशेष फलदायी माना गया है। यह तिथि शुद्धि, कृतज्ञता और नवआरंभ का प्रतीक है।