महावीर स्वामी जयंती जैन धर्म के चौबीसवें तीर्थंकर भगवान महावीर के जन्मदिवस के रूप में मनाई जाती है। चैत्र मास में बिहार की धरती पर उनका जन्म हुआ था। चैत्र का महीना वसंत ऋतु का प्रतीक है, जो शुद्धता, संयम और नवचिंतन का भाव लेकर आता है। इसी पावन समय में भगवान महावीर के जीवन और उपदेशों का स्मरण विशेष महत्व रखता है। भगवान महावीर, भगवान श्रीआदिनाथ की परंपरा में अंतिम तीर्थंकर माने जाते हैं। उन्होंने “अहिंसा परमो धर्म” का संदेश देकर संसार को करुणा और सहअस्तित्व का मार्ग दिखाया। उनका “जियो और जीने दो” का सिद्धांत आज भी उतना ही प्रासंगिक है। उन्होंने अपने अनुयायियों को अहिंसा, सत्य, अचौर्य, ब्रह्मचर्य और अपरिग्रह का पालन करने की शिक्षा दी। महावीर स्वामी को वीर, अतिवीर और सन्मति जैसे नामों से भी जाना जाता है। उनके उपदेश मन की शांति और जीवन में संतुलन प्रदान करते हैं।