महानवमी / आयुध पूजा — महत्व, कथा और परंपरा
महानवमी नवरात्रि का पूर्ण बिन्दु है, जब देवी सिद्धिदात्री की अर्चना होती है। शास्त्रों में कहा गया है कि शक्ति कन्या‑रूप से नौ दिनों तक भ्रमण करती हैं; अतः इस दिन कन्या‑पूजन अनिवार्य है। गृहिणियाँ नौ वर्ष से छोटी बालिकाओं को आमंत्रित कर उनके चरण धोती हैं, काले चने, हलुए‑पूरी और केसरयुक्त दूध से तृप्त करती हैं तथा दक्षिणा प्रदान करती हैं। विश्वास है कि इन बालिकाओं में देवी स्वयं निवास करती हैं, जिससे साधक को सिद्धि, आयु और सौभाग्य प्राप्त होता है। दक्षिण के प्रदेशों में यही तिथि आयुध‑पूजा कहलाती है, जहाँ अस्त्र‑शस्त्र, कृषि‑यंत्र, शिल्प‑साधन और वाद्य आदि को स्वच्छ कर हल्दी, कुमकुम, पुष्प और दीप से अभिषिक्त किया जाता है, ताकि कर्म के ये सहायक साधन कल्याणकारी तथा निर्बाध हों।