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ज्येष्ठ प्रदोष व्रत

17 जून 2027 · बुधवार ज्येष्ठ, शुक्ल त्रयोदशी

ज्येष्ठ माह में शुक्ल प्रदोष व्रत कब है?

संक्षिप्त उत्तर

ज्येष्ठ प्रदोष व्रत 2027 कब है?

ज्येष्ठ प्रदोष व्रत 2027 बुधवार, 17 जून 2027 को मनाई जाएगी। ज्येष्ठ प्रदोष व्रत की तिथि ज्येष्ठ, शुक्ल त्रयोदशी है। ज्येष्ठ प्रदोष व्रत की पूजा का शुभ मुहूर्त 05:08 – 07:52 तक रहेगा।

दिनांक17 जून 2027
तिथिज्येष्ठ, शुक्ल त्रयोदशी
पूजा मुहूर्त05:08 – 07:52
पर्व जानकारी

पर्व सारांश

मुख्य तिथिज्येष्ठ, शुक्ल त्रयोदशीज्येष्ठ माह के व्रत-त्योहार
मुख्य देवताभगवान शिव
वार-देवताभगवान विष्णुबुधवार
नक्षत्रअनुराधासिद्ध
संक्षिप्त परिचय

ज्येष्ठ प्रदोष व्रत का महत्व और उत्सव

ज्येष्ठ प्रदोष व्रत ज्येष्ठ, शुक्ल त्रयोदशी तिथि को मनाया जाने वाला हिंदू पर्व है। इस दिन भगवान शिव की पूजा की जाती है और सुख-समृद्धि एवं रक्षा की प्रार्थना की जाती है।

पंचांग विवरण

त्योहार का पंचांग और शुभ समय

मुख्य पंचांग विवरण

तिथि (सूर्योदय)शुक्ल चतुर्दशी
नक्षत्रअनुराधा
योगसिद्ध
करणगर
ऋतुग्रीष्मउत्तरायण
संवत्सररौद्र
दिशा शूलदक्षिणदही खाकर

ज्येष्ठ प्रदोष व्रत के दिन पूजा, स्नान और दान का शुभ समय

मुहूर्त / योगसमयउपयोगस्थिति
ब्रह्म मुहूर्त 03:32 – 04:20 स्नान, जप, संकल्प शुभ
प्रातः पूजन 05:08 – 07:52 पूजा और संकल्प श्रेष्ठ
अभिजीत मुहूर्त 11:31 – 12:26 सामान्य शुभ कार्य शुभ
विजय मुहूर्त 17:00 – 17:55 कार्य-सिद्धि, संकल्प शुभ
सन्ध्या पूजन 18:02 – 19:14 दीप, आरती, कथा शुभ
राहु काल (वर्ज्य) 13:41 – 15:24 शुभ कार्य में टालें सावधानी
तिथि शुरू 16 Jun 02:30 AM
ब्रह्म मुहूर्त जप / स्नान 03:32–04:20
प्रातः पूजा मुख्य संकल्प 05:08–07:52
अभिजीत शुभ मुहूर्त 11:31 – 12:26
तिथि समाप्त 17 Jun 03:20 AM
सन्ध्या पूजन दीप, आरती 18:02–19:14

समय वाराणसी के सूर्योदय/सूर्यास्त पर आधारित हैं; स्थान अनुसार थोड़ा अंतर संभव है।

पर्व विवरण

ज्येष्ठ प्रदोष व्रत — महत्व, कथा और परंपरा

रवि प्रदोष वह पुण्यकाल है जब एक ही संध्या में सूर्यनारायण और भोलेनाथ दोनों की कृपा प्राप्त हो जाती है। मान्यता है कि इस व्रत से खोया हुआ मान-सम्मान पुनः प्राप्त होता है और शरीर निरोगी रहता है। इसकी विधि सरल है—प्रदोष-काल आरम्भ होने से पूर्व घर की पूर्वी दिशा स्वच्छ कर लें, घी का दीपक जलाएँ और एकाग्र चित्त से गायत्री मंत्र का सुभाग्य 27 बार जप करें। ठीक सूर्यास्त से लगभग पौन घंटा पहले से लेकर उतने ही समय पश्चात तक शिव-पूजन का उत्तम अवसर रहता है; इस अवधि में जल, बिल्वपत्र, अक्षत, धूप तथा दीप अर्पित करें और “ॐ नमः शिवाय” का भावपूर्ण स्मरण करें। विश्वास है कि सूर्यदेव की ऊर्जा और महादेव की करुणा, दोनों साथ मिलकर साधक को दीर्घायु, उत्तम स्वास्थ्य तथा आत्मिक तेज का आशीर्वाद प्रदान करते हैं। श्रद्धा और नियम के साथ निभाया गया यह उपवास जीवन में नये उजास का संचार करता है।

