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माँ गायत्री प्राकट्योत्सव

28 अगस्त 2026 · शुक्रवार श्रावण, शुक्ल पूर्णिमा

श्रावण माह 2026 में माँ गायत्री प्राकट्योत्सव कब है?

संक्षिप्त उत्तर

माँ गायत्री प्राकट्योत्सव 2026 कब है?

माँ गायत्री प्राकट्योत्सव 2026 शुक्रवार, 28 अगस्त 2026 को मनाई जाएगी। माँ गायत्री प्राकट्योत्सव की तिथि श्रावण, शुक्ल पूर्णिमा है। माँ गायत्री प्राकट्योत्सव की पूजा का शुभ मुहूर्त 05:37 – 08:09 तक रहेगा।

दिनांक28 अगस्त 2026
तिथिश्रावण, शुक्ल पूर्णिमा
पूजा मुहूर्त05:37 – 08:09
पर्व जानकारी

पर्व सारांश

मुख्य तिथिश्रावण, शुक्ल पूर्णिमाश्रावण माह के व्रत-त्योहार
मुख्य देवतादेवी गायत्री
वार-देवतामाँ लक्ष्मी · माँ संतोषीशुक्रवार
नक्षत्रशतभिषाअतिगण्ड
संक्षिप्त परिचय

माँ गायत्री प्राकट्योत्सव का महत्व और उत्सव

माँ गायत्री प्राकट्योत्सव श्रावण, शुक्ल पूर्णिमा तिथि को मनाया जाने वाला हिंदू पर्व है। इस दिन देवी गायत्री की पूजा की जाती है और सुख-समृद्धि एवं रक्षा की प्रार्थना की जाती है।

पंचांग विवरण

त्योहार का पंचांग और शुभ समय

मुख्य पंचांग विवरण

तिथि (सूर्योदय)शुक्ल पूर्णिमा
नक्षत्रशतभिषा
योगअतिगण्ड
करणबव
ऋतुशरददक्षिणायन
संवत्सरसिद्धार्थि
दिशा शूलपश्चिमजौ या दही खाकर

माँ गायत्री प्राकट्योत्सव के दिन पूजा, स्नान और दान का शुभ समय

मुहूर्त / योगसमयउपयोगस्थिति
ब्रह्म मुहूर्त 04:01 – 04:49 स्नान, जप, संकल्प शुभ
प्रातः पूजन 05:37 – 08:09 पूजा और संकल्प श्रेष्ठ
अभिजीत मुहूर्त 11:33 – 12:24 सामान्य शुभ कार्य शुभ
विजय मुहूर्त 16:39 – 17:30 कार्य-सिद्धि, संकल्प शुभ
सन्ध्या पूजन 17:33 – 18:45 दीप, आरती, कथा शुभ
राहु काल (वर्ज्य) 10:23 – 11:59 शुभ कार्य में टालें सावधानी
तिथि शुरू 27 Aug 09:08 AM
ब्रह्म मुहूर्त जप / स्नान 04:01–04:49
प्रातः पूजा मुख्य संकल्प 05:37–08:09
अभिजीत शुभ मुहूर्त 11:33 – 12:24
तिथि समाप्त 28 Aug 09:48 AM
सन्ध्या पूजन दीप, आरती 17:33–18:45

समय वाराणसी के सूर्योदय/सूर्यास्त पर आधारित हैं; स्थान अनुसार थोड़ा अंतर संभव है।

पर्व विवरण

माँ गायत्री प्राकट्योत्सव — महत्व, कथा और परंपरा

श्रावण मास की पूर्णिमा—और कुछ परंपराओं में ज्येष्ठ शुक्ल एकादशी—को मनाया जाने वाला ‘माँ गायत्री प्राकट्योत्सव’ विद्या-साधना का परम पावन अवसर है। वर्षा से सराबोर श्रावण हरियाली, शीतलता और नाद से मन को अंतर्मुख बनाता है, जिससे मंत्र-जप का प्रभाव और गहरा होता है। वेदव्यास कहते हैं, जैसे दूध में घी और पुष्पों में मधु, वैसे ही समस्त वेदों का सार गायत्री में निहित है; विश्वामित्र भी इसे सर्वश्रेष्ठ शुद्धि-प्रद मंत्र मानते हैं। जो साधक प्रतिदिन “ॐ भूर्भुवः स्वः…” का जप करता है, वह पापों को उसी तरह उतार देता है जैसे सर्प केंचुल त्यागता है। गंगा जहाँ तन को निर्मल करती है, वहीं गायत्री आत्मा को पावन बनाती है; इसी कारण इसे ‘ब्रह्म-गंगा’ कहा जाता है। भारतीय संस्कृति की जननी मानी जाने वाली माँ गायत्री से ही चारों वेद प्रकट हुए और ज्ञान की धारा आज तक अविरल बह रही है।

विश्वसनीयता एवं प्रामाणिकता

माँ गायत्री प्राकट्योत्सव की तिथि कैसे निर्धारित हुई?

पंचांग-सत्यापित
पंचांग तिथिश्रावण, शुक्ल पूर्णिमा
गणना का आधारतिथि-आधारित (चंद्र-सौर)
गणना पद्धतिदृक् गणित (Meeus)
संदर्भ स्थानउज्जैन
आराध्य देवदेवी गायत्री
अंतिम संशोधन27 Apr 2026

तिथि का निर्धारण सूर्योदय के समय प्रचलित तिथि से होता है, और सूर्योदय प्रत्येक नगर में भिन्न होता है — इसलिए स्थान बदलने पर तारीख़ में एक दिन का अंतर संभव है। इसी कारण Bhakti Sarovar पर समय एक राष्ट्रीय औसत नहीं, बल्कि आपके चुने हुए नगर के वास्तविक सूर्योदय के अनुसार गणना किए जाते हैं। पूरी गणना पद्धति पढ़ें →

इस पृष्ठ के योगदानकर्ता
प्रमूल लेखनप्रियंका शर्मा शास्त्रीय सत्यापनचन्द्रभूषण मणि त्रिपाठी दीसंपादकीय समीक्षादीपक शर्मा

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सामान्य प्रश्न

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

2026 में माँ गायत्री प्राकट्योत्सव 28 अगस्त 2026 (शुक्रवार) को है।
माँ गायत्री प्राकट्योत्सव श्रावण, शुक्ल पूर्णिमा तिथि को मनाया जाने वाला पर्व है।
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अस्वीकरण

इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह केवल सामान्य सूचना हेतु हैं। भक्ति सरोवर इनका समर्थन नहीं करता। जानकारी विभिन्न पंचांग, प्रवचनों, मान्यताओं और धर्मग्रंथों से संग्रहित है। कृपया अपने विवेक का उपयोग करें।