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मार्गशीर्ष चन्द्र दर्शन

10 दिसंबर 2026 · बृहस्पतिवार मार्गशीर्ष, शुक्ल प्रतिपदा

मार्गशीर्ष माह 2026 में चन्द्र दर्शन कब है?

संक्षिप्त उत्तर

मार्गशीर्ष चन्द्र दर्शन 2026 कब है?

मार्गशीर्ष चन्द्र दर्शन 2026 बृहस्पतिवार, 10 दिसंबर 2026 को मनाई जाएगी। मार्गशीर्ष चन्द्र दर्शन की तिथि मार्गशीर्ष, शुक्ल प्रतिपदा है। मार्गशीर्ष चन्द्र दर्शन की पूजा का शुभ मुहूर्त 06:33 – 08:40 तक रहेगा।

दिनांक10 दिसंबर 2026
तिथिमार्गशीर्ष, शुक्ल प्रतिपदा
पूजा मुहूर्त06:33 – 08:40
पर्व जानकारी

पर्व सारांश

मुख्य तिथिमार्गशीर्ष, शुक्ल प्रतिपदामार्गशीर्ष - अगहन माह के व्रत-त्यौहार
वार-देवताभगवान विष्णुबृहस्पतिवार
नक्षत्रमूलशूल
संक्षिप्त परिचय

मार्गशीर्ष चन्द्र दर्शन का महत्व और उत्सव

मार्गशीर्ष चन्द्र दर्शन मार्गशीर्ष, शुक्ल प्रतिपदा तिथि को मनाया जाने वाला हिंदू पर्व है।

पंचांग विवरण

त्योहार का पंचांग और शुभ समय

मुख्य पंचांग विवरण

तिथि (सूर्योदय)शुक्ल प्रतिपदा
नक्षत्रमूल
योगशूल
करणबव
ऋतुहेमन्तदक्षिणायन
संवत्सरसिद्धार्थि
दिशा शूलदक्षिणदही खाकर

मार्गशीर्ष चन्द्र दर्शन के दिन पूजा, स्नान और दान का शुभ समय

मुहूर्त / योगसमयउपयोगस्थिति
ब्रह्म मुहूर्त 04:57 – 05:45 स्नान, जप, संकल्प शुभ
प्रातः पूजन 06:33 – 08:40 पूजा और संकल्प श्रेष्ठ
अभिजीत मुहूर्त 11:29 – 12:12 सामान्य शुभ कार्य शुभ
विजय मुहूर्त 15:44 – 16:26 कार्य-सिद्धि, संकल्प शुभ
सन्ध्या पूजन 16:21 – 17:33 दीप, आरती, कथा शुभ
राहु काल (वर्ज्य) 13:10 – 14:29 शुभ कार्य में टालें सावधानी
तिथि शुरू 10 Dec 05:25 PM
ब्रह्म मुहूर्त जप / स्नान 04:57–05:45
प्रातः पूजा मुख्य संकल्प 06:33–08:40
अभिजीत शुभ मुहूर्त 11:29 – 12:12
तिथि समाप्त 10 Dec 06:16 PM
सन्ध्या पूजन दीप, आरती 16:21–17:33

समय वाराणसी के सूर्योदय/सूर्यास्त पर आधारित हैं; स्थान अनुसार थोड़ा अंतर संभव है।

पर्व विवरण

मार्गशीर्ष चन्द्र दर्शन — महत्व, कथा और परंपरा

अमावस्या के बाद जब पहली बार पतली-सी चाँद की रेखा झलकती है, वही क्षण चन्द्र-दर्शन कहलाता है। शास्त्र कहते हैं कि सूर्यास्त के तुरंत बाद पश्चिमी क्षितिज पर इस नव-चन्द्रमा को देखना बुद्धि, सौभाग्य और आरोग्य का वरदान देता है। उसी समय “ॐ क्षीरपुत्राय विद्महे अमृततत्त्वाय धीमहि तन्नो चन्द्रः प्रचोदयात्” मंत्र जगप कर जल से अर्घ्य अर्पित करने की परम्परा है। यदि यह दर्शन मार्गशीर्ष, अर्थात अगहन मास में हो, तो इसका पुण्य द्विगुणित माना गया है। यह वर्ष का नवां महीना है; गीता में श्रीकृष्ण ने कहा है, “मासानां मार्गशीर्षोऽहम्।” खेतों में नई धान-मेड़ स्वर्णिम होने लगती है, हवा में हल्की ठंडक घुल जाती है और अन्नकूट एवं गीता-जयन्ती जैसे उत्सव आरम्भ होते हैं। ऐसे पुण्यकाल में चन्द्र-दर्शन मन में नवीन ऊर्जा और आशा भर देता है।

विश्वसनीयता एवं प्रामाणिकता

मार्गशीर्ष चन्द्र दर्शन की तिथि कैसे निर्धारित हुई?

पंचांग-सत्यापित
पंचांग तिथिमार्गशीर्ष, शुक्ल प्रतिपदा
गणना का आधारतिथि-आधारित (चंद्र-सौर)
गणना पद्धतिदृक् गणित (Meeus)
संदर्भ स्थानउज्जैन
अंतिम संशोधन19 Apr 2026

तिथि का निर्धारण सूर्योदय के समय प्रचलित तिथि से होता है, और सूर्योदय प्रत्येक नगर में भिन्न होता है — इसलिए स्थान बदलने पर तारीख़ में एक दिन का अंतर संभव है। इसी कारण Bhakti Sarovar पर समय एक राष्ट्रीय औसत नहीं, बल्कि आपके चुने हुए नगर के वास्तविक सूर्योदय के अनुसार गणना किए जाते हैं। पूरी गणना पद्धति पढ़ें →

इस पृष्ठ के योगदानकर्ता
प्रमूल लेखनप्रियंका शर्मा शास्त्रीय सत्यापनचन्द्रभूषण मणि त्रिपाठी दीसंपादकीय समीक्षादीपक शर्मा

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सामान्य प्रश्न

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

2026 में मार्गशीर्ष चन्द्र दर्शन 10 दिसंबर 2026 (बृहस्पतिवार) को है।
मार्गशीर्ष चन्द्र दर्शन मार्गशीर्ष, शुक्ल प्रतिपदा तिथि को मनाया जाने वाला पर्व है।
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अस्वीकरण

इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह केवल सामान्य सूचना हेतु हैं। भक्ति सरोवर इनका समर्थन नहीं करता। जानकारी विभिन्न पंचांग, प्रवचनों, मान्यताओं और धर्मग्रंथों से संग्रहित है। कृपया अपने विवेक का उपयोग करें।