हिन्दू व्रत एवं त्यौहार - BhaktiSarovar.in

कार्तिक पूर्णिमा

24 नवंबर 2026 · मंगलवार कार्तिक, शुक्ल पूर्णिमा

कार्तिक माह 2026 में कार्तिक पूर्णिमा कब है?

संक्षिप्त उत्तर

कार्तिक पूर्णिमा 2026 कब है?

कार्तिक पूर्णिमा 2026 मंगलवार, 24 नवंबर 2026 को मनाई जाएगी। कार्तिक पूर्णिमा की तिथि कार्तिक, शुक्ल पूर्णिमा है। कार्तिक पूर्णिमा की पूजा का शुभ मुहूर्त 06:22 – 08:31 तक रहेगा।

दिनांक24 नवंबर 2026
तिथिकार्तिक, शुक्ल पूर्णिमा
पूजा मुहूर्त06:22 – 08:31
पर्व जानकारी

पर्व सारांश

मुख्य तिथिकार्तिक, शुक्ल पूर्णिमाकार्तिक माह के व्रत-त्योहार
वार-देवताहनुमान जीमंगलवार
नक्षत्रकृत्तिकापरिघ
संक्षिप्त परिचय

कार्तिक पूर्णिमा का महत्व और उत्सव

कार्तिक पूर्णिमा कार्तिक, शुक्ल पूर्णिमा तिथि को मनाया जाने वाला हिंदू पर्व है।

पंचांग विवरण

त्योहार का पंचांग और शुभ समय

मुख्य पंचांग विवरण

तिथि (सूर्योदय)शुक्ल पूर्णिमा
नक्षत्रकृत्तिका
योगपरिघ
करणविष्टि
ऋतुहेमन्तदक्षिणायन
संवत्सरसिद्धार्थि
दिशा शूलउत्तरगुड़ खाकर

कार्तिक पूर्णिमा के दिन पूजा, स्नान और दान का शुभ समय

मुहूर्त / योगसमयउपयोगस्थिति
ब्रह्म मुहूर्त 04:46 – 05:34 स्नान, जप, संकल्प शुभ
प्रातः पूजन 06:22 – 08:31 पूजा और संकल्प श्रेष्ठ
अभिजीत मुहूर्त 11:23 – 12:06 सामान्य शुभ कार्य शुभ
विजय मुहूर्त 15:41 – 16:24 कार्य-सिद्धि, संकल्प शुभ
सन्ध्या पूजन 16:20 – 17:32 दीप, आरती, कथा शुभ
राहु काल (वर्ज्य) 14:26 – 15:47 शुभ कार्य में टालें सावधानी
तिथि शुरू 23 Nov 11:42 PM
ब्रह्म मुहूर्त जप / स्नान 04:46–05:34
प्रातः पूजा मुख्य संकल्प 06:22–08:31
अभिजीत शुभ मुहूर्त 11:23 – 12:06
तिथि समाप्त 24 Nov 08:23 PM
सन्ध्या पूजन दीप, आरती 16:20–17:32

समय वाराणसी के सूर्योदय/सूर्यास्त पर आधारित हैं; स्थान अनुसार थोड़ा अंतर संभव है।

पर्व विवरण

कार्तिक पूर्णिमा — महत्व, कथा और परंपरा

कार्तिक शुक्ल पूर्णिमा, जिसे त्रिपुरारी पूर्णिमा या देव दीपावली भी कहते हैं, हिंदू धर्म की मोक्षदायिनी तिथियों में प्रमुख है। कथानुसार इसी दिन शिव ने त्रिपुरासुर का संहार किया; देवताओं ने दीप-मालाएँ जलाकर जयघोष किया, इसलिए यह दीपावली के बाद का दूसरा प्रकाश-पर्व बना। कार्तिक को दामोदर-मास भी कहा जाता है; दामोदर, विष्णु का करुणामय रूप है, अतः क्षीरसागर-दान, चौबीस अंगुल के पात्र में दूध भरकर स्वर्ण या रजत मछली अर्पित करना, विशेष पुण्यकारी माना गया है। ब्रह्मा, विष्णु, शिव, अंगिरा एवं आदित्य आदि देवताओं की संयुक्त कृपा इस दिन साधक को दीर्घायु, आरोग्य और समृद्धि का वर देती है। प्रातः गंगा-स्नान, तुलसी-दीपदान और दान-पुण्य से पाप क्षीण होते हैं, जबकि संध्या-वेला में घी या तिल-तेल के दीप जलाकर त्रिपुरारी शिव का स्मरण जीवन को आलोकित करता है।

विश्वसनीयता एवं प्रामाणिकता

कार्तिक पूर्णिमा की तिथि कैसे निर्धारित हुई?

पंचांग-सत्यापित
पंचांग तिथिकार्तिक, शुक्ल पूर्णिमा
गणना का आधारतिथि-आधारित (चंद्र-सौर)
गणना पद्धतिदृक् गणित (Meeus)
संदर्भ स्थानउज्जैन
अंतिम संशोधन20 Apr 2026

तिथि का निर्धारण सूर्योदय के समय प्रचलित तिथि से होता है, और सूर्योदय प्रत्येक नगर में भिन्न होता है — इसलिए स्थान बदलने पर तारीख़ में एक दिन का अंतर संभव है। इसी कारण Bhakti Sarovar पर समय एक राष्ट्रीय औसत नहीं, बल्कि आपके चुने हुए नगर के वास्तविक सूर्योदय के अनुसार गणना किए जाते हैं। पूरी गणना पद्धति पढ़ें →

इस पृष्ठ के योगदानकर्ता
प्रमूल लेखनप्रियंका शर्मा शास्त्रीय सत्यापनचन्द्रभूषण मणि त्रिपाठी दीसंपादकीय समीक्षादीपक शर्मा

गूगल पर भक्ति सरोवर को अपना पसंदीदा स्रोत बनाएं

जब आप गूगल पर "कार्तिक पूर्णिमा" या कोई भी व्रत-त्योहार खोजते हैं, तो गूगल आपको आपके पसंदीदा स्रोत से उत्तर दिखा सकता है। भक्ति सरोवर को अपना पसंदीदा स्रोत बनाने के लिए:

1
गूगल पर खोजेंकोई भी व्रत या त्योहार खोजें
2
भक्ति सरोवर चुनेंपरिणामों में हमारा लिंक ढूँढें और ⋮ (three-dot) मेनू दबाएं
3
"More from this site" चुनेंगूगल आपको भविष्य में भक्ति सरोवर के परिणाम प्राथमिकता से दिखाएगा
पसंदीदा स्रोत बनाएं →
सामान्य प्रश्न

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

2026 में कार्तिक पूर्णिमा 24 नवंबर 2026 (मंगलवार) को है।
कार्तिक पूर्णिमा कार्तिक, शुक्ल पूर्णिमा तिथि को मनाया जाने वाला पर्व है।
!

अस्वीकरण

इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह केवल सामान्य सूचना हेतु हैं। भक्ति सरोवर इनका समर्थन नहीं करता। जानकारी विभिन्न पंचांग, प्रवचनों, मान्यताओं और धर्मग्रंथों से संग्रहित है। कृपया अपने विवेक का उपयोग करें।