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लक्ष्मी पूजा

8 नवंबर 2026 · रविवार कार्तिक, कृष्ण अमावस्या

कार्तिक माह 2026 में लक्ष्मी पूजा कब है?

संक्षिप्त उत्तर

लक्ष्मी पूजा 2026 कब है?

लक्ष्मी पूजा 2026 रविवार, 8 नवंबर 2026 को मनाई जाएगी। लक्ष्मी पूजा की तिथि कार्तिक, कृष्ण अमावस्या है। लक्ष्मी पूजा की पूजा का शुभ मुहूर्त 06:10 – 08:22 तक रहेगा।

दिनांक8 नवंबर 2026
तिथिकार्तिक, कृष्ण अमावस्या
पूजा मुहूर्त06:10 – 08:22
पर्व जानकारी

पर्व सारांश

मुख्य तिथिकार्तिक, कृष्ण अमावस्या कार्तिक माह के व्रत-त्योहार
मुख्य देवतामाँ लक्ष्मी
वार-देवतासूर्य देवरविवार
नक्षत्रस्वातिआयुष्मान
संक्षिप्त परिचय

लक्ष्मी पूजा का महत्व और उत्सव

लक्ष्मी पूजा कार्तिक, कृष्ण अमावस्या तिथि को मनाया जाने वाला हिंदू पर्व है। इस दिन माँ लक्ष्मी की पूजा की जाती है और सुख-समृद्धि एवं रक्षा की प्रार्थना की जाती है।

पंचांग विवरण

त्योहार का पंचांग और शुभ समय

मुख्य पंचांग विवरण

तिथि (सूर्योदय)कृष्ण चतुर्दशी
नक्षत्रस्वाति
योगआयुष्मान
करणशकुनि
ऋतुहेमन्तदक्षिणायन
संवत्सरसिद्धार्थि
दिशा शूलपश्चिमघी या दलिया खाकर

लक्ष्मी पूजा के दिन पूजा, स्नान और दान का शुभ समय

मुहूर्त / योगसमयउपयोगस्थिति
ब्रह्म मुहूर्त 04:34 – 05:22 स्नान, जप, संकल्प शुभ
प्रातः पूजन 06:10 – 08:22 पूजा और संकल्प श्रेष्ठ
अभिजीत मुहूर्त 11:19 – 12:03 सामान्य शुभ कार्य शुभ
विजय मुहूर्त 15:44 – 16:28 कार्य-सिद्धि, संकल्प शुभ
सन्ध्या पूजन 16:25 – 17:37 दीप, आरती, कथा शुभ
राहु काल (वर्ज्य) 15:50 – 17:13 शुभ कार्य में टालें सावधानी
तिथि शुरू 08 Nov 11:27 AM
ब्रह्म मुहूर्त जप / स्नान 04:34–05:22
प्रातः पूजा मुख्य संकल्प 06:10–08:22
अभिजीत शुभ मुहूर्त 11:19 – 12:03
तिथि समाप्त 09 Nov 12:31 PM
सन्ध्या पूजन दीप, आरती 16:25–17:37

समय वाराणसी के सूर्योदय/सूर्यास्त पर आधारित हैं; स्थान अनुसार थोड़ा अंतर संभव है।

पर्व विवरण

लक्ष्मी पूजा — महत्व, कथा और परंपरा

दीपावली की अमावस्या-रात्रि पर लक्ष्मी-पूजा धन-समृद्धि और सौभाग्य का परम क्षण मानी जाती है। मान्यता है कि विष्णु के योग-निद्रा में होते ही महालक्ष्मी पृथ्वी पर विचरण कर स्वच्छ, उजले घरों में प्रवेश करती हैं; इसलिए दिनभर झाड़-पोंछ, रंगोली और दीप-सज्जा अनिवार्य है। संध्या-काल में परिवार पूर्वमुख बैठकर कलश-स्थापना करता है, चावल के ढेर पर कमलासन लक्ष्मी की प्रतिमा विराजित होती है। गंगा-जल, केसर, दही, घृत, शहद व गन्ने के रस से अभिषेक के बाद सिंदूर, कमल, दूर्वा, बिल्वपत्र और नव-धान अर्पित किए जाते हैं। चार-मुखी दीप में घी या तिल-तेल भरकर प्रज्ज्वलित किया जाता है तथा “ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः” मंत्र का 108 बार जप किया जाता है। अंत में गृहलक्ष्मी प्रथम आरती उतारकर कौड़ी, चाँदी के सिक्के व नये बही-खाते चरणों में रखती हैं; यही नए आर्थिक वर्ष का शुभारंभ माना जाता है।

विश्वसनीयता एवं प्रामाणिकता

लक्ष्मी पूजा की तिथि कैसे निर्धारित हुई?

पंचांग-सत्यापित
पंचांग तिथिकार्तिक, कृष्ण अमावस्या
गणना का आधारतिथि-आधारित (चंद्र-सौर)
गणना पद्धतिदृक् गणित (Meeus)
संदर्भ स्थानउज्जैन
आराध्य देवमाँ लक्ष्मी
अंतिम संशोधन20 Apr 2026

तिथि का निर्धारण सूर्योदय के समय प्रचलित तिथि से होता है, और सूर्योदय प्रत्येक नगर में भिन्न होता है — इसलिए स्थान बदलने पर तारीख़ में एक दिन का अंतर संभव है। इसी कारण Bhakti Sarovar पर समय एक राष्ट्रीय औसत नहीं, बल्कि आपके चुने हुए नगर के वास्तविक सूर्योदय के अनुसार गणना किए जाते हैं। पूरी गणना पद्धति पढ़ें →

इस पृष्ठ के योगदानकर्ता
प्रमूल लेखनप्रियंका शर्मा शास्त्रीय सत्यापनचन्द्रभूषण मणि त्रिपाठी दीसंपादकीय समीक्षादीपक शर्मा

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सामान्य प्रश्न

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

2026 में लक्ष्मी पूजा 8 नवंबर 2026 (रविवार) को है।
लक्ष्मी पूजा कार्तिक, कृष्ण अमावस्या तिथि को मनाया जाने वाला पर्व है।
!

अस्वीकरण

इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह केवल सामान्य सूचना हेतु हैं। भक्ति सरोवर इनका समर्थन नहीं करता। जानकारी विभिन्न पंचांग, प्रवचनों, मान्यताओं और धर्मग्रंथों से संग्रहित है। कृपया अपने विवेक का उपयोग करें।