अगहन मास की अमावस्या, जिसे मार्गशीर्ष अमावस्या भी कहते हैं, हिन्दू परम्परा में अतिपुण्यदायी मानी गई है। मान्यता है कि श्रीकृष्ण ने इसी मास में अर्जुन को गीता का ज्ञान दिया; इसलिए इस तिथि पर किया गया जप-तप कई गुना फल देता है। सुबह के समय गंगा स्नान या निकटतम पवित्र सरोवर में डुबकी लगाकर आचमन करें—कहते हैं इससे जन्म-कुण्डली के दोष शान्त होते हैं। घर लौटकर पीपल की जड़ में लक्ष्मी-नारायण की स्थापना करें, दूध-जल और तिल चढ़ाएँ तथा दीपक जलाएँ। देव-आराधना के बाद किसी ज़रुरतमंद को अन्न-वस्त्र दान करें और दिन-भर घर में मौन, शान्त वातावरण बनाए रखें; इससे कलह-क्लेश दूर रहता है और वर्ष भर के लिए सुख-समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है।