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महानवमी / आयुध पूजा

19 अक्टूबर 2026 · सोमवार आश्विन, शुक्ल नवमी

आश्विन माह 2026 में महानवमी / आयुध पूजा कब है?

संक्षिप्त उत्तर

महानवमी / आयुध पूजा 2026 कब है?

महानवमी / आयुध पूजा 2026 सोमवार, 19 अक्टूबर 2026 को मनाई जाएगी। महानवमी / आयुध पूजा की तिथि आश्विन, शुक्ल नवमी है। महानवमी / आयुध पूजा की पूजा का शुभ मुहूर्त 05:59 – 08:16 तक रहेगा।

दिनांक19 अक्टूबर 2026
तिथिआश्विन, शुक्ल नवमी
पूजा मुहूर्त05:59 – 08:16
पर्व जानकारी

पर्व सारांश

मुख्य तिथिआश्विन, शुक्ल नवमीआश्विन माह के व्रत-त्यौहार
मुख्य देवतादेवी सिद्धिदात्री
वार-देवताशिव जीसोमवार
नक्षत्रउत्तराषाढ़ाधृति
संक्षिप्त परिचय

महानवमी / आयुध पूजा का महत्व और उत्सव

महानवमी / आयुध पूजा आश्विन, शुक्ल नवमी तिथि को मनाया जाने वाला हिंदू पर्व है। इस दिन देवी सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है और सुख-समृद्धि एवं रक्षा की प्रार्थना की जाती है।

पंचांग विवरण

त्योहार का पंचांग और शुभ समय

मुख्य पंचांग विवरण

तिथि (सूर्योदय)शुक्ल अष्टमी
नक्षत्रउत्तराषाढ़ा
योगधृति
करणबव
ऋतुशरददक्षिणायन
संवत्सरसिद्धार्थि
दिशा शूलपूर्वदर्पण देखकर या दूध पीकर

महानवमी / आयुध पूजा के दिन पूजा, स्नान और दान का शुभ समय

मुहूर्त / योगसमयउपयोगस्थिति
ब्रह्म मुहूर्त 04:23 – 05:11 स्नान, जप, संकल्प शुभ
प्रातः पूजन 05:59 – 08:16 पूजा और संकल्प श्रेष्ठ
अभिजीत मुहूर्त 11:20 – 12:05 सामान्य शुभ कार्य शुभ
विजय मुहूर्त 15:55 – 16:41 कार्य-सिद्धि, संकल्प शुभ
सन्ध्या पूजन 16:39 – 17:51 दीप, आरती, कथा शुभ
राहु काल (वर्ज्य) 07:24 – 08:50 शुभ कार्य में टालें सावधानी
तिथि शुरू 19 Oct 10:51 AM
ब्रह्म मुहूर्त जप / स्नान 04:23–05:11
प्रातः पूजा मुख्य संकल्प 05:59–08:16
अभिजीत शुभ मुहूर्त 11:20 – 12:05
तिथि समाप्त 20 Oct 12:50 PM
सन्ध्या पूजन दीप, आरती 16:39–17:51

समय वाराणसी के सूर्योदय/सूर्यास्त पर आधारित हैं; स्थान अनुसार थोड़ा अंतर संभव है।

पर्व विवरण

महानवमी / आयुध पूजा — महत्व, कथा और परंपरा

महानवमी नवरात्रि का पूर्ण बिन्दु है, जब देवी सिद्धिदात्री की अर्चना होती है। शास्त्रों में कहा गया है कि शक्ति कन्यारूप से नौ दिनों तक भ्रमण करती हैं; अतः इस दिन कन्यापूजन अनिवार्य है। गृहिणियाँ नौ वर्ष से छोटी बालिकाओं को आमंत्रित कर उनके चरण धोती हैं, काले चने, हलुएपूरी और केसरयुक्त दूध से तृप्त करती हैं तथा दक्षिणा प्रदान करती हैं। विश्वास है कि इन बालिकाओं में देवी स्वयं निवास करती हैं, जिससे साधक को सिद्धि, आयु और सौभाग्य प्राप्त होता है। दक्षिण के प्रदेशों में यही तिथि आयुधपूजा कहलाती है, जहाँ अस्त्रशस्त्र, कृषियंत्र, शिल्पसाधन और वाद्य आदि को स्वच्छ कर हल्दी, कुमकुम, पुष्प और दीप से अभिषिक्त किया जाता है, ताकि कर्म के ये सहायक साधन कल्याणकारी तथा निर्बाध हों।

विश्वसनीयता एवं प्रामाणिकता

महानवमी / आयुध पूजा की तिथि कैसे निर्धारित हुई?

पंचांग-सत्यापित
पंचांग तिथिआश्विन, शुक्ल नवमी
गणना का आधारतिथि-आधारित (चंद्र-सौर)
गणना पद्धतिदृक् गणित (Meeus)
संदर्भ स्थानउज्जैन
आराध्य देवदेवी सिद्धिदात्री
अंतिम संशोधन21 Apr 2026

तिथि का निर्धारण सूर्योदय के समय प्रचलित तिथि से होता है, और सूर्योदय प्रत्येक नगर में भिन्न होता है — इसलिए स्थान बदलने पर तारीख़ में एक दिन का अंतर संभव है। इसी कारण Bhakti Sarovar पर समय एक राष्ट्रीय औसत नहीं, बल्कि आपके चुने हुए नगर के वास्तविक सूर्योदय के अनुसार गणना किए जाते हैं। पूरी गणना पद्धति पढ़ें →

इस पृष्ठ के योगदानकर्ता
प्रमूल लेखनप्रियंका शर्मा शास्त्रीय सत्यापनचन्द्रभूषण मणि त्रिपाठी दीसंपादकीय समीक्षादीपक शर्मा

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सामान्य प्रश्न

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

2026 में महानवमी / आयुध पूजा 19 अक्टूबर 2026 (सोमवार) को है।
महानवमी / आयुध पूजा आश्विन, शुक्ल नवमी तिथि को मनाया जाने वाला पर्व है।
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अस्वीकरण

इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह केवल सामान्य सूचना हेतु हैं। भक्ति सरोवर इनका समर्थन नहीं करता। जानकारी विभिन्न पंचांग, प्रवचनों, मान्यताओं और धर्मग्रंथों से संग्रहित है। कृपया अपने विवेक का उपयोग करें।