मासिक शिवरात्रि — महत्व, कथा और परंपरा
भाद्रपद कृष्ण चतुर्दशी की मासिक शिवरात्रि वर्षा थमने के बाद लहलहाते धान के खेतों और गणेश-चतुर्थी की आस जगाती हवा में मनायी जाती है। भक्त प्रातः स्नान कर सफेद या बिल्व-हरित वस्त्र पहनते और “ॐ नमः शिवाय” जपते हुए व्रत का संकल्प लेते हैं। शिवलिंग पर जल, दूध, दही, मधु व घृत से अभिषेक कर बिल्व-पत्र, आक-पुष्प तथा धतूरा अर्पित किया जाता है। दिनभर उपवास रखा जाता है; रात्रि-जागरण में महामृत्युंजय या रुद्राष्टक का पाठ करते हैं। भोर में गंगाजल-आचमन के बाद फल-मिश्रित पंचामृत से व्रत पारण होता है। जन-विश्वास है कि यह शिवरात्रि पाप-क्षय, उत्तम आरोग्य, मानसिक दृढ़ता और परिवार में सौहार्द को विशेष बल देती है।