आवर्ती व्रत

अन्य प्रदोष व्रत तिथियाँ

सभी प्रदोष व्रत तिथियाँ देखें →
नामतिथिवारपक्ष/तिथिदिन शेष
श्रावण भौम प्रदोष व्रत 25 अगस्त 2026 मंगलवार श्रावण, कृष्ण त्रयोदशी आज देखें
भाद्रपद भौम प्रदोष व्रत 8 सितंबर 2026 मंगलवार भाद्रपद, कृष्ण त्रयोदशी 14 दिन शेष देखें
भाद्रपद गुरु प्रदोष व्रत 24 सितंबर 2026 गुरुवार भाद्रपद, शुक्ल त्रयोदशी 30 दिन शेष देखें
आश्विन गुरु प्रदोष व्रत 8 अक्टूबर 2026 गुरुवार आश्विन, कृष्ण त्रयोदशी 44 दिन शेष देखें
आश्विन शुक्र प्रदोष व्रत 23 अक्टूबर 2026 शुक्रवार आश्विन, शुक्ल त्रयोदशी 59 दिन शेष देखें
मार्गशीर्ष सोम प्रदोष व्रत 21 दिसंबर 2026 सोमवार मार्गशीर्ष, शुक्ल त्रयोदशी 118 दिन शेष देखें

पूरा वार्षिक कैलेंडर, व्रत विधि और पारण नियम — प्रदोष व्रत हब पेज पर देखें।

मंत्र संग्रह

ज्येष्ठ प्रदोष व्रत से संबंधित मंत्र

सभी मंत्र →

शिव मूल मंत्र

ॐ नमः शिवाय

“ॐ नमः शिवाय” का अर्थ है—मैं भगवान शिव को नमन करता हूँ। इसमें “ॐ” परम चेतना, “नमः” विनम्र समर्पण और “शिवाय” कल्याणकारी भ…

पूरा मंत्र पढ़ें →
विश्वसनीयता एवं प्रामाणिकता

ज्येष्ठ प्रदोष व्रत की तिथि कैसे निर्धारित हुई?

पंचांग-सत्यापित
पंचांग तिथिज्येष्ठ, शुक्ल त्रयोदशी
गणना का आधारतिथि-आधारित (चंद्र-सौर)
गणना पद्धतिदृक् गणित (Meeus)
संदर्भ स्थानउज्जैन
आराध्य देवभगवान शिव
अंतिम संशोधन13 Jul 2026

तिथि का निर्धारण सूर्योदय के समय प्रचलित तिथि से होता है, और सूर्योदय प्रत्येक नगर में भिन्न होता है — इसलिए स्थान बदलने पर तारीख़ में एक दिन का अंतर संभव है। इसी कारण Bhakti Sarovar पर समय एक राष्ट्रीय औसत नहीं, बल्कि आपके चुने हुए नगर के वास्तविक सूर्योदय के अनुसार गणना किए जाते हैं। पूरी गणना पद्धति पढ़ें →

इस पृष्ठ के योगदानकर्ता
प्रमूल लेखनप्रियंका शर्मा शास्त्रीय सत्यापनचन्द्रभूषण मणि त्रिपाठी दीसंपादकीय समीक्षादीपक शर्मा

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सामान्य प्रश्न

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

2027 में ज्येष्ठ प्रदोष व्रत 17 जून 2027 (बुधवार) को है।
ज्येष्ठ प्रदोष व्रत ज्येष्ठ, शुक्ल त्रयोदशी तिथि को मनाया जाने वाला पर्व है।
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अस्वीकरण

इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह केवल सामान्य सूचना हेतु हैं। भक्ति सरोवर इनका समर्थन नहीं करता। जानकारी विभिन्न पंचांग, प्रवचनों, मान्यताओं और धर्मग्रंथों से संग्रहित है। कृपया अपने विवेक का उपयोग करें।