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कुम्भ संक्रांति

13 फरवरी 2027 · शनिवार माघ, शुक्ल सप्तमी

माघ माह 2027 में कुम्भ संक्रांति कब है?

संक्षिप्त उत्तर

कुम्भ संक्रांति 2027 कब है?

कुम्भ संक्रांति 2027 शनिवार, 13 फरवरी 2027 को मनाई जाएगी। कुम्भ संक्रांति की तिथि माघ, शुक्ल सप्तमी है। कुम्भ संक्रांति की पूजा का शुभ मुहूर्त 06:34 – 08:49 तक रहेगा।

दिनांक13 फरवरी 2027
तिथिमाघ, शुक्ल सप्तमी
पूजा मुहूर्त06:34 – 08:49
पर्व जानकारी

पर्व सारांश

मुख्य तिथिमाघ, शुक्ल सप्तमीमाघ माह के व्रत-त्यौहार
मुख्य देवतासूर्यदेव
वार-देवताशनि देवशनिवार
नक्षत्रभरणीशुक्ल
संक्षिप्त परिचय

कुम्भ संक्रांति का महत्व और उत्सव

कुम्भ संक्रांति माघ, शुक्ल सप्तमी तिथि को मनाया जाने वाला हिंदू पर्व है। इस दिन सूर्यदेव की पूजा की जाती है और सुख-समृद्धि एवं रक्षा की प्रार्थना की जाती है।

पंचांग विवरण

त्योहार का पंचांग और शुभ समय

मुख्य पंचांग विवरण

तिथि (सूर्योदय)शुक्ल सप्तमी
नक्षत्रभरणी
योगशुक्ल
करणगर
ऋतुशिशिरउत्तरायण
संवत्सरसिद्धार्थि
दिशा शूलपूर्वअदरक या तिल खाकर

कुम्भ संक्रांति के दिन पूजा, स्नान और दान का शुभ समय

मुहूर्त / योगसमयउपयोगस्थिति
ब्रह्म मुहूर्त 04:58 – 05:46 स्नान, जप, संकल्प शुभ
प्रातः पूजन 06:34 – 08:49 पूजा और संकल्प श्रेष्ठ
अभिजीत मुहूर्त 11:49 – 12:34 सामान्य शुभ कार्य शुभ
विजय मुहूर्त 16:19 – 17:04 कार्य-सिद्धि, संकल्प शुभ
सन्ध्या पूजन 17:02 – 18:14 दीप, आरती, कथा शुभ
राहु काल (वर्ज्य) 09:23 – 10:47 शुभ कार्य में टालें सावधानी
तिथि शुरू 13 Feb 07:01 AM
ब्रह्म मुहूर्त जप / स्नान 04:58–05:46
प्रातः पूजा मुख्य संकल्प 06:34–08:49
अभिजीत शुभ मुहूर्त 11:49 – 12:34
तिथि समाप्त 13 Feb 10:13 AM
सन्ध्या पूजन दीप, आरती 17:02–18:14

समय वाराणसी के सूर्योदय/सूर्यास्त पर आधारित हैं; स्थान अनुसार थोड़ा अंतर संभव है।

पर्व विवरण

कुम्भ संक्रांति — महत्व, कथा और परंपरा

कुम्भ संक्रान्ति उस पावन क्षण का संकेत है जब सूर्य मकर की सीमा लाँघ कुंभ राशि में प्रवेश करता है—शिशिर की ठिठुरन अब बसंत की धूप में घुलने लगती है। परम्परा है कि ब्रह्ममुहूर्त में किसी पवित्र नदी, सरोवर या अपने गृह-आंगन के कुण्ड में स्नान कर तन-मन शुद्ध करें, फिर पूर्वाभिमुख खड़े होकर तांबे के पात्र से “ॐ घृणि सूर्याय नमः” कहते हुए अर्घ्य अर्पित करें। घर के देवालय में घृतदीप प्रज्वलित कर आदित्य हृदय स्तोत्र, सूर्य कवच, सूर्य चालीसा या गायत्री मंत्र का जप किया जाता है; मान्यता है कि इससे तेज, आरोग्य और यश का संचार होता है। दिन का पुण्य पूर्ण करने हेतु तिल-गुड़, काले कम्बल, अन्न या घी का दान करना श्रेयस्कर माना गया है—कहा जाता है कि ऐसा करने से परिवार में दीर्घकालिक समृद्धि और शुभ ऊर्जा बनी रहती है।

 

विश्वसनीयता एवं प्रामाणिकता

कुम्भ संक्रांति की तिथि कैसे निर्धारित हुई?

पंचांग-सत्यापित
पंचांग तिथिमाघ, शुक्ल सप्तमी
गणना का आधारतिथि-आधारित (चंद्र-सौर)
गणना पद्धतिदृक् गणित (Meeus)
संदर्भ स्थानउज्जैन
आराध्य देवसूर्यदेव
अंतिम संशोधन30 Mar 2026

तिथि का निर्धारण सूर्योदय के समय प्रचलित तिथि से होता है, और सूर्योदय प्रत्येक नगर में भिन्न होता है — इसलिए स्थान बदलने पर तारीख़ में एक दिन का अंतर संभव है। इसी कारण Bhakti Sarovar पर समय एक राष्ट्रीय औसत नहीं, बल्कि आपके चुने हुए नगर के वास्तविक सूर्योदय के अनुसार गणना किए जाते हैं। पूरी गणना पद्धति पढ़ें →

इस पृष्ठ के योगदानकर्ता
प्रमूल लेखनप्रियंका शर्मा शास्त्रीय सत्यापनचन्द्रभूषण मणि त्रिपाठी दीसंपादकीय समीक्षादीपक शर्मा

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सामान्य प्रश्न

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

2027 में कुम्भ संक्रांति 13 फरवरी 2027 (शनिवार) को है।
कुम्भ संक्रांति माघ, शुक्ल सप्तमी तिथि को मनाया जाने वाला पर्व है।
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अस्वीकरण

इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह केवल सामान्य सूचना हेतु हैं। भक्ति सरोवर इनका समर्थन नहीं करता। जानकारी विभिन्न पंचांग, प्रवचनों, मान्यताओं और धर्मग्रंथों से संग्रहित है। कृपया अपने विवेक का उपयोग करें।