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कार्तिक कालभैरव कालाष्टमी

1 नवंबर 2026 · रविवार कार्तिक, कृष्ण अष्टमी

कार्तिक माह 2026 में कालभैरव कालाष्टमी कब है?

संक्षिप्त उत्तर

कार्तिक कालभैरव कालाष्टमी 2026 कब है?

कार्तिक कालभैरव कालाष्टमी 2026 रविवार, 1 नवंबर 2026 को मनाई जाएगी। कार्तिक कालभैरव कालाष्टमी की तिथि कार्तिक, कृष्ण अष्टमी है। कार्तिक कालभैरव कालाष्टमी की पूजा का शुभ मुहूर्त 06:06 – 08:20 तक रहेगा।

दिनांक1 नवंबर 2026
तिथिकार्तिक, कृष्ण अष्टमी
पूजा मुहूर्त06:06 – 08:20
पर्व जानकारी

पर्व सारांश

मुख्य तिथिकार्तिक, कृष्ण अष्टमीकार्तिक माह के व्रत-त्योहार
मुख्य देवताभगवान कालभैरव
वार-देवतासूर्य देवरविवार
नक्षत्रपुष्यसाध्य
संक्षिप्त परिचय

कार्तिक कालभैरव कालाष्टमी का महत्व और उत्सव

कार्तिक कालभैरव कालाष्टमी कार्तिक, कृष्ण अष्टमी तिथि को मनाया जाने वाला हिंदू पर्व है। इस दिन भगवान कालभैरव की पूजा की जाती है और सुख-समृद्धि एवं रक्षा की प्रार्थना की जाती है।

पंचांग विवरण

त्योहार का पंचांग और शुभ समय

मुख्य पंचांग विवरण

तिथि (सूर्योदय)कृष्ण सप्तमी
नक्षत्रपुष्य
योगसाध्य
करणबव
ऋतुहेमन्तदक्षिणायन
संवत्सरसिद्धार्थि
दिशा शूलपश्चिमघी या दलिया खाकर

कार्तिक कालभैरव कालाष्टमी के दिन पूजा, स्नान और दान का शुभ समय

मुहूर्त / योगसमयउपयोगस्थिति
ब्रह्म मुहूर्त 04:30 – 05:18 स्नान, जप, संकल्प शुभ
प्रातः पूजन 06:06 – 08:20 पूजा और संकल्प श्रेष्ठ
अभिजीत मुहूर्त 11:19 – 12:04 सामान्य शुभ कार्य शुभ
विजय मुहूर्त 15:47 – 16:32 कार्य-सिद्धि, संकल्प शुभ
सन्ध्या पूजन 16:29 – 17:41 दीप, आरती, कथा शुभ
राहु काल (वर्ज्य) 15:53 – 17:17 शुभ कार्य में टालें सावधानी
तिथि शुरू 01 Nov 02:51 PM
ब्रह्म मुहूर्त जप / स्नान 04:30–05:18
प्रातः पूजा मुख्य संकल्प 06:06–08:20
अभिजीत शुभ मुहूर्त 11:19 – 12:04
तिथि समाप्त 02 Nov 01:10 PM
सन्ध्या पूजन दीप, आरती 16:29–17:41

समय वाराणसी के सूर्योदय/सूर्यास्त पर आधारित हैं; स्थान अनुसार थोड़ा अंतर संभव है।

पर्व विवरण

कार्तिक कालभैरव कालाष्टमी — महत्व, कथा और परंपरा

कार्तिकमास की कृष्णअष्टमी पर मनाई जाने वाली कालभैरवकालाष्टमी भयनाश और साहसवृद्धि का पर्व है। इस दिन साधक श्रीकालभैरव—शिव के उग्र, रक्षक रूप—की उपासना कर रोग, शत्रु और अकालमृत्यु से सुरक्षा की कामना करते हैं। पूजनविधि में ‘ॐभैरवायनमः’ जपते हुए चंदन, अक्षत, रक्तपुष्प, सुपारी, नैवेद्य तथा दीपधूप अर्पित किए जाते हैं; तिल का दीप भैरव को विशेष प्रिय माना गया है। नारदपुराण निर्देश देता है कि कालाष्टमी पर भैरवसहित मातादुर्गा का भी स्तवन किया जाए, जिससे जीवन में संयम, न्यायबुद्धि और निर्भयता बनी रहे। कार्तिक स्वयं तपदान और दीपअनुष्ठानों का महीना है—हल्की ठंडक और दीपपंक्तियों के बीच की गई भैरवआराधना साधक को आत्मअनुशासन, तेजस्विता और आध्यात्मिक बल का अनूठा संगम प्रदान करती है।

विश्वसनीयता एवं प्रामाणिकता

कार्तिक कालभैरव कालाष्टमी की तिथि कैसे निर्धारित हुई?

पंचांग-सत्यापित
पंचांग तिथिकार्तिक, कृष्ण अष्टमी
गणना का आधारतिथि-आधारित (चंद्र-सौर)
गणना पद्धतिदृक् गणित (Meeus)
संदर्भ स्थानउज्जैन
आराध्य देवभगवान कालभैरव
अंतिम संशोधन19 Apr 2026

तिथि का निर्धारण सूर्योदय के समय प्रचलित तिथि से होता है, और सूर्योदय प्रत्येक नगर में भिन्न होता है — इसलिए स्थान बदलने पर तारीख़ में एक दिन का अंतर संभव है। इसी कारण Bhakti Sarovar पर समय एक राष्ट्रीय औसत नहीं, बल्कि आपके चुने हुए नगर के वास्तविक सूर्योदय के अनुसार गणना किए जाते हैं। पूरी गणना पद्धति पढ़ें →

इस पृष्ठ के योगदानकर्ता
प्रमूल लेखनप्रियंका शर्मा शास्त्रीय सत्यापनचन्द्रभूषण मणि त्रिपाठी दीसंपादकीय समीक्षादीपक शर्मा

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सामान्य प्रश्न

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

2026 में कार्तिक कालभैरव कालाष्टमी 1 नवंबर 2026 (रविवार) को है।
कार्तिक कालभैरव कालाष्टमी कार्तिक, कृष्ण अष्टमी तिथि को मनाया जाने वाला पर्व है।
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अस्वीकरण

इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह केवल सामान्य सूचना हेतु हैं। भक्ति सरोवर इनका समर्थन नहीं करता। जानकारी विभिन्न पंचांग, प्रवचनों, मान्यताओं और धर्मग्रंथों से संग्रहित है। कृपया अपने विवेक का उपयोग करें।