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कार्तिक स्कन्द षष्ठी

15 नवंबर 2026 · रविवार कार्तिक, शुक्ल षष्ठी

कार्तिक माह 2026 में स्कन्द षष्ठी कब है?

संक्षिप्त उत्तर

कार्तिक स्कन्द षष्ठी 2026 कब है?

कार्तिक स्कन्द षष्ठी 2026 रविवार, 15 नवंबर 2026 को मनाई जाएगी। कार्तिक स्कन्द षष्ठी की तिथि कार्तिक, शुक्ल षष्ठी है। कार्तिक स्कन्द षष्ठी की पूजा का शुभ मुहूर्त 06:15 – 08:26 तक रहेगा।

दिनांक15 नवंबर 2026
तिथिकार्तिक, शुक्ल षष्ठी
पूजा मुहूर्त06:15 – 08:26
पर्व जानकारी

पर्व सारांश

मुख्य तिथिकार्तिक, शुक्ल षष्ठीकार्तिक माह के व्रत-त्योहार
मुख्य देवताभगवान कार्तिकेय
वार-देवतासूर्य देवरविवार
नक्षत्रउत्तराषाढ़ागण्ड
संक्षिप्त परिचय

कार्तिक स्कन्द षष्ठी का महत्व और उत्सव

कार्तिक स्कन्द षष्ठी कार्तिक, शुक्ल षष्ठी तिथि को मनाया जाने वाला हिंदू पर्व है। इस दिन भगवान कार्तिकेय की पूजा की जाती है और सुख-समृद्धि एवं रक्षा की प्रार्थना की जाती है।

पंचांग विवरण

त्योहार का पंचांग और शुभ समय

मुख्य पंचांग विवरण

तिथि (सूर्योदय)शुक्ल षष्ठी
नक्षत्रउत्तराषाढ़ा
योगगण्ड
करणकौलव
ऋतुहेमन्तदक्षिणायन
संवत्सरसिद्धार्थि
दिशा शूलपश्चिमघी या दलिया खाकर

कार्तिक स्कन्द षष्ठी के दिन पूजा, स्नान और दान का शुभ समय

मुहूर्त / योगसमयउपयोगस्थिति
ब्रह्म मुहूर्त 04:39 – 05:27 स्नान, जप, संकल्प शुभ
प्रातः पूजन 06:15 – 08:26 पूजा और संकल्प श्रेष्ठ
अभिजीत मुहूर्त 11:20 – 12:04 सामान्य शुभ कार्य शुभ
विजय मुहूर्त 15:42 – 16:26 कार्य-सिद्धि, संकल्प शुभ
सन्ध्या पूजन 16:22 – 17:34 दीप, आरती, कथा शुभ
राहु काल (वर्ज्य) 15:48 – 17:10 शुभ कार्य में टालें सावधानी
तिथि शुरू 14 Nov 11:23 PM
ब्रह्म मुहूर्त जप / स्नान 04:39–05:27
प्रातः पूजा मुख्य संकल्प 06:15–08:26
अभिजीत शुभ मुहूर्त 11:20 – 12:04
तिथि समाप्त 16 Nov 02:00 AM
सन्ध्या पूजन दीप, आरती 16:22–17:34

समय वाराणसी के सूर्योदय/सूर्यास्त पर आधारित हैं; स्थान अनुसार थोड़ा अंतर संभव है।

पर्व विवरण

कार्तिक स्कन्द षष्ठी — महत्व, कथा और परंपरा

कार्तिक शुक्ल षष्ठी को मनाई जाने वाली स्कन्द षष्ठी, जिसे कुमार षष्ठी या संतान षष्ठी भी कहते हैं, शिव-पुत्र भगवान कार्तिकेय के जन्म-दिवस का पावन उत्सव है। इस दिन शिव-पार्वती के साथ कुमार स्कन्द की स्वर्णिम प्रतिमा स्थापित कर अखंड दीप जलाए जाते हैं; दुर्वा, केसर-दूध, केतकी-पुष्प और लाल चन्दन से अभिषेक किया जाता है। स्कन्दपुराण के नारद-नारायण संवाद में व्रत की महिमा विस्तार से वर्णित है—कहते हैं, इससे संतान-सुख, शौर्य और रोग-निवारण का वर मिलता है। ज्योतिष के अनुसार षष्ठी तिथि और मंगल ग्रह पर कार्तिकेय का आधिपत्य है; जिनकी कुण्डली में कर्क-स्थ मंगल अशुभ फल दे रहा हो, वे आज व्रत रखकर दक्षिणाभिमुख दीप-दान करें, तो मंगल बलवान होता है और जीवन में साहस, विजय व सम्पन्नता बढ़ती है।

विश्वसनीयता एवं प्रामाणिकता

कार्तिक स्कन्द षष्ठी की तिथि कैसे निर्धारित हुई?

पंचांग-सत्यापित
पंचांग तिथिकार्तिक, शुक्ल षष्ठी
गणना का आधारतिथि-आधारित (चंद्र-सौर)
गणना पद्धतिदृक् गणित (Meeus)
संदर्भ स्थानउज्जैन
आराध्य देवभगवान कार्तिकेय
अंतिम संशोधन20 Apr 2026

तिथि का निर्धारण सूर्योदय के समय प्रचलित तिथि से होता है, और सूर्योदय प्रत्येक नगर में भिन्न होता है — इसलिए स्थान बदलने पर तारीख़ में एक दिन का अंतर संभव है। इसी कारण Bhakti Sarovar पर समय एक राष्ट्रीय औसत नहीं, बल्कि आपके चुने हुए नगर के वास्तविक सूर्योदय के अनुसार गणना किए जाते हैं। पूरी गणना पद्धति पढ़ें →

इस पृष्ठ के योगदानकर्ता
प्रमूल लेखनप्रियंका शर्मा शास्त्रीय सत्यापनचन्द्रभूषण मणि त्रिपाठी दीसंपादकीय समीक्षादीपक शर्मा

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सामान्य प्रश्न

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

2026 में कार्तिक स्कन्द षष्ठी 15 नवंबर 2026 (रविवार) को है।
कार्तिक स्कन्द षष्ठी कार्तिक, शुक्ल षष्ठी तिथि को मनाया जाने वाला पर्व है।
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अस्वीकरण

इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह केवल सामान्य सूचना हेतु हैं। भक्ति सरोवर इनका समर्थन नहीं करता। जानकारी विभिन्न पंचांग, प्रवचनों, मान्यताओं और धर्मग्रंथों से संग्रहित है। कृपया अपने विवेक का उपयोग करें।